आज से 90 साल पहले शुरू हुआ था भारत में रेडियो का सफर, अब तक इन पड़ाव से गुजरा

Mohit AsthanaMohit Asthana   28 Aug 2017 2:44 PM GMT

आज से 90 साल पहले शुरू हुआ था भारत में  रेडियो का सफर, अब तक इन पड़ाव से गुजराऑल इंडिया रेडियो।

लखनऊ। रेडियो एक ऐसा माध्यम है जिसमें हर वर्ग के लोगों के लिये सूचना, जानकारी से लेकर मनोरंजन तक सभी तरह के प्रोग्राम का प्रसारण किया जाता है। रेडियो के आविष्कारक मारकोनी ने जब पहली बार इटली में 1895 रेडियो सिग्नल भेजा और उसे सुना तो भविष्य का इतिहास वहीं अंकित हो गया था। एक कमरे में किया गया ये प्रयोग जब 1899 में इंग्लिश चैनल को रेडियो सिग्नल पार करता दूसरी छोर पर चला गया तो हंगामा मच गया। लेकिन रेडियो सिग्नल मात्र भेजना एक उपलब्धि तो थी लेकिन सवाल ये था कि क्या आवाज़े भी इस माध्यम से जा सकेंगीं।

भारत में रेडियो की शुरुआत

जुलाई 1923 में जब भारत पर ब्रिटिश का राज था उसी समय भारत में रेडियो प्रसारण की बात शुरू हुई जो 23 जुलाई 1927 को बम्बई में (आज का मुम्बई) इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के नाम से शुरू हुई, 26 अगस्त 1927 को कलकत्ता से (आज का कोलकाता) भी रेडियो प्रसारण शुरू हो गए। 8 जून 1936 को रेडियो को एक नया नाम मिला यानि "ऑल इंडिया रेडियो" जिसे हम आकाशवाणी के नाम से भी जानते हैं।

ममता सिंह, रेडियो एनाउंसर।

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रेडियो में बदलाव

मनोरंजन के रूप में ग्रामोफ़ोन के बाद रेडियो का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा था, कमरे में एक कोना रेडियो के लिए सुरक्षित था, तब के रेडियो बहुत बड़े और भारी भरकम होते थे, आवाज़ ऐसी की कुछ दूर तक सुनाई दे, इसी बीच रेडियो सिलोन का प्रसारण शुरू हुआ और रेडियो का दायरा और बढ़ गया, प्रायोजित कार्यक्रम और विज्ञापन भी आये, सिलोन की लोकप्रियता के कारण ऑल इंडिया रेडियो को नयी राह खोजनी पड़ी और उस राह का नाम था विविध भारती, 3 अक्टूबर 1957 को विविध भारती आरम्भ हुआ जो आज तक देश की सुरीली धड़कन बना हुआ है। रेडियो घर के कोने से निकल कर आपकी जेब में आपके मोबाइल में भी आ गया है, ये रेडियो की लोकप्रियता का ही कमाल है।

बढ़ रही है रेडियो की अहमियत

गाँव कनेक्शन ने विविध भारती मुंबई की जानी-मानी रेडियो एनाउंसर ममता सिंह से रेडियो के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में दो-चार बातें की...

इंटरनेट का दौर आया है सोशल नेटवर्किंग के जरिये टीवी का क्रेज कम हुआ है लेकिन रेडियो की अहमियत बढ़ रही है क्योंकि जैसे-जैसे लोगों के पास वक्त कम होता जा रहा है वैसे-वैसे लोग ऑडियो की तरफ बढ़ रहे हैं। रेडिया खासतौर से विविध भारती का चार्म लोगों के बीच बढ़ा है। नेट के जरिये विविध भारती लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंच रहा है। विविध भारती की अहमियत लोगों के बीच बिल्कुल अलग है। ममता सिंह अपने आप को खुशकिस्मत समझती है कि वो ऐसे माध्यम से जुड़ी है जिसके जरिये वो लोगों के दिलों तक पहुंचती हैं। वो कहती हैं मुझे खुशी होती है जब लोग मुझे लिखते है मुझे फोन कॉल करते है।

गीतकार जावेद अख्तर के साथ ममता सिंह।

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कई बदलाव भी आए है

गाँव कनेक्शन से गुफ्तगू के दौरान श्रीमती सिंह ने बताया कि जयमाला प्रोग्राम फौजी भाइयों के लिये आता है। ये प्रोग्राम तब शुरू हुआ था जब विविध भारती लॉच हुआ था। आज भी ये प्रोग्राम आता है लेकिन इसमें थोड़ा सा बदलाव किया गया है कि रविवार से शुक्रवार तक तो साधारण जयमाला आती है और शनिवार को शाम 7 बजकर पांच मिनट पर स्पेशल जयमाला फौजी भाइयों के लिये पेश किया जाता है जिसे बॉलीवुड सेलीब्रिटी करते है।

उसके लिये गायक, लेखक, गीतकार या संगीतकार जैसी हस्तियों को विविध भारती के स्टूडियो में बुलाकर उनसे फौजी भाइयों के लिये प्रोग्राम करने के लिये रिक्वेस्ट की जाती है। बदलाव के बारे में ममता ने बताया कि पहले फौजी भाइयों के पसंद के गाने सुनाये जाते थे। उनकी चिट्ठी आती थी प्रोग्राम में उनका नाम लिया जाता था। अब सिर्फ गाने ही सुनाये जाते है क्योंकि अब सोशल मीडिया के दौर में फौजी भाइयों की चिट्ठियां नहीं आती है एक वजह ये भी है कि फेंक(नकली) नाम की चिट्ठियां भी आने लगी थीं लेकिन प्रोग्राम फौजी भाइयों के लिये ही है।

उसमें एनाउंसमेंट होता है प्रस्तुत है फौजी भाइयों के लिये प्रोग्राम जयमाला और गाने भी उसी मूड के उनको मद्ददेनजर रखते हुए ही प्ले किये जाते है। इसके अलावा जयमाला सबसे पुराना प्रोग्राम है विविध भारती का। जब से विविध भारती की स्थापना हुई तब से चल रहा है तो हमारे पास पुरानी रिकॉर्डिंग है जैसे संगीतकार ओपी नैय्यर जब फिल्मों की शुरूआत हुई थी उस समय के कलाकार डायरेक्टर की रिकॅार्डिंग भी हमारे पास है जिसे हम शनिवार के प्रोग्राम में सुनाते है।

मशहूर गायिका छाया गांगुली से बातचीत

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अमीन सयानी जैसा कोई नहीं

जब ममता सिंह से पूछा गया कि आप की नजर में बेहतर रेडियो एनाउंसर कौन है तो उन्होंने सबसे पहला नाम यूनुस खान का लेते हुए बताया कि उनका प्रजेंटेशन सबसे अलग है। बाकी अन्य लोगों की अपनी अलग पहचान है जैसे कमल शर्मा।

आमीन सयानी साहब के जिक्र के दौरान ममता सिंह ने बताया वो तो विविध भारती का एक हिस्सा हैं उनकी कॅापी करना आसान नहीं है बहुत लोगों ने उनकी कॅापी की लेकिन वो बात नहीं आई। अब तो वो विविध भारती में नहीं है। उनके प्रोग्राम बिनाका गीतमाला को लोग बहुत पसंद करते थे तो वो हमारे लिये मील का पत्थर हैं।

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