भाषा कोई भी हो, गाने का भाव एक ही रहता है- कल्पना

भाषा कोई भी हो, गाने का भाव एक ही रहता है- कल्पनाकल्पना पटोवारी

नई दिल्ली (आईएएनएस)। भोजपुरी गानों की प्रसिद्ध गायिका कल्पना पटोवारी ने हालिया रिलीज फिल्म 'बेगम जान' के गीत 'ओ रे कहारो' में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। वह कहती हैं कि भाषा कोई भी हो, गाने का भाव एक ही रहता है।

असम से आकर भोजपुरी फिल्म उद्योग में धाक जमा चुकीं कल्पना ने से कहा, "बेगम जान के इस गाने को लेकर मुझसे कहा गया कि यह चरित्र बहुत मजबूत है। बेगम जान गाली बकती है, उसके तेवर बहुत सख्त हैं, लेकिन इस गाने के दौरान उसका ममत्व दिखाया जाएगा, इसलिए मुझे गाने में अपनी आवाज के जरिए उसके ममत्व को प्रदर्शित करना था।"

उन्होंने कहा, "इस गाने के लिए मुझे अनु मलिक ने फोन किया था। यह इस साल की सबसे चर्चित फिल्म रही है। मैं इस फिल्म से बहुत खुश हूं कि, क्यूंकि इसमें महिला सशक्तीकरण की बात की गई है।"

बेगम जान में दी है आवाज़

चंपारण सत्याग्रह पर अल्बम के बारे में कल्पना कहती हैं, "चंपारण सत्याग्रह केवल ब्रिटिश हुक्मरानों द्वारा शोषित किसानों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि यह सही मायनों में देश की आजादी की लड़ाई में चंपारण जैसे सुदूर जिले के गांव के लोगों की हिस्सेदारी थी। मेरी यह कोशिश लोगों को भोजपुरी की मिठास से जोड़ेगी। अपनी इस कोशिश के जरिए मैं भोजपुरी को बौद्धिक और साहित्यिक समाज के बीच लाना चाहती हूं।"

कल्पना ने अपने अल्बम 'चंपारण सत्याग्रह' को दो भाषाओं हिंदी और भोजपुरी में बिहार की धरती और महात्मा गांधी को समर्पित किया है, ताकि भोजपुरी को भारतीय भाषा के रूप में पहचान मिल सके।

अपनी इस कोशिश के बारे में उन्होंने कहा, "मैं अपनी अल्बम के जरिए बापू को संगीतमय श्रद्धांजलि दे रही हूं। अपने संगीतमय प्रयास के जरिए मैंने सरकार से भोजपुरी को उसका वाजिब हक देने का अनुरोध किया है। इस प्रकार मेरा यह प्रयास एक संगीतमय सत्याग्रह है, ताकि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह मिल सके।"

असम में पैदा हुईं कल्पना ने भोजपुरी के अलावा कई भाषाओं में गाया है। कल्पना एक बार जब तान छेड़ती हैं, तो हर कोई उन्हें सुने बिना नहीं रह सकता। उनका भोजपुरी गीत 'आरा हिले छपरा हिले' और फिल्म आर. राजकुमार का 'गंदी बात' हर किसी की जुबां पर चढ़ा हुआ है।

भोजपुरी गानों से मशहूर हुई कल्पना

हिंदी व भोजपुरी गीतों के अनुभव को लेकर कल्पना ने बताया, "मुझे लगता है कि भाषा कोई भी हो गाने का भाव एक ही रहता है। हमारा एक फ्यूजन बैंड है। हम लोग स्वीडन में एक कार्यक्रम करने जा रहे हैं, जहां मैं कई लोकगीतों को गाऊंगी। संगीत सुनने के लिए भाषा की समझ जरूरी नहीं है, बगैर भाषा की जानकारी के भी आप कई तरह के संगीत का आनंद उठा सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "बेगम जान के 'ओ रे कहारो' को बहुत पसंद किया गया है, मैं इससे बहुत खुश हूं.. लेकिन मैं मानती हूं कि एक कलाकार के तौर पर सबसे पहले विचारक होना जरूरी है। पाश्र्व गायन में मेरी सोचने की शक्ति खत्म हो जाती है, उसमें केवल मेरा भाव और आवाज होती है, लेकिन मैं क्या सोचती हूं उसे बयां करने की आजादी मुझे अपने स्वतंत्र संगीत अल्बम में ही मिलती है।"

उन्होंने कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि आप हर तरह का काम करें और हर तरह का गीत गाएं, लेकिन इससे साथ-साथ अपने काम में आप विचारों को भी साझा करें।"

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