अनारकली आरावाली के ‘हिरामन तिवारी’ कभी अंडे बेचा करते थे

अनारकली आरावाली के ‘हिरामन तिवारी’ कभी अंडे बेचा करते थेजॉली एलएलबी में इश्तियाक खान ने वकील की भूमिका निभाई थी।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म अनारकली आरावाली दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। स्वरा भास्कर और पंकज त्रिपाठी के अलावा एक और भी कलाकार है, जिसने अपनी ओर ध्यान खींचा है। वो अभिनेता है, जबलपुर के इश्तियाक खान। इससे पहले इश्तियाक खान ने तमाशा में अभिनय किया था।

फिल्म में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों और क्रिटिक्स की तारीफ बटोरने वाले इश्तियाक खान मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के रहने वाले हैं। बचपन में ही इश्तियाक खान के सर से पिता का साया उठ गया था। पांच भाइयों-बहनों में दूसरे नम्बर वाले इश्तियाक़ भले ही आज तारीफ पा रहे हैं, लेकिन कभी उन्होंने खर्च चलाने के लिए आम और अंडा तक बेचा है।

गरीब परिवार में जन्में इश्तियाक़ खान परिवार चलाने के लिए कभी शराब की दुकान के बाहर अंडे बेचे तो आम के दिनों में आम भी बेचे। फिल्म में हिरामन तिवारी का किरदार निभाने वाले इश्तियाक़ खान का डायलॉग 'मेरे लिए ना सही देश के लिए' युवाओं में काफी मशहूर हो रहा है। प्रस्तुत है इश्तियाक़ खान से बातचीत

सवाल- आप अपने और अपने सफर के बारे में कुछ बताइए।

जवाब- मेरा जन्म मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ। बचपन में ही मेरे पिता का इंतकाल हो गया था। हम पांच भाई-बहन थे, मैं दूसरे नम्बर पर था। मुझसे बड़ी मेरी बहन थी जिसके कारण मुझ पर परिवार का दबाव था। घर चलाने के लिए मैंने शराब की दुकान के सामने अंडे का ठेला लगाया तो आम के दिनों में आम भी बेचा।

घर में संगीत का माहौल था तो थोड़ा बहुत इसका असर मुझ पर भी था। मेरी थियेटर की शुरुआत इफ्टा से हुई। मैं ज़्यादा पढ़ा लिखा नहीं था, लेकिन इफ्टा में पढ़े लिखे लोग आते थे। वहीं से मैं पढ़ना लिखना शुरू किया और ज़िन्दगी में बहुत सारे बदलाव आए।

अनारकली आरावाली फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री स्वरा भास्कर, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा के साथ इश्तियाक खान।

इफ्टा के बाद मैं बीवी कारंत साहब के साथ थियेटर किया। भोपाल में भी कुछ दिन थियेटर करने के बाद एनएसडी पहुंच गया जहां मैं 2004 में पासआउट हुआ। इसके बाद अज्ञात, फंस गए ओबामा, फटा पोस्टर निकला हीरो और तमाशा सहित कई फिल्मों में अभिनय किया। अनुराग कश्यप के निर्देशन बने सीरियल युद्ध में मैं अमिताभ बच्च्न के साथ काम किया।

सवाल- अनारकली आरावाली में शुरुआत में आप हास्य भूमिका करते नज़र आते हैं, लेकिन अचानक से बेहद गंभीर किरदार बन जाता है?

जवाब- मैं किसी खास तरह का अभिनय नहीं कर रहा था। मैं नेचुरल रहने की कोशिश कर रहा था। बहुत से लोग नेचुरल काम करते हैं तब भी हंसी आती है। फिल्म के निर्देशक अविनाश दास मुझसे बार-बार कहते थे ‘इश्तियाक़ यह किरदार मेरी आत्मा है। इसमें नकली कुछ मत करना।‘ तो मुझे लगता था ये आदमी सबसे कुछ बोलता है और मुझसे कहता है नकली मत करना। हमारे ऊपर शक करता हैं कि हम कर पाएंगे या नहीं। अविनाश दास अपने बहुत जुड़े हुए थे। फिल्म के दौरान जब अनारकली मेरे पास से जाती है और मैं रोता हूं, उस दृश्य के शूट के दौरान मैंने देखा कैमरे के पीछे अविनाश दास फूट फूट कर रो रहे थे।

सवाल- आप मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन भोजपुरी बिलकुल सही बोला है। कैसे मुमकिन हुआ?

जवाब- अभिनेता पंकज त्रिपाठी एनएसडी के दिनों में मेरा बैचमेट रहा है। पंकज बिहार का रहने वाला है, उससे भी हमने कुछ-कुछ सीखा इसके अलावा फिल्म में जीतू नाम के असिस्टेंट डायरेक्टर हैं जो बिहार के रहने वाले हैं। उनसे हमने सभी डायलॉग डब करा लिया और उससे सीखते रहे। बिहार में शूट के दौरान भी बड़े-बुजुर्गों से बोलने का लहजा सीखा।

सवाल- अनारकली आरा वाली को जिस तरह से तारीफ मिल रही है। इस तरह की तारीफ की उम्मीद थी?

जवाब- मैंने सोचा नहीं था कि फिल्म इस तरह लोगों को पसन्द आएगी। चारों तरफ से तारीफ मिलेगी। फिल्म की सफलता को देखकर लग रहा है, कोई चमत्कार हुआ है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्वरा भास्कर और अविनाश दास फिल्म के साथ मज़बूती से खड़े रहे। अगर दोनों मज़बूती से नहीं होते तो शायद तमाम कम बजट वाली अच्छी फिल्मों की तरह यह फिल्म भी गुमनाम हो जाती।

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