क्या है व्यापम घोटाले का यूपी कनेक्शन?

क्या है व्यापम घोटाले का यूपी कनेक्शन?gaonconnection, व्यापम घोटाला: यूपी से जुड़े हैं तार

लखनऊ। व्यावसायिक परीक्षा मण्डल, मध्य प्रदेश (व्यापम) में होने वाली परीक्षाओं और नियुक्तियों में हुए घोटाले के मुख्य आरोपी को यूपी एसटीएफ ने कानपुर से गिरफ्तार कर लिया।

करोड़ों रुपए के व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने दो वर्षों से फरार चल रहे अभियुक्त रमेश चन्द्र शिवहरे की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ से सहयोग मांगा था। इस अभियान पर एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविन्द चतुर्वेदी की टीम पिछले पंद्रह दिनों से नज़र रखे थी। 

महोबा जिले के कबरई का रहने वाला रमेश चन्द्र शिवहरे व्यापम घोटाले का मुख्य अभियुक्त था। शिवहरे व्यापम में वर्ष 2006 से 2013 तक अनियमितताओं में शामिल रहा है। घोटाले से जुड़े कई लोगों की हत्याएं भी हो चुकी हैं, कुल लगभग 185 मामले दर्ज हुए, जिनमें लगभग 3500 अभियुक्तों के नाम सामने आए।

शिवहरे ने बताया कि उसकी पत्नी अंशु शिवहरे वर्ष-2011 से 2016 तक जनपद-महोबा की जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं और वर्तमान में खन्ना सीट, महोबा से जिला पंचायत सदस्य हैं। इसीलिए लोग उसे अध्यक्ष जी के नाम से भी पुकारते हैं।

एसटीएफ के एएसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने गाँव कनेक्शन को बताया, “शिवहरे छह केस में आरोपी है, उसकी आवास-विकास स्थित घर पर मौजूद होने की पुष्ट सूचना के आधार पर एसटीएफ और सीबीआई की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।” गिरफ्तारी के बाद शिवहरे को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया।

एसटीएफ के सूत्रों के अनुसार यूपी से व्यापम के सरगना की गिरफ्तारी के बाद अभी कई बड़े और सफेदपोशों के गले तक हाथ पहुंचने की संभावना है।

एचबीटीआई, कानपुर से लेदर टेक्नोलॉजी में वर्ष-2005 में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिवहरे ने काकादेव, कानपुर में पैराडाईज कोचिंग शुरू की।

उसने एसटीएफ को बताया, “कोचिंग के दौरान हमारे संपर्क में मेडिकल और इंजिनियरिंग परीक्षा के अनेकों परीक्षार्थी सम्पर्क में आ गए। इसी दौरान मुलाकात जबलपुर निवासी संतोष गुप्ता से हो गई और उसने कुछ परीक्षार्थियों को व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में बेईमानी कर पास कराने और कुछ सॉल्वर का इन्तजाम करने को कहा।” आगे बताता है, “इस काम में व्यापम के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हो गए।”

रमेश शिवहरे ने बताया कि फरारी के दौरान उसकी मुलाकात आगरा, गाजियाबाद, नोएडा के ऐसे गैंग से हो गई, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा में सेंध लगाकर अवैध धन अर्जित करके भर्ती कराने का धंधा करते हैं।

कानपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, लखनऊ, इलाहाबाद तथा आगरा आदि में अपना नेटवर्क तैयार कर लिया। वह आरआरबी, बीडीओ तथा बैंक आदि परीक्षाओ में सेटिंग करके अभ्यर्थियों से पैसा लेने की तैयारी कर रहा था।

उधर, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2014 में उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा था, ऐसी सामग्री है जो अपराध शुरू करने में याचिकाकर्ता की संलिप्तता की ओर इशारा करती है।

व्यापम में हुए दो तरह के घोटाले

लखनऊ। एसटीएफ के हत्थे चढ़े मुख्य अभियुक्त रमेश चन्द्र शिवहरे ने बताया कि  व्यावसायिक परीक्षा मण्डल, मध्य प्रदेश (व्यापम) में दो तरह के घोटाले हुए।

पहला किसी अभ्यर्थी के स्थान पर डमी अभ्यर्थी को बैठाकर परीक्षा दिलाना तथा दूसरा इंजिन-बोगी जैसी व्यवस्था कर एक सॉल्वर और एक लाभार्थी को एक साथ बैठाकर नकल कराकर सफल कराया जाता था।

साल्वर और लाभार्थी को एक साथ बैठाने के लिए रोल नम्बर एक साथ आवंटित करने में व्यापम कार्यालय पूरी तरह से संलिप्त रहता था। शिवहरे ने स्वीकार किया कि वह लगभग 06 वर्ष तक संतोष गुप्ता व अन्य लोगों के माध्यम से व्यापम परीक्षा के घोटाले में शामिल रहा।

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