मास्साब, शौच के लिए छात्रों को भेजते हैं घर

मास्साब, शौच के लिए छात्रों को भेजते हैं घरgaonconnection

लखनऊ। सरकार प्राथमिक विद्यालयों की साफ-सफाई और शौचालय निर्माण के लिए हर साल लाखों रुपए खर्च करती है। दूसरी तरफ प्राथमिक विद्यालयों के शौचालयों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। प्राथमिक विद्यालयों में शौचालयों की स्थित ऐसी है कि अगर किसी बच्चे को शौच लगती है। तो अध्यापक उस छात्र को छुट्टी देकर घर भेज देते हैं और कहते हैं कि घर से शौच कर के आओ। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 को स्वच्छ भारत अभियान मिशन शुरू किया था। उसके बाद देश के प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए अलग से शौचालय का निर्माण कराया जाना था, जिससे उनकी पढ़ाई में कोई परेशानी न आ सके। लेकिन प्राथमिक विद्यालय के शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि छात्रों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है और जहां शौचालय ठीक हालत में हैं वहां सफाईकर्मी न आने से शौचालय गंदे पड़े हैं। इस कारण उसमें ताला डाल दिया जाता है।

प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिका सुधा राय (40 वर्ष) बताती हैं, “विद्यालय में शौचालय की सफाई करने के लिए सफाईकर्मी नियुक्त है, लेकिन सफाईकर्मी 2-3 महीने में आकर स्कूल के शौचालयों को साफ करता है, इसी कारण शौचालयों की व्यवस्था बहुत ही खराब है।”

सुधा राय आगे बताती हैं, “गाँव में जब कोई शादी विवाह जैसा कुछ कार्यक्रम होता है। तो विवाह में आए बारातियों को प्राथमिक विद्यालय में ही ठहरा दिया जाता है और शादी में आए हुए बराती स्कूल में ही बने शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं। जिस वजह से प्राथमिक विद्यालय में बने शौचालयों की स्थिती और खराब हो जाती है।”

केस-1

जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी. दूर माल ब्लॉक के अन्तर्गत आने वाले तिवारी खेड़ा के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय पूरी तरह से बन्द पड़े हैं। जिससे छात्रों को खुले में शौच करने लिए जाना पड़ता है। खुले में शौच जाने से गाँव के लोग अपने बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने जाने से मना करते हैं। प्राथमिक विद्यालय तिवारी खेड़ा की अध्यापिका संगीता (32 वर्ष) बताती हैं, “स्कूल में शौचालय तो बना हुआ है लेकिन वह सिर्फ शोपीस ही है।

हमारे यहां के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के इस्तेमाल के लिए तीन शौचालय बने हुए हैं, लेकिन तीनों शौचालय बन्द पड़े हैं। इसलिए मजबूरन हमें बच्चों को शौच के लिए बाहर भेजना पड़ता है। प्राथमिक विद्यालय तिवारी खेड़ा के चार में पढ़ने वाली श्वेता (10 वर्ष) बताती हैं, “विद्यालय में बने शौचालय बन्द पड़े हैं। इस वजह से जब हमें शौच के लिए जाना होता है, तो स्कूल की पढ़ाई को छोड़कर खुले में शौच के लिए जाते हैं। स्कूल में बने शौचालयों की स्थिति इतनी खराब है इसलिए मजबूरन हम सभी छात्रों को खुले में शौच जाना पड़ता है।”

केस-2

राजधानी के चंदवारा गाँव में बने प्राथमिक विद्यलयों में शौचालयों का बहुत बुरा हाल है। ग्रामीण क्षेत्रों में बने प्राथमिक विद्यालयों में अधिकांश ऐसा ही देखने को मिलता है कि शौचालय तो बने है, लेकिन इस्तेमाल करने के लायक नहीं है, क्योंकि कहीं पर शौचालयों में गंदगी भरी हुई है तो कहीं पर शौचालय बन्द पड़े हैं। 

इस वजह से छात्र-छात्राओं को शौच के लिए बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शौचालयों की समस्या इतनी गंभीर है कि इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

रिपोर्टर - सतीश कुमार सिंह

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