मध्य प्रदेश: पानी के लिए अधिकारियों ने बिजली से चलने वाला मोटर उस गांव में लगा दिया जहां बिजली है ही नहीं

मध्य प्रदेश: पानी के लिए अधिकारियों ने बिजली से चलने वाला मोटर उस गांव में लगा दिया जहां बिजली है ही नहीं

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा के एक गांव में सरकारी अधिकारियों ने बिजली से चलने वाले मोटर उस गांव में लगा दिये जहां बिजली ही नहीं है। चार महीने से लगे मोटर धूल फांक रहे हैं। इस संदर्भ में ग्रामीणों ने कई बार आवेदन भी दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के विकास खंड तामिया के ढोडामुआर गांव में पानी की उचित व्यवस्था नहीं थी। शहर से काफी दूर पातालकोट के इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में पानी की समस्या को दूर करने के लिए जिला पंचायत की ओर से हैंडपंप में बिजली से चलने वाले (मोटर) तो लगा दिये गये लेकिन अधिकारियों ने यह ध्यान नहीं रखा कि इस गांव में बिजली अभी तक पहुंची ही नहीं है। पानी के मोटर के लिए दो फेज बिजली की जरूरत पड़ती है।

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इस दुर्व्यवस्था की ओर अधिकारियों का ध्यान दिलाने के लिए गांव का ही एक युवा चार महीने से जिला पंचायत कार्यालय और कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा है। पातालकोट क्षेत्र का रहने वाले सुमेरचंद्र सरेयाम हर कार्यालय को विज्ञप्ति सौंप चुके हैं, लेकिन नतीजा अभी भी सीफर ही है।


सुमेंरचंद्र ने बताया कि इस बारे में गांव के लोगों के साथ एस्टीमेट भी बनाकर दे दिया गया है। गांव में ट्रांसफार्मर और तीन पोल की आवश्यकता है। मोटर तो लगा है लेकिन बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण परेशान है। उन्हें चार किलो मीटर से पानी लाना पड़ रहा है।


लंबे समय से पातालकोट पर काम कर रहे डॉ दीपक आचार्य ने इस बाबत प्रधानमंत्री और पीएमओ को ट्वीट भी किया लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया। इस बारे में दीपक आचार्य कहते हैं " ये तो एक तरह का मजाक है। 80-90 किमी दूर से एक ग्रामीण शहर जाकर अधिकारियों से गुहार लगा रहा लेकिन अधिकारी हैं की सुन ही नहीं रहे।"


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वहीं इस बारे में छिंदवाड़ा के कार्यापालन अधिकारी जिला पंचायत, ऋषि गर्ग कहते हैं " यह जिम्मेदारी जिला पंचायत की होती है। अगर बिजली नहीं पहुंची है तो यह लापरवाही है। मैं देखता हूं क्या मामला है।"

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