करवाचौथ के लिए अध्यापकों ने भी मांगी छुट्टी

करवाचौथ के लिए अध्यापकों ने भी मांगी छुट्टी

बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजा पत्र, व्रत रखने की बात कही

रिपोर्टर - सुनील तनेजा

मेरठ। करवाचौथ का व्रत रखने के लिए परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने वाली शिक्षिकाएं ही नहीं शिक्षक भी छुट्टी मांग रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि निर्जल व्रत में बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं होगा। जिले के करीब 200 शिक्षकों ने बीएसए से करवाचौथ का व्रत रखने के लिए छुट्टी मांगी है। शिक्षिकाओं के साथ शिक्षकों द्वारा भी छुट्टी मांगे जाने से बेसिक शिक्षा अधिकारी उलझन में फं स गए हैं। 

परिषदीय विद्यालयों ने पढ़ाने वाले शिक्षक करवाचौथ का व्रत रखने के बदले में छुट्टी की मांग कर रहे हैं। हालांकि पुरुष शिक्षक छुट्टी लेने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब वे भी पत्नी के साथ निर्जल व्रत रहते हैं तो उन्हें भी 30 अक्टूबर को करवाचौथ पर छुट्टी मिलनी ही चाहिए। छुट्टी के लिए गुरुओं की यह गुहार विभाग के साथ ही हर किसी को चौंका रही है। शासन से सिर्फ  महिला शिक्षकों को छुट्टी मिलने पर पुरुष शिक्षक एतराज जता रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब पत्नी के साथ पूरे दिन और रात में चांद का दीदार करने तक उन्हें भी निर्जल व्रत रखना पड़ रहा है तो फि र ऐसे में समान रूप से पुरुषों को छुट्टी क्यों नहीं मिल रही है। 

छुट्टी में इस भेदभाव को दूर करने के लिए बीएसए और शासन को उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के कुछ सदस्यों ने पत्र भेजा है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल जाने पर बच्चों को बोलकर व खड़े होकर पढ़ाना पढ़ेगा। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी मोइकबाल इस बारे में बताते हैं, ''कुछ शिक्षकों की ओर से करवाचौथ की छुट्टी तो मांगी गई है। समस्या ये है कि हम अपने स्तर से छुट्टी की घोषणा नहीं कर सकते हैं। शासन ही इस बारे में आदेश जारी कर सकता है।''

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