पिट्टू का खेल: छोटे छोटे पत्थरों से टावर बनाने वाला ये खेल आपने भी खेला होगा 

पिट्टू का खेल: छोटे छोटे पत्थरों से टावर बनाने वाला ये खेल आपने भी खेला होगा पत्थरों को जाेड़कर बनाना होता है टावर।

ये सच है कि वक्त के साथ दुनिया बदलती है, आदतें बदलती हैं, प्राथमिकताएं बदलती हैं ...इन बदली हुई प्राथमिकताओं में कई बार वो चीज़ें पीछे छूट जाती हैं, जो कभी हमारी ज़िंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करती थीं, जैसे वो खेल जिनके साथ हम बड़े हुए हैं।

उन पुराने खेलों को नए सिरे से जानने-समझने के लिए गाँव कनेक्शन ने शुरू की ये ख़ास मुहिम 'खेल जो कहीं खो गए '। इस विशेष सीरीज़ के में आज, बात एक ऐसे खेल की, जिसे आपने भी बचपन में खूब खेला होगा भले अलग अलग नामों से--

पत्थरों को जोड़कर बनाया जाता है टावर

इस खेल को खेलने के लिए सात चपटे पत्थर और एक गेंद की जरुरत होती है। इसमें पत्थरों को एक के ऊपर एक जमाया जाता है। इस खेल में दो टीमें भाग लेती हैं, एक टीम का खिलाड़ी पहले गेंद से पत्थरों को गिराता है और फिर उसकी टीम के सदस्यों को पिट्ठू गरम बोलते हुए उसे फिर से जमाना पड़ता है। इस बीच दूसरी टीम के ख़िलाड़ी गेंद को पीछे से मारते हैं। यदि वह गेंद पिट्ठू गरम बोलने से पहले लग गयी तो टीम बाहर। इसके लिए हमें टेनिस या रबर बॉल की जरूरत होती है। बस ध्यान रहे कि यह बहुत भारी न हो, वरना चोट भी लग सकती है।

पिट्ठू खेलने के लिए खुली जगह होनी चाहिए, जिससे खिलाड़ी आसानी से दूरी बनाते हुए अपनी पारी खेल सकें। मैदान की आउटर बाउंड्री तय कर लें और बीचोबीच एक सर्कल बनाकर पिट्ठू का टावर बनाएं। इस सर्कल के दोनों तरफ करीब 3 मीटर की दूरी पर छोटी लाइन खीचें। दो टीमें बनानी होंगी, जिनमें कम-से-कम तीन खिलाड़ी हों। लेकिन जितने ज्यादा खिलाड़ी होंगे, खेलने में उतना ही मजा आएगा।

दो टीमों में होते हैं बराबर सदस्य।

खेल के नियम

  • दो टीमें होंगी। टीम 1 बैटिंग करेगी यानी बॉल से पिट्ठू टावर तोड़ेगी और सबसे बचते हुए इसे दोबारा बनाएगी। टीम-2 फील्डिंग करेगी यानी टीम 1 के खिलाड़ियों को पिट्ठू टावर बनाने से रोकेगी।
  • खेलते हुए मैदान की आउटर बाउंड्री से बाहर जाने पर फाउल होगा और वह खिलाड़ी टीम से बाहर होगा।
  • मैदान के बीच बने सर्कल के एक तरफ की पैरलल लाइन से परे होकर टीम-1 का एक खिलाड़ी खड़े होकर पिट्ठू तोड़ेगा और दूसरी तरफ टीम-2 का खिलाड़ी बॉल कैच करने के लिए खड़ा होगा।
  • पिट्ठू टावर तोड़ने के लिए टीम के हर खिलाड़ी को तीन चांस दिए जाते हैं, जब तक वह टीम आउट नहीं हो जाती। अगर वह टीम एक बार भी पिट्ठू तोड़ने में कामयाब नहीं होती तो दूसरी टीम की बारी आ जाती है। टावर तोड़ते वक्त अगर फील्डर टीम-2 के खिलाड़ी बॉल सीधी कैच कर लेते हैं तो वह टीम आउट हो जाती है।
  • दूसरे खिलाड़ी मैदान में दूरी पर खड़े रहते हैं और टावर दोबारा बनाने के लिए बचते हुए भागते हैं। टीम-2 के खिलाड़ी उनके आसपास रहते हैं और एक खिलाड़ी तो बीच के सर्कल के पास ही खड़ा रहता है ताकि वे उन्हें पिट्ठू टॉवर दोबारा बनाने से रोक सकें और उन्हें बॉल से हिट करके आउट करने की कोशिश करते हैं।

पिट्टू गरम को गेंद ताड़ी नाम से भी जाना जाता है।

  • इसके लिए वे अपनी टीम के खिलाड़ियों को भी बॉल पास कर सकते हैं। एक फील्डर ज्यादा-से-ज्यादा 50 सेकंड के लिए बॉल पकड़ सकता है। बैटिंग टीम के खिलाड़ियों को आउट करने के लिए उसे बॉल अपनी टीम के दूसरे खिलाड़ी को पास करनी पड़ेगी।
  • फील्डर टीम के खिलाड़ी को केवल घुटनों के नीचे ही बॉल से हिट कर सकते हैं।
  • पिट्ठू टॉवर टूटने पर टीम-1 के खिलाड़ी अपना बचाव करते हुए उसे दोबारा बना लेते हैं तो उन्हें जोर से बोलकर पिट्ठू बनाने की सूचना देनी चाहिए। इससे उन्हें पॉइंट ही नहीं मिलता, एक बार और खेलने का मौका भी मिलता है।

  • लेकिन अगर टीम-2 के खिलाड़ी अपने साथियों को बॉल पास करके टीम-1 के किसी भी खिलाड़ी को हिट कर देते हैं तो टीम-1 की बारी खत्म हो जाती है और दूसरी टीम को पॉइंट मिलेगा। टॉवर तोड़ने के लिए टीम-1 के तीन चांस हो जाने के बाद दूसरी टीम की बारी आ जाती है।
  • इसके बाद टीम-2 बैटिंग करती है और पिट्ठू टॉवर बनाती है। टीम-1 फील्डिंग करती है, जिसके पॉइंट ज्यादा बनते हैं, वह जीतता है।

Share it
Top