मध्य प्रदेश: एक करोड़ 62 लाख में बिका नायाब हीरा, रातों-रात मालामाल हुए शख्स की है ये कहानी

रतनगर्भा पन्ना की धरती में मिले नायाब हीरे की शुक्रवार को नीलामी हो गई। हीरे की इतनी कीमत मिली है कि पाने वाला शख्स रातोंरात करोड़पति हो गया।

मध्य प्रदेश: एक करोड़ 62 लाख में बिका नायाब हीरा, रातों-रात मालामाल हुए शख्स की है ये कहानी

हीरे की प्रतीकात्मक फोटो

पन्ना (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश में एक हीरा रातोंरात एक शख्स को करोड़पति बना गया है। हीरे की शुक्रवार को नीलामी की गई, जिसमें एक करोड़ 62 लाख से ज्यादा की कीमत मिली है।

21 फरवरी को पन्ना जिले के किशोरगंज मोहल्ले में रहने वाले 47 वर्षीय सुशील शुक्ला को जेम क्वालिटी का 26.11 कैरेट वजन वाला बेशकीमती हीरा मिला था। जिसकी शुक्रवार (25 फरवरी) को नीलामी हुई। नीलामी में इस हीरे को पन्ना के ही हीरा कारोबारी बृजेश जड़िया ने 6 लाख 22000 रुपए प्रति कैरेट की दर से 1 करोड़ 62 लाख 40 हजार में खरीदा। हीरा विभाग 11.50 फीसदी रॉयल्टी काटकर नीलामी में मिली रकम हीरा धारक को सौंप देगा।

जानिए हीरा मिलने और हीरा पाने वाले शख्स की पूरी कहानी

मध्य प्रदेश का पन्ना जिला हीरा खनन के लिए जाना जाता है। सरकारी सरकारी खनन के साथ ही स्थानीय लोग सरकार से लाइसेंस (पट्टा) बनवाकर खनन करते हैं। जिसमें बहुत सारे कारोबारी, आम लोग और यहां तक की किसान भी शामिल होते हैं। लेकिन सफलता बहुत कम लोगों को मिलती है। कुछ लोगों की जिंदगी हीरे की तलाश में निकल जाती है, घर मकान बिक जाते हैं लेकिन हीरा नहीं मिलता है। खुद सुशील शुक्ला भी 20 साल से हीरे की तलाश कर रहे थे।

सुशील शुक्ला के मुताबिक उनके पास अपना खुद का घर तक नहीं है। वो और उनका परिवार मामा के घर में रहते हैं। हीरा मिलने के बाद घर के उत्सवी माहौल में गांव कनेक्शन से चर्चा करते हुए सुशील शुक्ला 47 वर्ष ने बताया था कि "पूरे 20 साल तक पन्ना की विभिन्न हीरा खदानों में उन्होंने हीरों की तलाश की, हीरा नहीं मिला। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और हीरों की तलाश को जारी रखी। और 21 फरवरी को ऊपरवाला मेहरबान हुआ तो हीरा मिल गया, जिसका वजन 26.11 कैरेट है।"

हीरा पाने वाले सुशील शुक्ला

सुशील 5 भाई हैं, जिसमें एक दिव्यांग है, विधवा बहन भी उन्हीं के साथ रहती है। सुशील बताते हैं, "पांच भाइयों के संयुक्त परिवार में दो भाइयों के परिवार और बहन का भरण-पोषण मैं ही करता हूं। एक भाई जो एसडीएम ने यहां ड्राइवर है। बाकी लोग ईंट भट्टा का व्यापार या खदान में आदि में काम करते हैं।

सुशील शुक्ला 10वीं तक पढ़े हैं, इसके आगे वो पढ़ नहीं पाए। परिवार चलाने के ईंट बनाने (स्थानीय तरीकों से) कारोबार करते हैं और हीरा खदान में भी किस्मत आजमाते हैं।

कृष्णा कल्याणपुर स्थित इस खदान का पट्टा उन्होंने फरवरी में ही बनवाया था। अभी पूरी खदान खुदी भी नहीं और उन्हें इतना बड़ा हीरा मिल गया। अपनी खुशी का इजहार करते हुए सुशील शुक्ला ने गांव कनेक्शन को बताया, "वर्षों से मेरी यह ख्वाहिश रही है कि उनके पास अपना घर हो, अब यह ख्वाहिश पूरी हो सकेगी। हम शिक्षा नहीं हासिल कर सके लेकिन अपने इकलौते 10 वर्षीय बेटे और बड़े भाई के दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाउंगा। साथ ही ईट भट्ठा के बजाय कोई दूसरा सम्मानित काम करूंगा।"

हीरा खरीदने वाले कारोबारी को हीरा सौंपते पन्ना के कलेक्टर संजय कुमार मिश्र।

बड़े नायाब हीरों की लिस्ट में यह हीरा भी हुआ शामिल

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती में सैकड़ों सालों से हीरों की तलाश लोग करते आ रहे हैं लेकिन ऐसे किस्मत के धनी कम ही लोग होते हैं जिन्हे हीरा मिलता है। यहां की उथली हीरा खदानों से अब तक अनगिनत हीरे निकले होंगे, लेकिन बड़े नायाब और बेशकीमती हीरे उंगलियों में गिने जा सकें उतने हैं। इन नायाब हीरों की लिस्ट में सुशील शुक्ला को मिला हीरा भी शामिल हो चुका है।

हीरा अधिकारी पन्ना रवि पटेल ने गांव कनेक्शन को बताया, "हीरा कार्यालय में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक 61 वर्ष पहले सबसे बड़ा 44.33 कैरेट वजन का हीरा वर्ष 1961 में रसूल मुहम्मद को मिला था। यह रिकॉर्ड अभी भी कायम है।"

पटेल आगे बताते हैं, "25 कैरेट से अधिक वजन वाले जेम क्वालिटी के हीरों को बेशकीमती और नायाब श्रेणी में रखा जाता है उस लिहाज से यह ग्यारवां बड़ा हीरा है जो हीरा कार्यालय में विधिवत जमा किया गया है।"

हीरा अधिकारी पन्ना रवि पटेल बताते हैं, "बीते तीन वर्ष के दौरान मिले हीरों में यह चौथा बड़ा हीरा है। इसके पहले पन्ना के ही गरीब मजदूर मोतीलाल को वर्ष 2018 में 42 कैरेट 59 सेंट वजन का बेशकीमती नायाब हीरा मिला था। यह 42.59 कैरेट वजन वाला नायाब हीरा खुली नीलामी में 6 लाख रू. प्रति कैरेट की दर से 2 करोड़ 55 लाख रू. में बिका था, जिसे झांसी निवासी राहुल अग्रवाल ने खरीदा था। इसी तरह वर्ष 2019 में पन्ना शहर के बड़ा बाजार निवासी बृजेश उपाध्याय को 29.46 कैरेट वजन का हीरा मिला। जिसके बाद अब 21 फरवरी को कृष्ण कल्याणपुर उथली हीरा खदान क्षेत्र में मिला 26.11 कैरेट वजन का चौथा बड़ा हीरा है।"

70 किलोमीटर में है हीरा धारित पट्टी का विस्तार

पन्ना जिले में हीरा धारित पट्टी का विस्तार लगभग 70 किलोमीटर क्षेत्र में है, जो मझगवां से लेकर पहाड़ीखेरा तक फैली हुई है। हीरे के प्राथमिक स्रोतों में मझगवां किंबरलाइट पाइप एवं हिनौता किंबरलाइट पाइप पन्ना जिले में ही स्थित है। यह हीरा उत्पादन का प्राथमिक स्रोत है जो पन्ना शहर के दक्षिण-पश्चिम में 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां अत्याधुनिक संयंत्र के माध्यम से हीरों के उत्खनन का कार्य सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) द्वारा संचालित किया जाता रहा है। मौजूदा समय उत्खनन हेतु पर्यावरण की अनुमति अवधि समाप्त हो जाने के कारण यह खदान 1 जनवरी 21 से बंद है। एनएमडीसी हीरा खदान बंद होने से हीरों के उत्पादन का ग्राफ जहाँ नीचे जा पहुंचा है वहीं शासन को मिलने वाली रायल्टी में भी कमी आई है। अगर निकट भविष्य में एनएमडीसी हीरा खदान चालू नहीं हुई और हीरा कार्यालय की हालत नहीं सुधरी तो हीरों से जो पन्ना की पहचान थी वह भी ख़त्म हो सकती है।

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