लखनऊ में बनी देश की पहली मॉर्डन हाईकोर्ट बिल्डिंग

लखनऊ में बनी देश की पहली मॉर्डन हाईकोर्ट बिल्डिंगGaon Connection

लखनऊ। हाईकोर्ट की बड़ी और भव्य इमारत से लोगों में इंसाफ की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस पर हम सबको खरे उतरना होगा। हाईकोर्ट की 150वीं वर्षगांठ और लखनऊ खंडपीठ के नवीन भवन के उद्घाटन के मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा, “न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोग, विवादों के निपटारे में तेजी लाने का संकल्प लें। लाखों रोजगार की तलाश में गाँव से शहर आते हैं। आबादी बढ़ने के साथ-साथ विवाद भी उपजे हैं। बार और बेंच को मिलजुल कर विवादों के शीघ्र निपटारे की ओर ध्यान देना होगा।” लखनऊ में बनी देश की पहली मॉर्डन हाईकोर्ट बिल्डिंग तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है

देश की अदालतों में तीन करोड़ मुकदमे लंबित हैं। इनमें से 38.5 लाख मामले उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में फरवरी, 2016 तक 9.11 लाख केस लंबित हैं, जबकि 2014 में लंबित मामलों की संख्या 10.1 लाख थी। इस हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत 160 पदों में से मुख्य न्यायाधीश समेत मात्र 71 न्यायाधीश हैं।

इस मौके पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा, “वादी को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाना न्याय प्रणाली के लिए एक चुनौती है। उम्मीद है कि सुविधाओं के बढ़ने से न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने का कार्य सुगम होगा।”

प्रदेश सरकार द्वारा न्यायपालिका की सुविधाओं बढ़ोत्तरी के प्रयासों को बताते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, “विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका में विश्वास की भावना का होना जरूरी है। इन तीनों अंगों के बीच सम्मान के साथ-साथ तालमेल रहना भी जरूरी है, ताकि जनकल्याण का कार्य प्रभावित न हो।” 

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा, “आवाम की खिदमत करना हम सब का फर्ज है और यदि हम सभी अपने किरदार को जिम्मेदारी से निभाएं तो इस फर्ज को पूरी शिद्दत के साथ अंजाम दिया जा सकता है।”

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