पुण्‍यतिथि: बॉलीवुड का वो स्‍टार जो हर किरदार में डाल देता था जान

Mohammad FahadMohammad Fahad   18 July 2019 12:53 PM GMT

पुण्‍यतिथि: बॉलीवुड का वो स्‍टार जो  हर किरदार में डाल देता था जान

लखनऊ। वर्ष 1971 में रिलीज़ हुई ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद उस वक़्त की उन फिल्मो में है, जिसने दर्शकों पर और राजेश खन्ना के चाहने वालों पर एक अलग छाप छोड़ दी थी। राजेश खन्ना ने अपने किरदार में फिल्म के आखिर में बीमारी से जूझते हुए मर जाते हैं मगर अपनी अदाकारी से अपने किरदार और फिल्म को अमर बना जाते हैं। आज राजेश खन्ना की पुण्यतिथि पर इसी फिल्म की वो लाइन वो कविता याद आती है, जिसको गुलज़ार ने अपनी कलम बक्शी थी।

"मौत तू एक कविता है

मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको

डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे

ज़र्द सा चेहरा लिये जब चांद उफक तक पहुँचे

दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब

ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन

जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आऐ

मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको"

राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसम्बर 1942 में हुआ था। राजेश खन्ना का वास्तविक नाम जतिन खन्ना था। चुन्नी लाल खन्ना और लीलावती खन्ना ने अपने एक रिश्तेदार से राजेश खन्ना को बचपन में गोद लिया था। इनके असली माँ-बाप का नाम लाला हरिनंद खन्ना और चंद्रानी खन्ना था। गोद लेने के बाद खन्ना दम्पति ने जतिन का नाम बदल कर राजेश खन्ना रख दिया था।

बंटवारे के बाद खन्ना दम्पति अमृतसर से मुंबई आकर बस गये थे। राजेश खन्ना की शुरुआती तालीम मुंबई के सेण्ट सेबेस्टियन हाई स्कूल में हुई थी और यही उनकी मुलाकात रवि कपूर यानि जाने-माने अभिनेता जीतेन्द्र से हुई। जीतेन्द्र और राजेश खन्ना एक ही क्लास में पढ़ते थे और अच्छे दोस्त भी थे। पढाई के साथ-साथ राजेश खन्ना को एक्टिंग का शौक़ बचपन से ही था और इसी शौक़ की वजह से राजेश खन्ना स्कूल में प्ले और बाद में थिएटर करने लगे थे।


राजेश खन्ना अपने स्टाइल की वजह से हमेशा सुर्ख़ियों में बने रहते थे। उनके करीबी बताते हैं कि वर्ष 1962 में राजेश खन्ना एक नाटक कर रहे थे, जिसका नाम अँधा युग था। इसमें उन्होंने एक सैनिक का किरदार निभाया था, जिसकी खूब तारीफ हुई थी। राजेश खन्ना ने अपनी जिंदगी में खूब थिएटर किया, जिसकी वजह से उन पर फ़िल्मी दुनिया की कई हस्तियों की नज़र पड़ी और वर्ष 1966 में चेतन आनंद की फिल्म आखरी ख़त से राजेश खन्ना को पहला ब्रेक मिला और हिन्दी सिनेमा को पहला सुपरस्टार मिला।

वर्ष 1966 के बाद से राजेश खन्ना ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा आराधना, इत्‍तेफाक, दो रास्ते, बंधन, डोली, सफ़र, खामोशी, कटी पतंग, आन मिलो सजना, ट्रेन, आनन्द, सच्चा झूठा, दुश्मन, महबूब की मेंहदी, हाथी मेरे साथी लगातार हिट फ़िल्में देते चले गए। वर्ष 1972 में राजेश खन्ना ने डिम्पल कपाड़िया से शादी की राजेश खन्ना को तीन बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला, जिनमें 1975 में अविष्कार, 1972 में आनन्द और 1971 सच्चा झूठा फिल्मे शामिल हैं।

राजेश खन्ना ने राजनीति में हाथ आज़माए 1991-1992 तक दिल्ली से सांसद भी रहे। राजेश खन्ना अपने आखरी समय में कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे और इसी बीमारी से जूझते हुए 18 जुलाई 2012 को इस फानी दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा कह गए...

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