क्यों नहीं दूध दे रहीं चकगंजरिया की गायें

क्यों नहीं दूध दे रहीं चकगंजरिया की गायेंगाँव कनेक्शन

बाराबंकी। जिलाधिकारी अजय यादव ने आज नेबलेट स्थित राजकीय पशुधन प्रक्षेत्र चकगंजरिया का निरीक्षण किया। यहां पर उन्होने डेरी फार्म, कुक्कुट फार्म, बटेर फार्म, का निरीक्षण किया और फार्म के अधीक्षक से इसका हैण्ड ओवर न होने के सम्बन्ध में जानकारी ली। उन्होने कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम से भी इस बारे में जानकारी ली।

उन्होने यहां पर दुग्ध उत्पादन की प्रगति की जानकारी ली। बताया गया कि फार्म में 362 गाय हैं और प्रतिदिन 312 लीटर दूध मिलता है। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर चिन्ता व्यक्त की और निर्देश दिया कि इस स्थिति में सुधार लाने हेतु प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाये। 

जिलाधिकारी ने पशुधन प्रक्षेत्र के निरीक्षण के दौरान पाया कि वहां पर गायों के लिए बने एक हाल में अनावश्यक काफी संख्या में पंखे चल रहे थे, जिस पर उन्होने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

जिलाधिकारी अजय यादव ने राजकीय पशुधन प्रक्षेत्र चकगंजरिया फार्म के अधीक्षक को निर्देश दिया है कि प्रक्षेत्र के हैण्ड ओवर की तुरन्त कार्यवाही सुनिश्चित करें। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर से जिलाधिकारी ने प्रक्षेत्र के हैण्ड ओवर किये जाने में हो रहे विलम्ब के बारे में जानकारी चाहने पर उन्होने बताया कि उनके तरफ से सारी औपचारिकतायें पूरी कर दी गयी हैं। 

हैण्ड ओवर कार्यवाही न होने में प्रक्षेत्र के अधीक्षक की लापरवाही साफ नजर आयी। जिस पर जिलाधिकारी ने उन्हें कड़ी चेतावनी दी।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी ऋषिरेन्द्र कुमार और जिला विकास अधिकारी एके सिंह के साथ विकास खण्ड देवा के लोहिया ग्राम बबुरी गाँव में कलस्टर के रूप में बनाये गये लोहिया आवास का निरीक्षण किया। उन्होने कलस्टर के तहत बनाये गये आवासों की स्थिति पर सन्तोष व्यक्त किया और कहा कि इसका बेहतर उपयोग किया जाये।

वहां पर वो लोहिया आवास के लाभार्थियों से मिले और उनसे आवास निर्माण के विभिन्न बिन्दुओं पर जानकारी ली।

राजकीय पशुधन प्रक्षेत्र के निरीक्षण के दौरान सीडीओ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, आईएएस प्रोबेशनर अर्चना वर्मा, सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

चक गंजरिया के पशुओं को नहीं मिल रहा भर पेट चारा

बाराबंकी। जबसे चक गंजरिया फार्म को लखनऊ से बाराबंकी ज़िले के जहांगीरबाद ब्लॉक में स्थापित किया गया है तब से वहां के पशुओं की सही से देख-भाल नहीं हो पा रही है और उन्हें पर्याप्त चारा भी नहीं मिल पा रहा है।

फार्म में 360 पशुओं पर एक दिन में 60 से 65 कुंतल हरे चारे की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति नहीं हो पा रही है।

हरे चारे की कमी का कारण बताते हुए डॉ आरबी बताते हैं, ‘‘जहां पहले फार्म था वहां हरा चारा उगाने के लिए काफी भूमि थी यहां पर ऐसी कोई सुविधा नहीं है हरा चारा खरीदना पड़ता है जिससे काफी दिक्कत आती है।’’ अपनी बात को जारी रखते हुए वो बताते हैं, ‘‘यहां पर पशुओं को चराने में काफी दिक्कत होती है क्योकि यहां पर दूर-दूर तक चरागाह भी नहीं है।’’

पचीस एकड़ में बने इस फार्म में करीब 360 साहीवाल नस्ल की गाय है और 1700 देशी पक्षी (मुर्गे-मुर्गियां) हैं।

गंजरिया फार्म में साफ-सफाई के अभाव में पशुओं में संक्रमण रोग भी फैल रहा है। गायों को रखने के लिए बने शेडों में गंदगी पड़ी है जबकि फार्म की साफ-सफाई और देखभाल के लिए चालीस व्यक्तियों को रखा गया है। फार्म को हरा भरा रखने के लिए पौधों को भी लगाया गया है लेकिन वो भी सूख गए है उन पर भी किसी का ध्यान नहीं है।

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