ढोलक की थाप और मंजीरे की धुन से शुरू होता है सोहर 

आजकल रैप-रीमिक्स और डीजे के बढ़ते चलन से हमारे लोकगीत खो से गए हैं, ज़रा सोचिएगा कि आपने आज से पहले कब, कौन सा लोकगीत सुना था। पूरे भारत में सैकड़ों लोकगीत हैं, जो किसी समुदाय विशेष से जुड़ी कथाओं व किसी परंपरा को अपने अंदर संजोए हुए हैं। गाँव कनेक्शन आने वाले दिनों में आपको अपनी विशेष सीरीज़ ' मेरे गाँव, मेरे गीत ' के ज़रिए भारतीय लोकगीतों से रूबरू कराएगा, जिन्हें आप और हम भूलते जा रहे हैं। आज का लोकगीत है सोहर

लोक गीत - सोहर


गाँवों में अगर किसी के घर से ढोलक की थाप और मंजीरे की आवाज़ आ रही हो और महिलाएं हंसते हुए गीत गा रही हों, तो समझ लीजिए की ये खुशी घर पर किसी नन्हें- मुन्ने सदस्य के आने की है। जब किसी घर में कोई बच्चा पैदा होता है, तो घर की महिलाएं खुशी का इज़हार करते हुए सोहर गाती हैं। सोहर गीत में बच्चे के जन्म, उसके घर वालों से संबंधित बातें, पकवानों और त्यौहारों से जुड़ी बातें शामिल होती हैं। सोहर रामनवमी और कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भजन के तौर पर भी गाया जाता है। सोहर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार का लोकगीत है। इसका संबंध भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि ब्रज (मथुरा) से है।






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सोहर गीत -

" हुए देवकी के लाल, यशोदा जच्चा बनी-2

हुआ रंगमहल में शोर सुनकर दाई चली, रंगमहल में नारा छिनाने लगी

बजो शंख घड़ियाल, लियो कृष्ण अवतार

यदुवंशी के घर में उजाला हुआ, हुए देवकी के लाल, यशोदा जच्चा बनी-2 ''

अवधी भाषा में लिखा हुआ यह सोहर गीत श्री कृष्ण के जन्म के बारे में बताता है। इस गीत में कृष्ण के जन्म का वर्णन किया गया है। श्री कृष्ण के जन्म पर पूरा महल दीपकों से सजाया गया है। जन्म पर लोग खुशी से ढोल-बाजे, शंख बजा रहे हैं और लोग कह रहे हैं कि यशोदा के पुत्र के जन्म से पूरे समाज में उजाला हो गया है।

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फिल्मों में भी दिखाए गए हैं सोहर गीत -

फिल्मों में भी समय समय पर सोहर लोकगीत देखने को मिल जाते हैं। भोजपुरी फिल्म ' पिया के गाँव ' का 'जुग-गुग जिए सु ललनवा' सोहर गीत हमें आज तक याद हैं।

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