लखनऊ में बढ़ रहे मानसिक रोगी

लखनऊ में बढ़ रहे मानसिक रोगीgaonconnection

लखनऊ। शहर में मानसिक रोगियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इनमें ज़्यादातर मामलों की मुख्य वजहें शराब, ड्रग्स और घरेलू कलह हैं।

मानसिक रोगियों के सरकारी अस्पताल लखनऊ के नूरमंजिल में हर साल लगभग दो हजार नए मानसिक रोगी आ रहे हैं। इनमें 80 प्रतिशत लोग वयस्क हैं और बीस प्रतिशत बच्चे।

अस्पताल द्वारा गाँव कनेक्शन को प्राप्त आंकड़ों से यह भी पता चला है कि मानसिक रोगों का शिकार होने वाले वयस्कों में से 40 फीसदी पुरुष हैं जो शराब, ड्रग्स और धूम्रपान के चलते मानसिक विकारों का शिकार हुए। वहीं वयस्कों में 33 फीसदी महिलाएं हैं जो घरेलू कलह के चलते मानसिक रोगी बन गईं। शेष सात फीसदी वयस्कों में मिर्गी जैसे अन्य रोगों के मरीज़ शामिल हैं।

लखनऊ नूरमंज़िल के डॉक्टर एच नायडू ने बताया, “दस साल में मानसिक रोगियों की संख्या दोगुनी हो गयी है। हर साल करीब दो हजार चार सौ नए मरीज़ पागलखाने में आते हैं और अगर इन में पुराने मरीजों की संख्या जोड़ दी जाए तो यह आंकड़ा तीन-चार हज़ार हो जाता है।” 

नए मरीज़ों में बच्चों का शामिल होना भी एक चिंता का विषय है। हर साल नूरमंज़िल अस्पताल में आने वाले 20 प्रतिशत बच्चों में अकेले में बड़बड़ाना, चिड़चिड़ापन, चीज़ों को फेकना, जिद्दीपन और किसी चीज का डर सताना जैसे लक्षण सामने आते हैं।

मामलों में ज्यादातर बच्चे उच्च वर्गीय परिवारों से आते हैँ।

मानसिक बीमारियों के बढ़ने की वजह बताते हुए डॉ नायडू ने बताया, “मानसिक बीमारी को कलंक मानना भी एक बड़ी वजह है संख्या बढ़ने की। इन बीमारियों को अगर कलंक और अभिशाप न मानकर वक्त से इलाज कराया जाए तो मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या को रोका जा सकता है”।

डॉ नायडू ने बताया कि मिग्री का दौरा आना एक आम बीमारी है जो पाँच छ: दिन की दवाईयों से ठीक हो सकती है, लेकिन लोग दवा नहीं खिलाते झाड़-फूंक बाबा के चक्कर में पड़ते रहते हैं। इससे समस्या गम्भीर होने के बाद लोग आते हैं।

इस तरह के रोगों में हो रही बढ़ोत्तरी

शक करने की आदत, अकेले में बड़बड़ाने की आदत, बिना बात के हँसना और रोना एक भयंकर बिमारी शिजोफ्रेनिया की दस्तक है, जिसके मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं बार-बार सफाई करना, हाथ धोना, बुरे विचार आना, ओएसडी यानि आब्सेसिव कम्पल्सिव डिस्आर्डर की समस्या भी लोगों में बढ़ रही है। तनाव भी मानसिक रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह है।

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