मध्य प्रदेश: सतना की एक आदिवासी बस्ती में दस दिनों में पांच मौतें, ग्रामीणों ने कहा, पीने का पानी दूषित

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल भट्टन टोला गाँव में 11 से 23 अगस्त के बीच पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी हैं। 1500 लोगों की इस बस्ती में पीने के पानी के लिए सिर्फ एक कुआं है। यहां लगे तीनों हैंडपंप सूखे पड़े हैं।

Sachin Tulsa tripathiSachin Tulsa tripathi   30 Aug 2022 7:01 AM GMT

भट्टन टोला (सतना), मध्य प्रदेश। दुख में डूबी रानी मवासी को ढांढस देना बेहद मुश्किल है, उनकी नौ साल की बेटी सोनहला उनकी आंखों के सामने अंतिम सांस ले रही थी और वह बेबसी से उसे देखने के अलावा कुछ ना कर सकी।

सोनहला उनकी इकलौती बेटी थी। 45 साल की रानी मवासी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "मैं अपनी बेटी को खाना देने के बाद भेड़ चराने के लिए गई थी। मेरा पति और बेटा पहले ही काम पर निकल गए थे। शाम को करीब चार बजे जब मैं घर लौटी तो देखा कि वह बेहोश पड़ी है। उसे शाम को सात बजे तक दस्त और उल्टी होते रहे और फिर वह बच नहीं पाई।"

मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां ग्राम पंचायत के भट्टन टोला गाँव की नौ साल की सोनहला, उन पांच लोगों में से पहली थी, जिन्होंने 11अगस्त से 23 अगस्त के बीच अपनी जान गंवाई। मरने वालों में सबसे छोटे बच्ची महज तीन दिन की थी।

सोनाहला के पिता रामधीन मवासी के मुताबिक, उनके पास इतना समय नहीं था कि वे अपनी बेटी को अस्पताल ले जा सकें। इससे पहले कि वे स्थिति की गंभीरता को समझते, उसकी मौत हो गई। रामधीन ने गाँव कनेक्शन को बताया, "उल्टी और दस्त से गाँव के और लोगों की भी जान गई है।"

भट्टन टोला एक आदिवासी बहुल गाँव है जहां लगभग 1500 लोग रहते हैं। उनके पीने के पानी का स्रोत दो कुएं हैं।

ज्ञानवती मवासी ने भी अपनी तीन दिन की बेटी को उल्टी और दस्त से खो दिया। 28 साल की मवासी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "उसे रात में परेशानी शुरू हुई थी। मुझे लगा कि शायद उसे ठंड लग गई है। लेकिन हालत बिगड़ती चली गई और हम उसे अस्पताल ले गए।" उसने कहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, मेरी बच्ची ने पहले ही दम तोड़ दिया था।

भट्टन टोला एक आदिवासी बहुल गाँव है जहां लगभग 1500 लोग रहते हैं। उनके पीने के पानी का स्रोत दो कुएं हैं। 27 अगस्त को जब गाँव कनेक्शन ने राज्य की राजधानी भोपाल से लगभग 450 किलोमीटर दूर आदिवासी बस्ती का दौरा किया, तो ग्रामीणों ने शिकायत की कि कुओं का पानी गंदा है। लेकिन पीने के पानी का कोई और जरिया न होने की वजह से उन्हें दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

35 साल के शिवपूजन मवासी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "हमारे पास दो कुएं हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ एक में पीने लायक पानी है।" वह आगे कहते हैं, "यह एक तालाब के बगल में बना है, जिसमें जंगलों से बहने वाले नाले से पानी आता है।"

शिवपूजन के मुताबिक, गाँव में तीन हैंडपंप हैं, लेकिन सभी सूखे पड़े हैं। कुछ घरों में नल जल योजना के के जरिए पीने के पानी के नल का कनेक्शन भी है।

सतना के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी अशोक अवधिया ने बताया कि भट्टन टोला में 11 से 23 अगस्त के बीच हुई मौतें अलग-अलग कारणों से हुई हैं

केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 29 अगस्त, 2022 तक 43.52 फीसदी ग्रामीण घरों में नल के पानी का कनेक्शन हैं। सतना जिले में, जहां भट्टन टोला स्थित है, नल के पानी कनेक्शन कवरेज सिर्फ 19.40 प्रतिशत है।

मझगवां के एक सामाजिक कार्यकर्ता संदीप त्रिपाठी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "यहां कुएं, हैंडपंप और पानी की सप्लाई लाइन हैं, लेकिन हैंडपंप काम नहीं करते हैं और जो पानी कुएं में है, उसमें गंदगी ऊपर की ओर तैरता नजर आ जाएगा।" वह आगे कहते हैं, "नल जल योजना के जरिए पानी के पाइप बिछाई गई हैं, लेकिन न तो कोई कनेक्शन है और न ही कोई पानी आ रहा है।"

त्रिपाठी के मुताबिक, मौत के बाद प्रशासन के अधिकारियों ने कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाला और उसकी तस्वीरें लीं थीं।

गाँव में रहने वाले 60 साल के शंकरदीन मवासी ने गाँव कनेक्शन को बताया, "जब हमें घर पर नल का कनेक्शन नहीं मिला, तो हमने कुएं के पास एक नल कनेक्शन लगाने को था। जिस दिन वे पाइपलाइन बिछा रहे थे, हमने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा भी था, लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी।" उन्होंने बताया कि वो सब अभी भी कुएं से पानी ले रहे हैं।

सतना के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी अशोक अवधिया ने बताया कि भट्टन टोला में 11 से 23 अगस्त के बीच हुई मौतें अलग-अलग कारणों से हुई हैं। उन्होंने कहा कि जांच से पता चला है कि नौ साल की सोनाहला की मौत एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एआरडी) से हुई है, जबकि 11 साल की छोटी बाई मवासी की मौत का कारण बुखार और डिहाइड्रेशन था। 52 साल के रामगोपाल मवासी ने दिल का दौरा पड़ने से दम तोड़ दिया जबकि नवजात शिशु की भी मौत सोनाहला की तरह एआरडी की वजह से हुई थी।

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