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अच्छा मानसून बढ़ाएगा कृषि उत्पादों का निर्यात

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   19 Aug 2017 4:28 PM GMT

अच्छा मानसून बढ़ाएगा कृषि उत्पादों का निर्यातपिछले वर्षों में यूर्पी में सूखे से गन्ना, तिलहन और दलहन का निर्यात हुआ था प्रभावित

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। इस वर्ष सामान्य मानसून देश मेें पिछले दो वर्षों में घटे कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ा सकता है। मंडी परिषद के कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग के अनुसार इस वर्ष हुई अच्छी बारिश से गन्ना, धान के साथ साथ तिलहनी और दलहनी फसलों के कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धी हो सकती है।

कृषि उत्पादों के निर्यात के इस वर्ष आने वाली तेज़ी का प्रमुख कारण बताते हुए कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग के सह निदेशक दिनेश चंद्रा बताते हैं,'' इस बार पूरे देश में अच्छी बारिश हुई है, जिससे इस वर्ष यूपी में कृषि उत्पादों के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी दो सकती है।उदारहण के तौर पर प्रदेश में वर्ष 2013 से वर्ष 2016 तक धान के निर्यात में लगातार कमी हुई है, लेकिन इस बार अच्छी बरसात से धान की पैदावार पहले से कहीं बेहतर हुई है, जो इसके निर्यात को बढ़ा सकती है।''

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की वार्षिक डीजीसीआईएस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016-17 में भारत से कृषि एवं सहायक उत्पादों का निर्यात 25 प्रतिशत कम होकर 24.69 अरब डालर रह गया, जबकि वर्ष 2014 में निर्यात 32.95 अरब डालर था।रिपोर्ट में कृषि उत्पादों का निर्यात घटने का मुख्य कारण बताया गया है कि वित्त वर्ष 2014 से लगातार दो वर्षों तक देश में सूखा पडऩे से कई फसलों का कृषि उत्पादन घट गया। इनमें से गन्ना, दलहनी फसल और तिलहनी फसलें शामिल थीं।

कृषि उत्पादों के निर्यात व वैश्विक बाज़ारों में भारतीय जिंसों की मांग पर कई वर्षों से अध्यन कर रहे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रमुख कृषि अर्थशास्त्री राकेश सिंह ने बताया, '' मानसून समान्य रहने से इस वर्ष सभी प्रकार की खरीफ फसलों का उत्पादन अच्छा होने की संभावना है, जिससे निर्यात भी सुधरेगा।लेकिन कृषि उत्पादों का निर्यात उत्पादन के अलावा वैश्विक कृषि बाजारों पर भी निर्भर रहता है। इसलिए जब तक विदेशी बाज़ारों में भारतीय जिंसों के दाम नहीं बढ़ेंगे तब तक निर्यात में भारी बढ़ोत्तरी की उम्मीद नहीं की जा सकती है।''

पिछले वर्षों में घटा गेहूं और चावल का निर्यात -

वैश्विक बाज़ारों में पारंपरिक फसलों ( गेहूं - चावल) का निर्यात पिछले कुछ बर्षों में तेज़ी से घटा है। एपीडा के अनुसार वर्ष 2015-16 गेहूं निर्यात में मात्रा के हिसाब से 81.72 फीसदी और मूल्य के हिसाब से 82.91 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई। यही हाल चावल के निर्यात का भी रहा। वर्ष 2015-16 में 57 लाख टन गैर-बासमती चावल 13 हज़ार करोड़ रुपए में निर्यात किया गया जबकि 2014-15 में 76 लाख टन चावल 19 हज़ार करोड़ रुपए में निर्यात किया गया था। पिछले वर्ष चावल के कम उत्पादन के कारण इस साल सरकार ने बसमती चावल के निर्यात में रोक लगाई है। ऐसे में इस वर्ष अच्छे मानसून के कारण धान का रकबा बढ़ने निर्यात में सुधार हो सकता है।

चीनी, गुड़ व दलहनी फसलों का बढ़ेगा निर्यात -

दिनेश चंद्रा आगे बताते हैं,'' बारिश ने गन्ने की पैदावार बढ़ा दी है, जिससे इस बार चीनी का निर्यात बढ़ सकता है।इससे साथ साथ जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक वर्षा नहीं हुई है वहां पर दलहनी फसलों की पैदावार में इजाफा हुआ है, जो कि कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए अच्छा संकेत है।''

देश के कुल गुड़ उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में तैयार किया जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश के कारण इस वर्ष गन्ने का उत्पादन बढ़ा है। सहरनपुर जिले के नागल ब्लॉक के साधारणसिर गाँव में शॉकत अली (50 वर्ष) गन्ने से ताज़ा गुड़ बनाने का काम करते हैं। ठेकेदार शौकत अली बताते हैं ," पूरे जिले में इस बारगन्ना अच्छा हुआ है इसलिए अपकी बार बाज़ारों में गुड़ की आवक अच्छी रहेगी।"

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के मुताबिक भारत पूरे विश्व में गुड़ का एक मुख्य व्यापारी और निर्यातक देश माना जाता है। वर्ष 2015-16 के दौरान भारत सेनाइजीरिया, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, और सूडान देशों में 2.9 मीट्रिक टन गुड़ और कन्फेक्शनरी उत्पाद का निर्यात हुआ है। इस वर्ष मुज़फ्फरनगर और सहारनपुर जिलों में गन्ने का रकबा बढ़ने के कारण गुड़ के निर्यात में बढ़ोत्तरी हो सकती है।

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