पूरे सितंबर हो सकती है मानसूनी बारिश, लेकिन घट सकता है खरीफ फसलों का उत्पादन

पूरे सितंबर हो सकती है मानसूनी बारिश, लेकिन घट सकता है खरीफ फसलों का उत्पादन

लखनऊ। देश के कई हिस्सों में बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त है तो कहीं अच्छी बारिश से किसान बढ़िया पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार मानसून की अनियमितता के कारण खरीफ की फसल 2.08 फीसदी तक घट सकती है।

नेशनल कोलेंटल मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड (एनसीएमएल) ने एक रिपोर्ट जारी कर खरीफ की फसल के उत्पादन को लेकर सरकार के अनुमान 140.73 मिलियन को थोड़ा संसोधित किया है। एनसीएमएल ने अपने अनुमान में तिलहनों का भी कुल उत्पादन घटाकर 20.56 मिलिनयट टन कर दिया है जो कि पिछले साल की अपेक्षा 2.08 फीसदी कम है।

जुलाई और अगस्त में अच्छी मानसूनी बारिश के बावजूद उत्पादन पूर्वानुमान में गिरावट आई है। इसके लिए अनियमित बारिश को कारण बताया गया है। जबकि देश के 20 प्रतिशत से अधिक जिले बाढ़ का सामना कर रहे हैं। चावल का भी उत्पादन पिछले वर्ष (97.5 मिलियन टन) के रिकॉर्ड उत्पादन के मुकाबले इस साल कम (95.8 मिलियन टन) होने का अनुमान जताया जा रहा है।

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मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मानसून की विदाई बेला में अभी समय है, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस पूरे महीने अच्छी बारिश होगी। जून से सितंबर तक चार महीने तक रहने वाला मानसून ने पूरे देश में अच्छी बारिश की है। एक जून से एक सितबंर तक पूरे देश में सामान्य से महज छह प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गयी है।


मौसम विभाग ने इस अवधि के दौरान देश में बारिश का सामान्य स्तर 721.1 मिमी रहने का अनुमान व्यक्त किया था जबकि वास्तव में अभी तक 676.6 मिमी बारिश हुई है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा, झारखंड, लक्षदीप और पश्चिम बंगाल के अलावा पूर्वोत्तर राज्य मेघालय, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है।

दक्षिण पश्चिम मानसून की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, एक जून से एक सितंबर तक, तीन महीने की अवधि में केरल में सर्वाधिक 2431 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य स्तर 1804.6 मिमी से 35 प्रतिशत अधिक रही। वहीं 27 राज्यों में सामान्य बारिश हुई। इनमें उड़ीसा में सामान्य से 12 प्रतिशत, सिक्किम में 11, तेलंगाना में दस, जम्मू कश्मीर में आठ, मिजोरम में सात, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ में तीन और कर्नाटक में दो प्रतिशत अधिक बारिश हुई। उत्तरी एवं मैदानी राज्यों में हरियाणा को छोड़कर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सहित अन्य सभी राज्यों में बारिश का स्तर सामान्य श्रेणी में दर्ज किया गया।

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अधिक बारिश के लिए विख्यात मेघालय और मणिपुर में इस साल आश्चर्यजनक रूप से अब तक सबसे कम बारिश दर्ज की गयी है। मणिपुर में सामान्य से 53 प्रतिशत और मेघालय में 42 प्रतिशत कम बारिश हुई। जबकि लक्षदीप में सामान्य से 43 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश में 35 प्रतिशत, हरियाणा में 25 प्रतिशत, झारखंड और असम में 23 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 20 प्रतिशत कम बारिश हुई।


विभाग ने अपनी विज्ञप्ति में बताया कि ये लगातार तीसरा ऐसा साल है जब मानसून के अंतिम चरण में भी खूब बारिश हुई है। इस सप्ताह भी कई राज्यों में भारीद बारिश की संभावना व्यक्त की गयी है।

राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नई दिल्ली की उप महाप्रधंक डॉ के साथी देवी ने बताया "मानसून की विदाई का समय निर्धारित नहीं हो पा रहा है क्योंकि अभी अच्छी बारिश के आसार दिख रहे हैं। इस पूरी महीने कई जगहों पर भारी बारिश होगी। इस बार मानसून की कुल बारिश 655 मिलीमीटर हुई है जबकि सामान्य बारिश 700 मिली मीटर है।" मानसून के अंतिम चरण में हो रही बारिश से देश के प्रमुख 91 जलाशयों में 162 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी भर गया है तो पिछले साल 85 बीसीएम तक ही था।

(आंकड़े राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार)


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