दूध की गिरती कीमतों को रोकने के लिए ‘मूल्य स्थिरीकरण’ !

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   27 Jan 2018 11:35 AM GMT

दूध की गिरती कीमतों को रोकने के लिए ‘मूल्य स्थिरीकरण’ !दाम गिरने से किसान परेशान। (सभी फोटो-विनय गुप्ता)

कपास, मुंगफली के बाद गुजरात के किसानों के लिए अब दूध की गिरती कीमतें परेशानी खड़ी कर रही हैं। ज्यादा उत्पादन के कारण ग्लोबल स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की दरों में गिरावट आ गयी है। इस कारण दूध के दाम तेजी से गिर रहे हैं। ऐसे में सरकार दूध को मूल्य स्थिरीकरण निधि में शामिल करने का विचार कर रही है।

गुजरात में दूध की कीमतों में 4 से 5 रुपए तक गिरवाट दर्ज की गयी है। गाय और भैंस, दोनों के दूध की कीमतें गिरी हैं। किसानों को अब नुकसान झेलना पड़ रहा है। गिरावट के पीछे ज्यादा उत्पादन बताया जा रहा है। गुजरात कॉपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के चेयरमैन गोविंद भाई बताते हैं "ज्यादा उत्पदन होने से दाम नीचे आ रहे हैं। स्किम्ड मिल्क पाउडर के दाम गिरने से ऐसा हुआ है। उनकी मांग घट गयी है, ऐसे में दूध का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर किसान करे तो करे क्या? आंधी बारिश झेलने के बाद जो कुछ बचता है वो बाजार पर निर्भर हो जाता है। किसानों की किस्मत बाजार तय करती है। मांग बढ़ी तो लाभ बढ़ा, घटी तो फसलों के दाम नीचे आ गये। ऐसे में उत्पादन ज्यादा या कम की बात बेईमानी हो जाती है।

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ऐसा नहीं है कि ऐसा बस दूध के साथ हो रहा है। हाल-फिलहाल की बात करेंगे तो आलू, प्याज, टमाटर और गन्ना का उदाहरण लिया जा सकता है। इन फसलों का उत्पादन तो खूब हुआ, जिस कारण बाजार में इनकी मांग घट गयी। दूध के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। ऐसे में सरकार दूध के दामों में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए योजना बना रही है।

कृषि मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों के विभाग की मूल्य स्थिरीकरण निधि योजना के अंतर्गत दूध को शामिल करना चाहता है। इससे राज्य सरकार और दूध संघ किसानों से भारी मात्रा में ताजे दूध की खरीद कर सकेंगे और भविष्य में उपयोग के लिए इसे घी तथा स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) में परिवर्तित कर सकेंगे। हालांकि अभी इसमें व्यवधान भी है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस निधि में केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में आवंटित 35 अरब रुपए का लगभग 99 प्रतिशत भाग दिसंबर 2017 तक व्यय हो चुका है। इसका ज्यादातर हिस्सा किसानों से दालों की खरीद में गया है।

कृषि व सहकारिता विभाग ने केंद्रीय योजना के रूप में 5000 करोड़ रुपए की धनराशि के साथ मूल्य स्थिरीकरण निधि (पीएसएफ) को 2015 मंजूरी दी थी। इसका मकसद 2014-15, 2015-16 व 2016-17 के दौरान खराब होने वाले कृषि-बागवानी उत्पादों के मूल्य नियंत्रण व विपणन हस्तक्षेप की सहायता करना है। पीएसएफ का इस्तेमाल राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्रों व केंद्रीय संस्थाओं को उनकी कामकाजी पूंजी की सहायता के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में किया जाता है। इसके अलावा इस तरह के उत्पादों की सरकारी खरीद व वितरण पर भी इसे खर्च किया जाता। आरंभिक तौर पर इस निधि का इस्तेमाल केवल प्याज व आलू के लिए प्रस्तावित किया गया था।

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कृषि मंत्रालय, डेयरी डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं "दूध को मूल्य स्थिरीकरण निधि में शामिल कर लिया जाए तो फिर इससे राज्य भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से दूध वितरित कर सकेंगे। मूल्य स्थिरीकरण निधि में आधा योगदान केंद्र करता है और बाकी हिस्सा राज्य देते हैं। कृषि मंत्रालय ने दिसंबर के मध्य में राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को मिड-डे मील, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा आंगनबाडिय़ों के माध्यम से दूध वितरण करने का एक सुझाव दिया था।

मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक बाजार और दूध सीजन के दौरान अधिशेष आपूर्ति के कारण दूध खरीद के दाम में गिरावट आने की स्थिति में दूध के लिए अतिरिक्त घरेलू मांग बढ़ाने के लिए ये उपाय अपनाए जाएंगे। हमारी ओर राज्य सरकारों के पास इसके बारे में जानकारी भेजी गयी है। उनकी सहमति भी आवश्यक है। हो सकता है कि कुछ समय बाद दूध को मूल्य स्थिरीकरण निधि में शामिल कर लिया जाए। हालांकि अभी बजट भी नहीं है, इस कारण परेशानी आ रही है।"

महाराष्ट्र, उस्मानाबाद जिले के तमलवाड़ी गाँव के किसान और पशुपालक संजय दलदले कहते हैं "दूध के व्यापार से हमारा फायदा घटता जा रहा है। खेती में तो वैसे ही नुकसान झेल रहे हैं, ऐसे में अक्सर मंडी जाने पर पता चलता है कि दूध के दाम में गिरावट आ गयी है। ऐसे में घटते दामों के कारण हमारा नुकसान ही हो रहा है।"

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दूध का सीजन नवंबर से मार्च तक चलता है, तब आपूर्ति आमतौर पर ऊंची रहती है। हालांकि इस अवधि के दौरान दामों में मंदी का रुख रहता है, लेकिन इस साल की गिरावट का खासतौर पर उल्लेख किया जा रहा है क्योंकि खरीद दर अपने निचले स्तर तक जा चुकी होती है। 2015 के बाद से दूध के कमजोर वैश्विक बाजार का भी इस गिरावट में योगदान रहा है। 2015 में वैश्विक बाजारों में जो स्किम्ड मिल्क पाउडर प्रति टन 5,000 डॉलर पर बोला गया था, अब वह प्रति टन 2,000 डॉलर से नीचे है।

दूध उत्पादन में नंबर एक है भारत।

राजस्थान के झुन्झुनू के दूध व्यापारी कृष चौधरी कहते हैं "दूध बहुत ज्यादा आ रहा है। हमारे पास रखने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में कीमत 4 से 5 रुपए तक नीचे आ गयी है।"

गाय का दूध 18 रुपए और भैंस का 26 रुपए लीटर

महाराष्ट्र में दूध खरीद के दाम पिछले साल के 26-27 रुपए प्रति लीटर से गिरकर 18 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं, जबकि पंजाब और हरियाणा में भैंस के दूध के दाम पिछले साल के 38-40 रुपए प्रति लीटर से गिरकर 26 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। हालांकि, इस साल सहकारी समितियों ने अपनी खरीद 25-30 प्रतिशत तक बढ़ा दी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। निर्यात मुश्किल होने की वजह से निजी क्षेत्र ने इस साल दूध खरीदने में कम रुचि दिखाई है।

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हरियाणा सिरसा के किसान सुरेंद्र सहरान बताते हैं "हमारे यहां गाय का दूध 20 से 25 और भैंस का दूध 30 से 45 रुपए किलो में बिक रहा है। लेकिन दूध की कीमत 4-5 रुपए घटी है।"

कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 में दूध का कुल उत्पादन पिछले साल के 16.5 करोड़ टन उत्पादन के मुकाबले 6-7 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान जताया है। सरकार का अनुमान है कि देश में 1,16,000 टन स्किम्ड मिल्क पाउडर का स्टॉक है और मार्च तक इसके 2,00,000 टन तक पहुंचने की संभावना है।

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