सरहद पार भी मेरे ‘पोस्टर’ के दीवाने  

Basant KumarBasant Kumar   25 March 2017 7:17 PM GMT

सरहद पार भी मेरे ‘पोस्टर’ के दीवाने  शिराज हुसैन के काम को लोग पसंद कर रहे है।

लखनऊ। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फाइन आर्ट विभाग के असिसटेंट प्रोफ़ेसर शिराज हुसैन ( 31 वर्ष) के काम को चाहने वाले ना सिर्फ हिंदुस्तान में हैं, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इनके काम को खूब पसंद किया जा रहा है।

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प्रदेश के अमरोहा जिला से ताल्लुक रखने वाले शिराज हुसैन शायरों और लेखकों की तस्वीरें और उनकी शायरी के पोस्टर बनाते हैं। इनके बनाए पोस्टर युवाओं के बीच काफी चर्चित हो रहे हैं। इनकी पोस्टर की लोकप्रियता का आलम यह है कि आज हिंदुस्तान ही नहीं पाकिस्तान, कनाडा, अमेरिका और खाड़ी देशों से भी लोग पोस्टर की मांग कर रहे हैं। शिराज हिंदी और उर्दू दोनों ज़बान के लेखकों और शायरों पर काम कर रहे हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ही अपनी पूरी पढ़ाई करने वाले शिराज हुसैन आज उसी फाइन आर्ट विभाग में असिसटेंट प्रोफ़ेसर हैं, जहां से कभी उन्होंने पढ़ाई की थी। शिराज हुसैन बताते हैं, “जॉन एलिया के रिश्तेदार ने जॉन एलिया के पोस्टर को देखकर फीडबैक डायरी में लिखा था, ‘जॉन भाई यह तस्वीर देख मैं बचपन के दिनों में खो गया। ऐसा लगा जैसे मैं आपकी गोद में बैठा हूं।” उनके रिश्तेदार मुझसे मिलने आए तो उनकी आंखें भरी हुई थीं। लग रहा था रो देंगे।

पोस्टर बनाना क्यों शुरू किया ये सवाल पूछने पर शिराज हुसैन बताते हैं कि जब भी हम गूगल पर उर्दू या हिंदी शायरी सर्च करते हैं तो रोती हुई लड़की या गुलाब के फूल के ऊपर लिखी हुई शायरी आती है। ग़ालिब हो या मीर किसी के भी शेर पर शेर के दर्जे का विसुअल नहीं होता था। इसके बाद हमने निर्णय लिया कि क्यों न जिस दर्जे की शायरी है, उसी दर्जे का विसुअल भी साथ हो।

शिराज हुसैन बताते हैं कि इसके पीछे एक और कारण था। हमारे युवा तमाम लेखकों और शायरों का लिखा तो पढ़ते हैं, लेकिन उनकी शक्ल नहीं पहचानते हैं। विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली के दौरान साहिर लुधियानवी का पोस्टर देख एक लड़की बोली ‘कितना सुंदर पोस्टर और शायरी है, वैसे ये है कौन?’ हमारे लेखकों और शायरों को भी लोग जाने इसके लिए मैंने पोस्टर बनाना शुरू किया। युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए शिराज टीशर्ट, कप और बैग पर भी शेर या शायर की तस्वीरें बनाते हैं। शिराज का काम युवाओं को बहुत पसंद आता है। चे ग्वेरा का पोस्टर लगाने वाले युवा अब ग़ालिब और साहिर का भी पोस्टर अपने कमरे में लगाने लगे हैं।

हिंदुस्तान से बाहर भी लोगों को पसंद

शिराज बताते हैं कि मेरे फेसबुक पेज ‘ख्वाब तन्हा कलेक्टिव’ पर पाकिस्तान सहित अलग-अलग मुल्क से लोग पोस्टर की मांग करते हैं।

भारत-पाकिस्तान के बीच हालात के कारण मैं उन्हें भेज नहीं पता हूं। अभी एक लेखक कराची में होने वाले साहित्य उत्सव में शामिल होने जा रहे हैं तो उनके हाथों कुछ पोस्टर भेज रहा हूं। पाकिस्तान के लोग मंटो या उर्दू के दूसरे नामचीन शायरी-लेखकों के साथ-साथ हिंदी जबान के भी शायरों-लेखकों का काम खूब पसंद करते हैं।

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