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पन्ना टाइगर रिजर्व: मृत बाघिन के चारों लापता शावक जंगल में अठखेलियां करते नजर आए

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक शावक भूखे नहीं दिख रहे थे, जाहिर है कि उन्होंने कुछ न कुछ खाया होगा। इस बात की भी संभावना है कि इन शावकों के पिता बाघ पी-243 ने इनका ध्यान रखा हो।

Arun SinghArun Singh   18 May 2021 12:57 PM GMT

पन्ना टाइगर रिजर्व: मृत बाघिन के चारों लापता शावक जंगल में अठखेलियां करते नजर आए

 पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल में चहल-कदमी करते शावक।  ( फाइल फोटो )

पन्ना (मध्य प्रदेश)। 15 मई से लापता चल रहे मृत बाघिन के चारों शावक सुरक्षित हैं। रिजर्व पार्क और वन कर्मियों ने तीन दिन में जंगल की खाक छानकर बाघिन के बच्चों को खोज निकाला है।

15 मई को करीब 6 वर्ष की युवा बाघिन पी-213(32) की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। 6-8 माह के उसके शावक उसी दिन से लापता थे। जिनकी तलाश में ट्रेंड हाथी और दूसरे वन कर्मी लगे थे। सघन तलाशी अभियान के दौरान सोमवार की शाम चारों शावक कोनी बीट के जंगल में चहलकदमी करते नजर आए हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के वन अमले ने इन शावकों को निकट से देखा है।

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने गांव कनेक्शन को बताया, "चारों शावक स्वस्थ और सुरक्षित हैं। शावक जंगल में जिस तरह निश्चिंत होकर अठखेलियां करते नजर आए हैं, उससे यह प्रतीत होता है कि वह खुले जंगल की चुनौतियों और खतरों से मुकाबला करने का हुनर सीख रहे हैं।"

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शर्मा के मुताबिक शावक भूखे नहीं दिख रहे थे, जाहिर है कि उन्होंने कुछ न कुछ खाया होगा। संभावना है कि हो न हो इन शावकों के पिता बाघ पी-243 ने इनका ध्यान रखा है। नर बाघ का शावकों के प्रति ऐसा बर्ताव शुभ संकेत है।

लापता शावकों के सुरक्षित मिलने के बाद अब उनकी निगरानी चाक-चौबंद कर दी गई है। क्षेत्र संचालक ने कहा "कुछ दिनों तक इन शावकों की गतिविधि और व्यवहार पर चौकस नजर रखी जाएगी। यदि सब कुछ सामान्य रहा और नर बाघ पी-243 का बर्ताव शावकों के प्रति सहानुभूति पूर्ण रहा तो उन्हें खुले जंगल में ही रखा जाएगा। यदि तीन-चार माह तक यह शावक खुले जंगल में चुनौतियों के बीच रहना सीख लिया, तो फिर वे इतना सक्षम हो जाएंगे कि खुद शिकार कर सकें। नर बाघ पी-243 का पुराना रिकॉर्ड भी अच्छा है, वह बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाता।"

15 मई 2021 को मिला था बाघिन का शव

बाघिन की मौत कैसे हुई, रिपोर्ट में होगा खुलासा

शनिवार (15 मई) की सुबह बाघिन का शव गहरीघाट परिक्षेत्र के कोनी बीट में मिला था। कोरोना संक्रमण के इस दौर में जब पर्यटकों के पार्क भ्रमण पर रोक लगी हुई है, ऐसे समय रेडियो कॉलर युक्त इस युवा बाघिन की असमय मौत से पन्ना टाइगर रिज़र्व में हड़कंप मचा थ। पोस्टमार्टम के बाद अंगों के जांच के लिए भेजा गया है।

वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया है, जिसमें ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं मिला, जिन्हें मौत की वजह माना जा सके। बाघिन के शरीर में कहीं किसी भी प्रकार की चोट के निशान भी नहीं पाए गए। क्षेत्र संचालक के मुताबिक आशंका है कि "बाघिन की मौत या तो किसी बीमारी के कारण या फिर जहरीले सांप आदि के काटने से भी हो सकती है। पहली नजर में बाघिन की मौत का कारण प्राकृतिक ही लगता है।"

वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया, "कोशिश की जा रही है कि जांच सैंपल की रिपोर्ट जल्द मिल सके। सैंपल की सभी प्रकार की जांच कराई जाएगी, जिससे मौत के कारणों की असल वजह का खुलासा हो सके। क्योंकि यदि किसी बीमारी से मौत हुई होगी तो उसे मद्देनजर जरूरी कदम उठाना होगा। इलाज के दौरान यह बाघिन सुस्त सी दिखती थी।"

कोनी नाले में जिस जगह पर बाघिन का शव मिला है, वहां ग्रामीणों की भी आवाजाही रहती है। कोनी सेहा के बारे में कहा जाता है कि यहां ग्रामीण और बाघ एक ही जगह का पानी पीते हैं। कोनी गांव यहां से मुश्किल से एक किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे रिजर्व पार्क के अधिकारी भी किसी वायरल अटैस की आशंका से इनकार नहीं कर रहे।

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