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महाराष्ट्र: मंडी में नहीं बिका तो किसान ने सड़क किनारे फेंका 25 कैरेट टमाटर, सोशल मीडिया पर लिखी वजह

Arvind ShuklaArvind Shukla   18 March 2020 11:13 AM GMT

महाराष्ट्र: मंडी में नहीं बिका तो किसान ने सड़क किनारे फेंका 25 कैरेट टमाटर, सोशल मीडिया पर लिखी वजह

"टमाटर फेंकता नहीं तो क्या करता। मंडी में 50 रुपए कैरेट (करीब 2 रुपए किलो) का भाव था, उतने में भी कोई लेने वाला नहीं था। इसलिए मुझे 25 कैरेट माल फेंकना पड़ा।"

महाराष्ट्र में टमाटर का रेट न मिलने से दुखी एक युवा किसान ने 18 मार्च को अपना करीब 500 किलो टमाटर एक सड़क किनारे फेंक दिया। किसान ने टमाटर फेंकते का वीडियो मीडिया पर पोस्ट किया और मराठी में लिखा कि "कोरोना के डर से कोई माल (थोक) में खरीद नहीं रहा इसलिए फेंक रहा हूं, उलटा गाड़ी का भाड़ा जेब से गया, हाथ आया कुछ नहीं।"

टमाटर फेंकने वाले किसान का नाम रामदास लागड़ है जो महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की श्रीगोंदा तालुका के कोलगांव में रहते हैं। अहमदनगर मुंबई से करीब 530 किलोमीटर दूर है। गांव कनेक्शन से बात करते हुए एक एकड़ टमाटर लगाने वाले रामदास लागड़ ने कहा, "मैं टमाटर की गाड़ी लेकर शिरूर मंडी गया था लेकिन वहां टमाटर बिका नहीं तो मैंने रास्ते में उसे सड़क किनारे फेंक दिया। महाराष्ट्र में टमाटर की अच्छी पैदावार हुई थी, माल ज्यादा आने और कोरोना के चलते रेट नहीं मिल पा रहा है।"

नोवल कोरोना वायरस से जूझ रहे देश में किसान अलग ही मुसीबतों में फंसे हैं। मार्च के शुरुआती 15 दिनों में कई राज्य भारी बारिश और ओलावृष्टि से तबाह हुए हैं। कोरोना के सबसे ज्यादा मामले अब तक महाराष्ट्र में आए हैं, देश में पहली मौत भी महाराष्ट्र से सटे कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में हुई थी, जबकि तीसरी मौत मुंबई में हुई थी।

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कोरोना को फैसले से रोकने के लिए सरकारों ने कई तरह के कदम उठाए हैं। मॉल, जिम, थिएटेर पर तालेबंदी कर दी गई है। प्राइवेट कंपनियों को भी उद्धव ठाकरे सरकार ने आदेश दिया है कि उनके 50 फीसदी कर्मचारी घर से काम करें। अफवाहों और एहतियातन तमाम लोग यात्राएं, होटलों और रेंस्त्रा आदि में खाने से परहेज कर रहे हैं। जिसका असर बाजार पर पड़ रहा है। खाने पीने की बहुत सारी चीजों की सप्लाई पर भी असर पड़ा है।

महाराष्ट्र के पुणे, नाशिक, सांगली समेत कई जिलों में टमाटर की बड़े पैमाने पर खेती होती है। पुणे के जुन्नर और नारायणगांव नाशिक में पिंपलगांव, शिरड़ी समेत कई इलाके टमाटार की खेती के लिए भी जाने जाते हैं।

महाराष्ट्र की सबसे बड़ी प्याज और टमाटर मंडी नाशिक जिले में पिंपलगांव मंडी (कृषि उत्पन्न बाजार समिति, पिंगलगांव बसवंत) के सचिव संजय बालासाहेब पाटिल ने फोन पर गांव कनेक्शन को बताया, मंडी में टमाटर की हालात बहुत खराब है। किसानों को 51 रुपए से लेकर 121 रुपए तक का दाम मिल रहा है। जबकि 200 से 250 रुपए कैरेट तक बिके तब किसानों को फायदा होगा। हमारी मंडी में फिलहाल 1875 कैरेट माल आज आया है।"

आखिर में वो कहते हैं, "कोरोना का पूरा इफेक्ट है, डिमांड बिल्कुल नहीं है।"


महाराष्ट्र के ही दूसरे जिले वर्धा में भी टमाटर थोक में 2 रुपए किलो और फुटकर में 8 से 10 रुपए किलो बिक रहा है। वर्धा मंडी के कारोबारी योगेश साहू कहते हैं, " करीब एक महीना हो गया है टमाटर को 50 से 70 रुपए कैरेट बिकते। वर्धा ही नहीं पूरे महाराष्ट्र में थोक में 2 रुपए के आसपास का भाव मिलेगा। इसकी दो वजह है, पहला इस साल टमाटर की खेती बहुत ज्यादा हुई दूसरा मांग नहीं है।" साहू के मुताबिक उनकी मंडी में रोजाना करीब 1000 कैरेट टमाटर आ रहा है।

महाराष्ट्र में साल 2019 में जुलाई से लेकर अक्टूबर तक की भारी बारिश से प्याज और टमाटर किसानों की फसलें बर्बाद हुईं थी। सितंबर महीने में गांव कनेक्शन की टीम नासिक की पिंगलगांव बसवंत मंडी पहुंची थी वहां प्रति कैरेट टमाटर का रेट 500-700 रुपए पहुंच गया था, क्योंकि नासिक, पुणे और सांगली से लेकर सतारा तक भारी बारिश के चलते टमाटर की ज्यादातर फसलें बर्बाद हो गईं, सिर्फ 25-30 फीसदी टमाटर बचा था, जो महंगा बिक रहा था। सितंबर महीने का वीडियो नीचे देखिए


महाराष्ट्र में किसानों के लिए ये साल भी आपदा से घिरा बताते हुए पुणे में रहने वाले कृषि अर्थशास्त्री विजय जवाधिंया कहते हैं, "किसान अभी पिछले साल आई मंदी से उबर नहीं पाया था कि कोरोना आ गया। सिर्फ टमाटर ही नहीं मक्का, कपास और सोयाबीन के किसानों की भी हालत बदतर है। 5000 के आसपास बिकने वाला सोयाबीन 3500-3600 में बिक रहा तो 1800 कुंतल वाला मक्का 1300 में किसान बेचने को मजबूर हैं। क्योंकि देश की पोल्ट्री इंडस्ट्री बैठ गई जिससे मक्का और सोयाबीन की मांग नहीं रह गई और बाहर माल जो नहीं नहीं रहा।'

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विजय जवांधिया के मुताबिक मौसम भी किसानों की परेशानी की बड़ी वजह बन रहा है। अभी 17 तारीख को नागपुर समेत कई जगह बारिश हुई है। आगे भी मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। टमाटर की फसल मौसम के चलते भी बर्बाद हो रही क्योंकि जैसा ये मौसम में उसमे टमाटर ज्यादा दिन तक खेतों में रोका भी नहीं जा सकता है, जल्दी पकने, सड़ने और गलने लगता है।"

सरकारों द्वारा किसानों के लिए उठाए जा रहे कदमों को नाकाफी बताते हुए वो कहते हैं, केंद्र सरकार ने एक करोड़ कर्मचारियों को 14 हजार करोड़ का महंगाई भत्ता दिया है। लेकिन किसान को 6000 रुपए साल के देते हुए मुद्रा स्फीति पर असर पड़ने लगता है।

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