सिर्फ डीडीएलजे ही नहीं, इन फिल्मों ने भी सिनेमाघरों पर लंबे समय तक किया राज

सिर्फ डीडीएलजे ही नहीं, इन फिल्मों ने भी सिनेमाघरों पर लंबे समय तक किया राजमराठा मंदिर में लगी दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे 

लखनऊ। मुंबई के मराठा मंदिर में पिछले 22 वर्षों से लगी फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का शो मंगलवार को एक दिन के लिए रद्द किया जा रहा है। इसके पीछे वजह है आने वाली फिल्म हसीना पार्कर। मंगलवार को श्रद्धा कपूर की आने वाली फिल्‍म 'हसीना पार्कर' की स्क्रीनिंग यहां होने वाली है।

'हसीना पार्कर' के निर्माता इस फिल्‍म के ट्रेलर को मराठा मंदिर में रिलीज करना चाहते हैं, क्‍योंकि यह थिएटर डोंगरी इलाके के काफी पास है, जहां दाउद इब्राहिम और उनकी बहन हसीना पार्कर बड़े हुए। इस वजह से फिल्म के एक दिन के शो को रद्द किया जा रहा है। 1995 में रिलीज हुई डीडीएलजे 22 साल से यहां लगातार लगी हुई है।

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इस ऐतिहासिक फिल्म को फरवरी 2015 में मराठा मंदिर के मालिकों ने हटाने का फैसला कर लिया था। बाद में प्रशंसकों की मांग पर फिल्म के प्रोड्यूसर्स और मराठा मंदिर ने आपस में बातचीत करके इस फिल्म को एक शो (मैटिनी शो) के साथ आगे भी चलाते रहने का फैसला किया था।

शुरुआत में फ्लॉप होने के बाद पांच साल तक लगी रही ‘शोले’

इससे पहले भी बॉलिवुड की कई ऐसी यादगार फिल्मों ने लंबे समय तक थियेटर में चलने का रिकॉर्ड बनाया है। इसमें 1975 में आई रमेश सिप्पी की फिल्म शोले भी शामिल है। आज सिनेमा के टेक्स्टबुक में शामिल हो चुकी इस फिल्म की शुरुआत हालांकि इतनी धुआंधार नहीं थी। 15 अगस्त 1975 को पर्दे पर उतरी शोले को शुरुआत में फिल्म समीक्षकों की आलोचना सहनी पड़ी थी, हालांकि पहले सप्ताह के बाद फिल्म का बिजनेस इतना शानदार निकला कि मुंबई के ग्रांड रोड स्थित मिनेरवा थियेटर में फिल्म पांच साल तक लगातार लगी रही। फिल्म का क्रेज इतना ज्यादा था लोग टिकट विंडों में लंबी कतारों में लगकर इंतजार किया करते थे।

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इतना ही नहीं शोले को रिलीज होने के दस सप्ताह बाद ब्लॉकबस्टर कहा गया और यह पहली फिल्म थी जो भारत के 102 थियेटर में एक साथ लगी थी। कोलकाता के ज्योति सिनेमा में भी फिल्म 103 हफ्तों तक चली थी।

मराठा मंदिर में लगने वाली सबसे पहली फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’, आठ साल तक पर्दे से नहीं उतरी

हिंदी सिनेमा की एक और ऐतिहासिक फिल्म मुगल-ए-आजम भी लंबे समय तक चलने वाली फिल्म रही। फिल्म मराठा मंदिर में लगातार आठ साल तक लगी रही। इसी के साथ खास बात ये भी है कि मुगल-ए-आजम मराठा मंदिर में लगने वाली पहली फिल्म भी थी। 1960 में ये थियेटर बना था और इसी साल फिल्म भी रिलीज हुई थी।

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हिंदी सिनेमा की सबसे पहली लंबे समय तक चलने वाली फिल्म

1943 में आई अशोक कुमार अभिनीत फिल्म किस्मत मुंबई के रॉक्सी थियेटर में रिलीज हुई पहली ऐसी हिंदी फिल्म थी जिसने सबसे लंबे समय तक 192 हफ्ते तक लगातार चलने का रिकॉर्ड बनाया था। मुगल-ए-आजम और शोले भी इसके बाद रिलीज हुई थी। यह फिल्म एक खूबसूरत महिला और एक चोर के बीच की प्रेम कहानी है। राज कपूर की फिल्म बरसात जो 1949 में रिलीज हुई थी कोलकाता में 100 हफ्तों तक लगातार चली थी।

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इन फिल्मों ने भी बनाया रिकॉर्ड

इसके अलावा सूरज बड़जात्या की डेब्यू फिल्म मैंने प्यार किया (1989) ने उनकी दूसरी फिल्म हम आपके हैं कौन की तरह थियेटर में गोल्डन जुबली पूरी की थी। दोनों फिल्में सलमान खान स्टारर थी। ऋतिक रोशन की डेब्यू फिल्म कहो न प्यार है (2000) और आदित्य चोपड़ा की फिल्म मोहब्बतें (2000) ने भी एक साल तक थियेटर में लगातार चलने का रिकॉर्ड बनाया था।

धर्मेश दर्शन की आमिर-करिश्मा स्टारर फिल्म राजा हिंदुस्तानी (1996) ने भी 50 हफ्तों तक चलने का रिकॉर्ड बनाया।

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