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उत्तर प्रदेश में ‘कोल्ड चेन’ पड़ी है ठंडी, हर साल खराब हो जाती हैं करोड़ों की सब्जियां और फल

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   28 April 2017 10:56 AM GMT

उत्तर प्रदेश में ‘कोल्ड चेन’ पड़ी है ठंडी,  हर साल खराब हो जाती हैं करोड़ों की सब्जियां और फलसंरक्षण के लिए बनाए गए शीतगृहों, फल राइपनिंग इकाईयों और पैक हाउस की बहुत कमी है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। केंद्र सरकार की मदद से बागवानी किसानों को लाभ देने के लिए देश में 68,000 नई फल संरक्षण इकाईयां बनाई गई हैं। लेकिन प्रदेश में फल और सब्जियों के संरक्षण के लिए बनाए गए शीतगृहों, फल राइपनिंग इकाईयों और पैक हाउस की बहुत कमी है।

पूरी दुनिया में मशहूर मलिहाबाद फलपट्टी क्षेत्र के किसानों के लिए फसल सुरक्षा का स्थानीय स्तर पर कोई भी परामर्श केंद्र नहीं स्थापित किया गया है। क्षेत्र में आम के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए रहमानखेड़ा क्षेत्र में मैंगो पैक हाउस बनाया गया, पर इससे सिर्फ बड़े आम किसानों को ही मदद मिल रही है।

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जिले के माल ब्लॉक के अवधेश कुमार सिंह (60 वर्ष) अमलौली गाँव के पास 10 बीघा में आम की बाग है। अवधेश बताते हैं, ''मलिहाबाद क्षेत्र में फलपट्टी के सत्तर प्रतिशत भू-भाग में दशहरी आम की खेती होती है। यहां इतनी बड़ी संख्या में किसान आम की खेती करते हैं, लेकिन यहां बने मैंगो पैक हाउस पर एक निजी फर्म का एकाधिकार है, जो हमेशा बड़े किसानों से ही आम लेती है। हम जैसे छोटे किसानों को इसकी कोई जानकारी नहीं है कि पैक हाउस में कैसे आम बेचे।''

बागवानी किसानों को उनकी उपज का पूरा पैसा मिल सके और फलों को लंबे समय तक संरक्षित करके रखा जा सके, इसके लिए नई दिल्ली में हुई खरीफ कॉन्फ्रेंस 2017 में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने बताया कि बागवानी फसलों के लिए देश में 68,000 पोस्ट हारवेस्ट मैनेजमेंट यूनिट-कोल्ड स्टोरेज, राइपनिंग चेम्बर और पैक हाउस की स्थापना की है। ऐसे में सरकार को इन केंद्रों की स्थापना से पहले इन्हें किसानों के लिए मददगार बनाने पर ध्यान देने की अधिक ज़रूरत है।

प्रदेश में फल संरक्षण के मुद्दे पर सरकार के ढीले रवैये की बात कहते हुए फेडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (यूपी) के अध्यक्ष महेंद्र स्वरूप बताते हैं, ''उत्तर प्रदेश में कोल्ड सप्लाई चेन की हालत खराब होने के पीछे सरकार की नीतियां ज़िम्मेदार हैं।

उत्तर प्रदेश कई किस्मों के फलों की खेती होती है, लेकिन यहां आज तक किसी भी सरकार ने फलों के संरक्षण व बड़ी मात्रा फलों के भंडारण पर ज़ोर नहीं दिया।''''प्रदेश में फलों एवं सब्जियों के लिए सिर्फ पांच फीसदी कोल्ड स्टोरेज इकाईयां हैं। उनमें से भी यह निश्चित नहीं है कि कौन सी इकाई क्रियाशील है या फिर बंद हो चुकी है।'' महेन्द्र स्वरूप ने आगे बताया।

फेडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल 1710 कोल्ड स्टोरज हैं। इनमें से 25 निजी कोल्ड स्टोर हैं। इन इकाईयों में से करीब 95 फीसदी में सिर्फ आलू का भंडारण किया जाता है।

राजकीय उद्यान विभाग के लखनऊ मंडल के उप निदेशक उद्यान, वीरेंद्र सिंह बताते हैं, ''पांच वर्ष पहले प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में फल एवं सब्जियों के संरक्षण के लिए रिलायंस कंपनी ने पोस्ट हारवेस्ट कोल्ड चेन यूनिट खोलने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के सामने रखा था, लेकिन उसे मंजूरी नही मिल पाई। हर वर्ष काफी मात्रा में उत्तर प्रदेश में फल एवं सब्जियां अपर्याप्त भंडारण के कारण खराब हो जाती हैं। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।''

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