कृषि विशेषज्ञों की सलाह: इस समय किसान निपटा लें खेती-किसानी के ये जरूरी काम

आने वाले दिनों में लू (गर्म हवा) की संभावना को ध्यान में रखते हुए सब्जियों, सब्जियों की नर्सरी, जायद फसलों और फलों के बगीचों में हल्की सिंचाई नियमित अंतराल पर करें।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह: इस समय किसान निपटा लें खेती-किसानी के ये जरूरी काम

इस महीने किसान जायद की फसलों की देखरेख के साथ ही खरीफ की फसलों की भी तैयारी शुरू कर देते हैं। जिस तरह से तापमान भी काफी बढ़ा है किसानों को जायद की फसलों को खास ध्यान देने की जरूरत होगी।

आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने किसानों के लिए मौसम आधारित संबंधित कृषि सलाह जारी की है।

आने वाले दिनों में लू (गर्म हवा) की संभावना को ध्यान में रखते हुए सब्जियों, सब्जियों की नर्सरी, जायद फसलों और फलों के बगीचों में हल्की सिंचाई नियमित अंतराल पर करें। नर्सरी व वृक्षों को लू से बचाने के लिए अवरोधकों के उपयोग की सलाह दी जाती है।

रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें, जिससे सूरज की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीट-पतंगों के अंडे और घास के बीज नष्ट हो जाएंगे।

गर्मियों की हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा की बुवाई कर सकते हैं। सनई की बीज दर 60-70 और ढैंचा की 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। अच्छे अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है।

ग्वार, मक्का, बाजरा आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 सेमी गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 सेमी रखें।

किसान अरहर और कपास की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करें और बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।

तापमान अधिक रहने की संभावना को देखते हुए, किसान तैयार सब्जियों की तुड़ाई सुबह या शाम को करें और इसके बाद इसे छायादार स्थान में रखें।

इस मौसम में बेलवाली फसलों व सब्जियों में न्यूनतम नमी बनाएं रखें नहीं तो मृदा में कम नमी होने से परागण पर असर हो सकता है, जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है। इस मौसम में सब्जियों की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।

भिंडी की फसल में तुड़ाई के बाद युरिया @ 5-10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से डाले और माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाए जाने पर ईथियान @1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।

बैंगन और टमाटर की फसल को प्ररोह और फल छेदक कीट से बचाव के लिए ग्रसित फलों व प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

अनाज को भंडारण में रखने से पहले भंडारघर की सफाई करें और अनाज को अच्छी तरह से सुखा लें। दानों में नमी 12 प्रतिशत से ज्यादा नही होनी चाहिए। भंडार घर को अच्छे से साफ कर लें। छत या दीवारों पर यदि दरारें है तो इन्हे भरकर ठीक कर लें। बोरियों को 5 प्रतिशत नीम तेल के घोल से उपचारित करें। बोरियों को धूप में सुखाकर रखें। जिससे कीटों के अंडे और लार्वा व दूसरी बीमारियां आदि नष्ट हो जाएं।

इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहां संभव हो अपने खेत का समतलनीकरण करवाएं।


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