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राजेश खन्ना : पहला सुपरस्टार , लड़कियां जिसकी फोटो से शादी कर लेती थीं

फिल्मनगरी के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में हुआ था। जतिन खन्ना से राजेश खन्ना बने इस चहेते हीरो की परवरिश उसने दत्तक माता-पिता ने की थी।

साल 1965 का समय था, फिल्मफेयर और बॉलीवुड इंडस्ट्री के कुछ जाने-माने प्रोड्यूसरों ने फिल्मफेयर के साथ मिलकर टैलंट हंट की प्रतियोगिता का आग़ाज़ किया था जिसमें से भविष्य के लिए बेहतरीन अभिनेता चुने जाने थे। जज की कुर्सी पर हिंदी सिनेमा के दिग्गज, जाने-माने निर्देशक बिमल रॉय, मशहूर अभिनेता-निर्देशक गुरुदत्त व यश चोपड़ा। उनके सामने 1000 प्रतिभागी अपना ऑडिशन दे रहे थे। तभी स्टेज पर एक नौजवान लड़का आया और दिए गए डायलॉग बोलने की कोशिश करने लगा, वह काफी घबराया हुआ था।

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थोड़ी देर बाद साहस करके उसने तीनों जज से कहा, ‘प्रतियोगिता में मुझे जो डायलॉग बोलने के लिए दिया गया है वह अच्छा है लेकिन ऑर्गनाइजर्स ने मुझे इसके कैरेक्टर के बारे में नहीं बताया था जिसके द्वारा यह डायलॉग बोला जाना है।’ यह सुनकर तीनों में एक जज ने उससे पूछा क्या तुम एक स्टेज एक्टर हो? इस पर जवाब मिला, ‘जी हां।’ जवाब सुनकर प्रभावित हुए जजों ने उसे अपनी पसंद से कोई भी डायलॉग बोलने को कहा। जैसे ही लड़के ने अपने थियेटर नाटक में से किसी एक डायलॉग को बोलकर पूरा किया, हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अब तक सबको पता चल गया था कि यह लड़का ही टैलंट हंट का असली विनर है।

वह नौजवान कोई और नहीं, फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना थे। आज उनका 73 वां जन्मदिन है। राजेश खन्ना यानी काका आज भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन हिंदी सिनेमा में उनके योगदान, उनका स्टारडम, जबर्दस्त अभिनय कौशल और उनके लिए फैंस की बेहद दीवानगी भूली नहीं जा सकती।

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फिल्म आनंद में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन। ये  फिल्म काका के कैरियर में मील का पत्थर मानी जाती है।

टैलंट जीतने के बाद राजेश खन्ना ने 12 अलग-अलग निर्माताओं के साथ 12 अलग-अलग फिल्में चुनी। हालांकि शुरुआत की तीन फिल्में कुछ खास कमाल नहीं कर पाईं। इसमें आखिरी खत, राज और बहारों के सपने शामिल थी। लोगों को लगा कि टैलंट हंट जीतने वाले असली जंग में कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाते। सबका यह भ्रम भी टूट गया जब 1969 में शक्ति सामंत की फिल्म आराधना आई। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर अभिनीत यह फिल्म सुपर-डुपर हिट हुई और राजेश खन्ना की कामयाबी का सफर चल पड़ा।

राजेश खन्ना की फिल्में 1976-78 के दौरान पहले सी सफलता हासिल नहीं कर पायीं और 1978 के बाद उन्होंने ‘फिर वही रात’, ‘दर्द’, ‘धनवान’, ‘अवतार’ और ‘अगर तुम ना होते’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया जो कमाई के लिहाज से सफल नहीं थीं। आलोचकों ने उन्हें जरूर सराहा लेकिन हर सितारा डूबता है और 80 के दशक के उत्तरार्ध में बॉक्स ऑफिस पर उनका जादू खत्म हो गया।

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15 साल छोटी डिंपल से की शादी

अभिनेता राजेश खन्ना की लव लाइफ भी काफी चर्चित रही। अंजू महेंद्रू के साथ लंबे रिलेशनशिप में रहने के बाद उन्होंने बॉबी गर्ल डिंपल कपाड़िया को अपना जीवनसाथी चुना। उस वक्त डिंपल उनसे 15 साल छोटी थीं। दोनों की दो बेटियां ट्विंकल और रिंकी हैं। डिंपल कपाड़िया 1984 में राजेश खन्ना से अलग हो गयीं। हालांकि वे अलग-अलग रहते रहे लेकिन कभी औपचारिक रूप से तलाक नहीं लिया।

राजनीति में रहे असफल

1990 के आस-पास राजेश खन्ना कांग्रेस में शामिल हो गए और दिल्ली से सांसद बने गए। उस वक्त उन्होंने कहा था कि यदि भारत में 2000 समस्याएं और उनमें से किसी एक को भी हल कर लेता हूं तो मैं सोचूंगा कि मैंने कुछ उपलब्धि हासिल की। हालांकि राजेश खन्ना राजनीति में सफल नहीं हो पाए और उन्हें अफसोस के साथ कहना पड़ा, ‘जब एक अभिनेता एक स्टार की लाइफ जीते हुए अपनी फैमिली, पत्नी और बच्चों को भी छोड़ देता है तो वह पॉलिटिक्स के साथ कैसे न्याय कर सकता है।’

काका का वह रिकॉर्ड जो कोई नहीं तोड़ पाया

राजेश खन्ना ने इंडस्ट्री वह रिकॉर्ड बनाया जिसे आजतक कोई भी तोड़ नहीं पाया। सदी के महानायक भी नहीं। काका ने साल 1969 से 1971 के बीच लगातार 15 सुपरहिट फिल्में दीं जिसमें आराधना (1969), दो रास्ते (1969), बंधन (1969), डोली (1969), इत्तेफाक (1969), खामोशी (1970), सफर (1970), कटी पतंग (1970), द ट्रेन (1970), सच्चा झूठा (1970), आन मिलो सजना (1970), महबूब की मेहंदी (1971), अमर प्रेम (1971), आनंद (1971), हाथी मेरे साथी (1971) फिल्में शामिल रहीं। इसके बाद राजेश खन्ना बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार बन गए।

अपने आखिरी दौर में काफी बीमार रहने लगे थे राजेश खन्ना।

लड़कियां काका की फोटो से शादी कर लेती थीं

एक और चीज़ जो काका को सुपरस्टार बनाती थी वह उनकी 180 फिल्में नहीं बल्कि वह उनकी क्रेज़ी फैन फालोइंग थी। उस दौर में लड़के काका की तरह ड्रेसिंग स्टाइल करते थे वहीं लड़कियों के बीच राजेश खन्ना कुछ इस तरह लोकप्रिय हुए कि लड़कियों ने उन्हें खून से खत लिख डाले। उनकी फोटो से शादी कर ली। एक किस्सा है कि स्टूडियो या किसी निर्माता के दफ्तर के बाहर राजेश खन्ना की सफेद रंग की कार रुकती थी तो लड़कियां उस कार को ही चूम लेती थी। लिपस्टिक के निशान से सफेद रंग की कार गुलाबी हो जाया करती थी।

काका की आत्मा थे किशोर कुमार

अपने सफल करियर में काका को उनकी पर्दे पर आवाज मिल गई थी गायक किशोर कुमार के रूप में। राजेश खन्ना ने एक इंटरव्यू में कहा भी था कि वह शरीर हैं तो किशोर उनकी आत्मा। किशोर कुमार ने अपने आखिरी वक्त तक राजेश खन्ना का साथ निभाया।

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