शास्त्रीय संगीत और संस्कृत का मेल है ‘ध्रुवा’

शास्त्रीय संगीत और संस्कृत का मेल है ‘ध्रुवा’फोटो: सभार इंटरनेट

नई दिल्ली (भाषा)। म्यूजिक बैंड की बात आती है तो जेहन में आधुनिक संगीत और गीत आते हैं लेकिन शास्त्रीय संगीत के साथ संस्कृत के श्लोकों और रिचाओं को मंच पर बैंड के रुप में प्रस्तुत करना अपने आप में एक अद्भुत, अनोखा विचार लगता है जिसे भोपाल के ‘ध्रुवा’ बैंड ने साकार किया है।

संस्कृत के श्लोकों को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करेगा बैंड

शास्त्रीय संगीत के साथ संस्कृत के श्लोकों और रिचाओं को मंच पर आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करने वाला ‘ध्रुवा’ बैंड संस्कृत के वेदगीतों का गायन करता है तो सूफी रचनाओं की भी प्रस्तुति देता है। बैंड गुरु नानकदेव के उपदेशों को भी अपनी धुनों में ढाल रहा है।

लोगों के बीच धारणा है कि संस्कृत में कॅरियर नहीं है। दो साल पहले संस्कृत के साथ संगीतमय मनोरंजक प्रस्तुति का विचार आया। फिर इसे बैंड के रुप में आगे बढ़ाया ताकि नई पीढी इसे पसंद करे। हमारी प्रस्तुति देखकर लोगों को लगने लगा कि संस्कृत में भी संगीत को इस तरह पेश किया जा सकता है।
संजय द्विवेदी

बचपन से ही घर में संस्कृत के माहौल के साथ पले बढ़े मध्य प्रदेश के युवा संजय द्विवेदी ने करीब दो साल पहले ध्रुवा की नींव रखी थी जो आज 10 युवा संगीतज्ञों के साथ प्रस्तुति देता है और उनका दावा है कि यह भारत का पहला संस्कृत बैंड है। शास्त्रीय संगीत और संस्कृत के मिश्रण को जब रॉक बैंड की तरह प्रस्तुत किया जाता है।

संस्कृत में पीएचडी की डिग्री रखने वाले और गुरु-शिष्य परंपरा से शास्त्रीय संगीत सीख रहे डॉ संजय द्विवेदी कहते हैं कि संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए और आज की पीढी में इस भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्होंने इस तरह के विचार को मूर्त रुप दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर माना जाता है कि शास्त्रीय संगीत को सुनने वाला वर्ग अलग ही होता है, वहीं युवा इस शैली से खुद को ज्यादा जोड़ नहीं पाते। लेकिन हमने लीक से हटकर सोचा और हमारा प्रयोग इस दिशा में सफल होने लगा।

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