लाखों गरीब अबलाओं को बनाया सबल

लाखों गरीब अबलाओं को बनाया सबलgaonconnection

महाराष्ट्र। जनपद महाराष्ट्र के सतारा जिले के माण तहसील के म्हस्वड गाँव में सूखाग्रस्त महिलाओं को सबल बनाने के लिए चेतना विजय सिंह ने देशी महिला सहकारी बैंक की नींव रखी, जिसमें आज तीन लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं और वे पूरी तरह से आर्थिक व समाजिक रूप से आत्मनिर्भर हैं।

चेतना विजय सिन्हा आज महाराष्ट्र के सतारा जिले के माण तहसील के गाँव म्हस्वड में देवी की तरह पूजी जाती हैं। इसके पीछे कारण उनका गरीब बेसहारा महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना व समाज में सम्मान दिलाने की लम्बी लड़ाई रही है। 

चेतना की संस्था माण देशी फाउंडेशन महाराष्ट्र के सात जिलों के गाँव- गाँव में महिलाओं के हक न सिर्फ लड़ाई लड़ रही हैं बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए माण देशी महिला सहकारी बैंक भी चलाती हैं। उन्हें हर तरह से समाज में मान-सम्मान दिलाने के लिए बिजनेस स्कूल भी चलाती हैं। आज उनके बैंक में तीन लाख से ज्यादा जरूरतमंद महिलाएं अपना खाता खोलकर अपना छोटा मोटा बिजनेस कर रहीं हैं।

चेतना ने महाराष्ट्र के सतारा जिले के माण तहसील के म्हस्वड गाँव, जहां सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर सभी तरह की परेशानी मुंह बाये खड़ी थीं, वहां रहकर महिलाओं के उत्थान के लिए काम करना स्वीकार किया। 1995 की एक घटना ने उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता से अनोखे बैंकर की ओर मोड़ दिया। 

कांताबई नामक एक लोहरी का काम करने वाली महिला चेतना से मिलीं और उन्होंने कहा कि उसे अपने जीवन की सुरक्षा के लिए कुछ पैसा बैंक में जमा करना है और काम के लिए कुछ उधार लेना है। चेतना उसके साथ बैंक गईं तो बैंक ने उससे पूछा कि रोज कितना कमा लेती हो। उन्होंने कहा कि कोई पांच से दस रुपए। इस पर बैंक ने न तो उसका खाता खोला और न ही लोन की बात की। 

चेतना के मन में ये बात आई कि ऐसी तमाम जरूरतमंद महिलाएं होंगी जिन्हें बैंकों से कोई लाभ नहीं मिल रहा है, क्यों न माइक्रो फाइनेंस और सेविंग बैंक खोला जाए। बैंक खोलने के लिए आरबीआई की स्वीकृति की जरूरत थी। इसके लिए शेयर पूंजी की अनिवार्य राशि की जरूरत थी। उन्होंने 1100 महिलाओं से छह लाख रुपए इकट्ठे किए। वे बैंक की योजना लेकर 17 बोर्ड आफ डायरेक्टर महिलाओं के साथ गईं। जब सभी महिलाओं से दस्तख्त करने को कहा गया तो उन्होंने अंगूठा लगा दिया। इस पर बैंक ने आब्जेक्शन लगाया कि जब डायरेक्टर ही अनपढ़ हैं तो बैंक को कैसे चलाएंगी। इस पर चेतना ने सभी महिलाओं को गणित से लेकर व्यावहारिक ज्ञान तक की शिक्षा दी।

पांच महीने बाद वही महिलाएं एक बार फिर बैंक अधिकारियों के सामने खड़ी थीं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आप अपने स्टाफ से कहिए कि वे कैलकुलेटर ले लें और हम मुंह जबानी किसी भी बोली गई रकम का ब्याज, उनसे पहले निकाल देंगी। बैंक ने उनकी अप्लीकेशन को स्वीकार कर लाइसेंस दे दिया। इस तरह । 997 में माण देशी महिला सहकारी बैंक की विधिवत शुरूआत हुई। महाराष्ट्र के सात जिलों में माण देशी महिला सहकारी बैंक है और चेतना का इरादा 2020 तक पंद्रह लाख महिलाओं को इससे जोड़कर बिहार, झारखण्ड, असम और मिजोरम प्रदेशों में इसकी ब्रांच खोलने का है।     

चेतना विजय सिन्हा को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए 2009 में गॉडफ्रे फिलिप्स द्वारा गॉडफ्रे फिलिप्स ब्रेवरी अमोदनी अवार्ड, सतारा की सिसलो ट्रांसमिशन लिमिटेड द्वारा रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार और 2010 में पुणे की संस्था इंटरप्रियोनर्स इंटरनेशनल द्वारा “इंटरप्रिन्योरशिप डेवलेपमेंट” अवार्ड, 2005 में ग्रामीण उद्यमिता जागरण के लिए जानकी देवी बजाज अवार्ड, 1999 में सूखाग्रस्त महिलाओं के जीवन उत्थान के लिए राजीव सेठ सबाले फाउंडेशन अवार्ड, 1994 में विकास कार्य के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री पीसी एलेक्जेंडर अवार्ड से नवाजा जा चुका है।

रिपोर्टर - प्रेमेंद्र श्रीवास्तव 

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