यूपी के प्रत्येक जिले में होगी जापानी इंसेफेलाइटिस के उपचार की व्यवस्था

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है, पिछले वर्ष संचारी रोगों के नियंत्रण में अच्छी सफलता मिली है, इस वर्ष संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और अधिक तेजी प्रदान करते हुए संचालित किया जाए

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   1 Jun 2019 9:03 AM GMT

यूपी के प्रत्येक जिले में होगी जापानी इंसेफेलाइटिस के उपचार की व्यवस्था

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी इंसेफेलाइटिस और दिमागी बुखार (जेई-एईएस) आदि रोगों के प्रभावी नियंत्रण के सम्बन्ध में कार्ययोजना बनाकर सभी तैयारियां पूरी किये जाने के अधिकारियों को निर्देश दिये।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है, "जून माह में सभी सम्बन्धित विभाग संचारी रोग नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिससे कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफलतापूर्वक चलाया जा सके। गत वर्ष संचारी रोगों के नियंत्रण में अच्छी सफलता मिली है। इस वर्ष संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और अधिक तेजी प्रदान करते हुए संचालित किया जाए।"

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जेई एक खतरनाक बीमारी जेई और एईएस बीमारियां मच्छर के काटने से होती हैं। जेई एक वायरल बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से होती है। जेई रोग के कारण तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है एवं गंभीरता की स्थिति में रोगी की मृत्यु हो जाती है। जेई रोग से मृत्युदर लगभग 20-30 प्रतिशत होती है एवं जीवित बचे व्यक्तियों में 30-50 प्रतिशत मानसिक एवं शारीरिक विकलांगता आ सकती है।

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दो साल पहले साल अगस्त में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से जब एक साथ 30 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो गई तब पूरे देश में ये मामला छा गया था। वे बच्चे इंसेफेलाइटिस के मरीज़ थे। वैसे तो दिमागी बुखार देश के 17 राज्यों के लगभग 171 ज़िलों में फैला है लेकिन पूरे देश में होने वाले कुल एईएस व जेई के मामलों में से 60 फीसदी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बस्ती मंडल से होते हैं।


पिछले कुछ साल में जेई पर तो काफी हद तक काबू पा लिया गया लेकिन एईएस अभी भी यहां महामारी की तरह फैला है। यह बीमारी पूरे साल में कभी भी हो सकती है लेकिन बारिश में इसका वायरस ज़्यादा सक्रिय हो जाता है। चिकुनगुनिया (येलो फीवर) और दिमागी बुखार को पहचाने में लोग अक्सर गलती कर देते हैं या तो बहुत देर से पहचानते हैं जिससे रोगी की जान पर बन आती है। ये बीमारी ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा होती है।

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प्रदेश के 38 जिलों में जेई/एईएस से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस रोग सहित अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर नगर विकास, पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास, ग्राम्य विकास, चिकित्सा शिक्षा, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पशुधन एवं अन्य विभागों को इस रोग पर नियंत्रण प्राप्त करने के सभी उपाय करने होंगे।


इनकी रोकथाम के लिए प्रभावित जिलों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के अतिरिक्त इसके विरुद्ध लोगों को जागरूक कर अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। इस कार्य के लिए शिक्षण संस्थान व स्वयंसेवी संस्थाओं को जोड़ जाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से ही संचारी रोगों पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है।

सीएम योगी ने सभी सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों से संचारी रोग नियंत्रण अभियान से सम्बन्धित गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि हर हाल में 15 जून तक सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं शुद्ध पेयजल की उपलब्धता आवश्यक है। जल निकासी के आवश्यक प्रबन्ध सुनिश्चित किये जाएं। दवा का छिड़काव नियमित रूप से किया जाए।

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उन्होंने कहा कि गन्दगी के कारण इन बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है। खुले में शौच से मुक्ति अभियान को शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए। पॉलीथीन के उपयोग को हर हाल में रोकने के लिए अभियान चलाया जाए। हैण्डपम्पों की रिबोरिंग और मरम्मत का कार्य सुनिश्चित हो। जन जागरूकता अभियान व्यापक पैमाने पर चलाया जाए। स्कूली बच्चों एवं उनके अभिभावकों को संचारी रोगों के नियंत्रण के सम्बन्ध में जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये कि स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित हो और आईसीयू चालू हालत में रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी अस्पताल में चिकित्सकीय आवश्यकताओं से सम्बन्धित कोई कमी न रहे। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी समन्वय जरूरी है। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है, पिछले वर्ष संचारी रोगों के नियंत्रण में अच्छी सफलता मिली है, इस वर्ष संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और अधिक तेजी प्रदान करते हुए संचालित किया जाए


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