वैलेंटाइन डे पर किसानों के लिए खुशबू न बिखेर सकेगा गुलाब

वैलेंटाइन डे पर किसानों के लिए खुशबू न बिखेर सकेगा गुलाबअभी तक बाजार में नजर आ रहा नोटबंदी का असर। 

सुधा पाल

लखनऊ। शादी-ब्याह हो, नया साल हो या कोई भी जश्न का मौका, फूलों के साथ के बिना सब अधूरा है। फूलों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में ‘वैलेंटाइन वीक’ शुरू हो चुका है। यह वो समय होता है जब गुलाब के फूलों की मांग सबसे ज्यादा होती है।

कारोबारियों के साथ किसान भी मुनाफे की आस लगाए होते हैं, लेकिन इस साल के वैलेंटाइन की रौनक कारोबारियों और किसानों पर नहीं दिख रही है। नोटबंदी का असर अभी भी कारोबारियों के नुकसान की वजह बन रहा है।

चौक स्थित कंचन मार्केट फूलमंडी के फूल कारोबारी शहाबुद्दीन बताते हैं, “पिछले साल की तरह इस बार भी अच्छा मुनाफा होगा, ऐसा कुछ कहा नहीं जा सकता। जहां तक लग रहा है कि इस बार वैलेंटाइन डे पर कुछ मुनाफे की उम्मीद नहीं है क्योंकि नोटबंदी का असर अभी तक मंडी में चल रहा है। ग्राहक जहां थोक में फूल खरीदते थे, वहीं अब या तो कम खरीदते हैं या खरीदते ही नहीं।”

पिछले वैलेंटाइन डे पर एक दिन में एक कारोबारी ने 15,000 तक तो कमा लिया था, लेकिन इस बार न बिकने के डर से किसी व्यापारी ने अभी तक मंगवाया ही नहीं। व्यापारियों को कुछ सूझ नहीं रहा है कि वे क्या करें। अभी तक कुछ खास खरीदारी नहीं कर रहें हैं लोग। आने वाले दिन में पता लगेगा कितना नफा हुआ, कितना नुकसान।
शहाबुद्दीन, फूल कारोबारी, लखनऊ

इस समय वैलेंटाइन वीक शुरू हो चुका है। इस दौरान रोज़ डे (गुलाब देने वाला दिन) पर गुलाब का फूल देने का प्रचलन है। यही वह समय है जब कारोबारियों के साथ गुलाब की खेती करने वाले किसान भी आम दिनों के मुकाबले अच्छा और बेहतर मुनाफा कमाते हैं, लेकिन इस बार दोनों (किसान और फूल कारोबारी) ही निराश नज़र आ रहे हैं। शहाबुद्दीन का कहना है, "नोटबंदी का असर अभी भी बाजार में है। थोक में गुलाब खरीदने आने वाले ग्राहक अब उतनी खरीददारी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में कारोबारियों को नुकसान हो रहा है।

वह आगे बताते हैं कि जहां गुलाब के फूलों का एक बंडल 200 से लेकर 250 रुपए का बिक रहा है, वहीं इन्हें खरीदने वाले ग्राहक कम हो गए हैं। प्रदेश में होने वाले लोकल गुलाबों से तैयार किए गए एक बंडल में जहां 50 फूल होते हैं, वहीं प्रदेश के बाहर से आए गुलाब के फूलों की कीमत ज्यादा और बंडल में गिनती कम होती है। इस तरह के केवल 20 फूलों से एक बंडल तैयार किया जाता है। इसकी वजह यह है कि प्रदेश के बाहर से मंगाए गए इन गुलाबों को पॉली हाउस के जरिए उगाया जाता है, जिसमें लगभग 20 लाख तक की लागत आती है, जबकि खुले में गुलाब की खेती किए जाने में केवल एक से दो लाख रुपए तक की ही लागत आती है।

अमेठी, ऊंचाहार, जगतपुर में फूल जाते हैं। कारोबारी भी उतना थोक में नहीं ले रहे हैं। ऐसे में पहले जितनी कमाई नहीं हो पा रही है।
अवधेश मौर्या, किसान, काकोरी

वहीं, प्रदेश के रायबरेली, सीतापुर, महाराजगंज, सुल्तानपुर, जगदीशपुर में गुलाब की खेती की जाती है। इसके साथ ही राजधानी के मलिहाबाद, काकोरी और बंथरा में गुलाब की खेती करने वाले किसानों की संख्या अधिक है।

गुलाब की खेती करने वाले रायबरेली के विजय बहादुर बताते हैं, “5 बीघे जमीन पर खेती करते हैं। हर रोज फूलों का बंडल बनाकर लखनऊ मंडी ले जाते हैं। लगभग 2000 से लेकर 7000 तक के गुलाब ले जाते हैं, कभी कम बिकता है, कभी ज्यादा। 5 से 6 रुपए प्रति गुलाब कारोबारियों को बेचते हैं। इस समय भी माल जा रहा है, लेकिन कुछ खास कमाई नहीं हो पा रही है। वैसे साल भर में 3 लाख तक का मुनाफा हो जाता है, लेकिन इस बार नोटबंदी का असर अभी तक मार्केट में दिखाई दे रहा है। कारोबारी भी कुछ खास मांग नहीं कर रहे हैं।”

वैलेंटाइन पर बिकने वाले गुलाबों की किस्में

लाल गुलाब- वोरडो, टॉप सीक्रेट, ताज महल

पीला गुलाब- गोल्डस्ट्राइक

गुलाबी गुलाब- रिवाइवल, पॉयज़न

सफेद गुलाब- ऐवेलेंज

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