सुरबग्घी का खेल : क्या आपने खेला है देसी चाइनीज चेकर ?

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   8 Jan 2019 5:14 AM GMT

आज मोबाइल फोन के बढ़ते चलन से ग्रामीण क्षेत्रों में युवा मिट्टी से जुड़े खेलों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसा ही एक खेल ' सुरबग्घी ' भी है, जो समय के साथ साथ गाँवों में अपनी पहचान खोता चला जा रहा है। खेल जो कहीं खो गए ... सेगमेंट में आज इस खेल से जुड़ी अपनी यादें बता रहे हैं देवांशु मणि तिवारी...

सुरबग्घी का खेल -

मुझे याद है जब मैं अपनी गर्मी की छुट्टियों में अपने गाँव गया था, तब उस समय घर के बरामदे की ओर जाने वाली कच्ची दहलीज़ पक्की की जा रही थी। फर्श बना रहे मिस्त्री से मेरी चाची ने फर्श के बीचों-बीच सुरबग्घी की चौकोर बिसात बनाने के लिए कहा था। यह बिसात कुछ हद तक हमारे चाईनीज़ चेकर और शतरंज खेलों से मिलती जुलती थी। फर्श पर बनी वो बिसात एक-दो दिन में बिल्कुल पक्की हो गई थी और ज़मीन पर रंगोली की तरह बहुत सुंदर दिख रही थी।

अब क्योंकि ज़मीन पर बनी सुरबग्घी की बिसात पक्की हो चुकी थी। मैंने और मेरी चाची ने पूरी तैयारी कर रखी थी कि चाचा के ऑफिस जाने के बाद आज सुरबग्घी का ज़ोरदार खेल होगा। हमने यह तय कर लिया था कि अगर मैं हारा तो मैं पांच दिन की बजाए पूरा एक हफ्ता गाँव में रहूंगा और अगर चाची जीतीं तो वो मेरे लिए गाजर का हलवा बनाएंगी। मुझे याद है चाचा के जाने के बाद दोनों खिलाड़ी तैयार थे। बिसात पर गोट रखने के लिए चाची ने मुझसे पक्की गिट्टियां लाने को कहा और खुद दरवाजे लगे नीम के पेड़ के नीचे से मिट्टी के कंकड़ उठाकर ले आई थी।

खेल जो कहीं खो गए...

सुरबग्घी खेल में 32 गिट्टियों ज़रूरत पड़ती हैं, जिसमें 16 गोटियां एक खिलाड़ी के पाले में होती हैं और बाकी 16 गोटें दूसरे खिलाड़ी के पास होती हैं। दोनों पक्षों की गिट्टियों का रंग अलग होता है। ये खेल भले ही घर के अंदर खेला जाता हो लेकिन इसमें तेज़ रफ्तार दौड़ने वाले घोड़ों की तरह दिमाग को दौड़ाना पड़ता है। आपकी एक गलत चाल आप को हरा भी सकती है, इसलिए खेल खेलने वाले दोनों खिलाड़ियों को बड़े ध्यानपूर्वक इस खेल को खेलना पड़ता है। इस खेल में बनाई गई चौकौर बिसात में प्वाइंटों के सहारे एक लाइन पर गोटें चली जाती हैं। मान लीजिए कि आपकी और आपके विपक्षी खिलाड़ी की गोट अगल-बगल है और तीसरा प्वाइंट खाली है। आपकी गोट बीच में है और अब चाल अगले खिलाड़ी की है। अगर विपक्षी खिलाड़ी आपकी गोट को काट कर आगे के प्वाइंट पर अपनी गोट रख देता है, तो आपकी की गोट कट जाएगी और दूसरा खिलाड़ी बाज़ी जीत जाएगा।

चाची इस खेल को ऐसे खेल रहीं थी मानों उन्हें कोई हरा ही नहीं सकता हो, वो मेरी गोटे काटती ही चली जा रही थी। उस दिन सुरबग्घी का खेल बहुत लंबा चला, मैंने चाची की कई चालें काटीं और उन्होंने मेरी। कभी-कभी मैं उदास न हो जाऊं इसलिए चाची खुद अपने आप को हराने के लिए गलत चाल चलती थीं। आखिरकार खेल खत्म होने को था, चाची की बस दो गोटें बची थी और मेरी सिर्फ एक। चाची ने फुर्ती दिखाते हुए मेरी आखिरी बची हुई गोट भी काट दी और हंसते हुए बोलीं कि बेटा अब तू हार गया है, तुझे अब एक हफ्ता यहीं रुकना पड़ेगा। मुझे उदास देख कर वो मेरे पास आकर फिर से बोलीं चलो अब मुंह मत फुलाओ, तुमने पहली बार में ही इस खेल को बहुत अच्छे से खेला है। इसलिए तुम्हारे लिए मैं आज गाजर का हलवा बनाऊंगी।

सुरबग्घी सदियों से गाँवों में खेला जाता रहा है। गाँव के बड़े-बुज़ुर्ग यह मानते थे कि सुरबग्घी का खेल न सिर्फ हमारी मानसिक शक्ति को बढ़ाने का काम करता है, बल्कि खाली समय में यह खेल मनोरंजन के अच्छे साधन की तरह काम भी करता है। पुराने समय में ग्रामीण सजावट के तौर पर सुरबग्घी को अपने घर की ज़मीन या फिर दीवारों पर बनवाते थे। इससे घर के बच्चों के साथ साथ महिलाएं भी खाली समय में यह खेल खेला करती थी।

मेरी गर्मी की छुट्टियों में चाची ने मुझे सुरबग्घी के खेल का महारथी बना दिया था। आज भी मैं जब भी गाँव जाता हूं, मैं और चाची सुरबग्घी ज़रूर खेलते हैं। चाची अब बूढ़ी हो चुकी हैं पर बरामदे के गलियारे में बनी वो सुरबग्घी की बिसात अभी भी चटक और गाढ़ी है। मानो वो मुझसे कहती है कि ....... चलो हो जाए एक और बाज़ी ........

ये भी पढ़ें- गुट्टे का खेल : याद है कौन सा खेल है ये ?

ये भी पढ़ें- वीडियो - अगर आपका बचपन किसी गाँव, कस्बे या छोटे शहर में बीता है, तो इन खेलों को आपने ज़रूर खेला होगा

ये भी पढ़ें- वीडियो : सकट चौथ पर एक बेटी का माँ के नाम ख़त (भाग-एक)

अगर आपको भी अपने बचपन का ऐसा कोई खेल याद है, तो हमें बताइए kanchan@gaonconnection.com आईडी पर।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top