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लौट रहा ऐतिहासिक फिल्मों का दौर

लखनऊ। ऐतिहासिक फिल्मों की शुरुआत हुई थी साल 1924 में बाबूराव पेंटर की ऐतिहासिक फिल्म ‘सती पद्मिनी’ से। यह फिल्म 14वीं सदी के चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी की थी, जिसकी एक झलक दिल्ली का सुलतान अलाउद्दीन खिलजी देख लेता है और उसे पाने के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण कर  देता है। खिलजी राजपूतों को तो हरा देता है। लेकिन पद्मिनी उसके हाथ आने से पहले ही जौहर कर लेती है। इस फिल्म को उस समय इंग्लैंड में बहुत दर्शक मिले। सती पद्मिनी मूक फिल्म थी। 

लेकिन, बोलती फिल्मों की शुरुआत ही ड्रामा फिल्म ‘आलमआरा’ से हुई थी। यह एक राजकुमारी की प्रेम कहानी थी। मिनर्वा मूवीटोन के मालिक और अभिनेता निर्देशक सोहराब मोदी की यह मील का पत्थर साबित हुई। सोहराब मोदी की अन्य ऐतिहासिक फिल्मों में पुकार, सिकंदर, पृथ्वी बल्लभ और झांसी की रानी उल्लेखनीय थी। 

झांसी की रानी हिंदुस्तान की पहली टैक्नीकलर फिल्म थी। वैसे, बॉलीवुड ने मुग़ल-काल पर फिल्में अधिक बनाई। अकबर, जहांगीर और शाहजहां पसंदीदा करैक्टर साबित हुए।

मुग़ल-ए-आज़म ने रचे नए आयाम

अकबर के बेटे जहांगीर की अनारकली से मोहब्बत फिल्म अनारकली और मुग़ल-ए-आज़म में हिट हुई।  अनारकली का काल्पनिक चरित्र सेल्युलाइड पर जीवंत और अमर हो गया। मुग़ल-ए-आज़म में अकबर और जोधा का टकराव बेटे जहांगीर के कारण होता था। ये फिल्म इतनी हिट हुई थी कि इसे रंगीन बनाकर एक बार फिर से रिलीज की गयी।

ऐश्वर्या और रितिक ने जोधा-अकबर की प्रेम कहानी को किया जीवंत

आशूतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी फिल्म जोधा-अकबर हिट हुई थी। फिल्म की शुरुआत एक भीषण युद्ध से होती है और इससे फिल्म की भव्यता का अंदाजा लग जाता है। इंटरनेशनल इंडियन फ़िल्म एकेडमी पुरस्कार (आइफ़ा) समारोह में भी आशुतोष गोवारीकर की फिल्म ‘जोधा अकबर’ छाई रही और उसने विभिन्न श्रेणियों में आठ पुरस्कार हासिल किए।

रजिया सुल्तान दो बार बनी

कमाल अमरोही की 1983 में रिलीज़ हेमा मालिनी, धर्मेन्द्र और परवीन बॉबी की फिल्म ‘रजिया सुल्तान’ दिल्ली की सुल्तान रजिया के जीवन पर थी। इस फिल्म में रजिया और उसके गुलाम याकूब के प्रेम को ज्यादा महत्व दिया गया था। इस फिल्म से पहले भी 1961 में  देवेन्द्र गोयल की फिल्म ‘रजिया सुलतान’ बनायी थी। फिल्म में निरुपा रॉय ने रजिया और कामरान ने याकूब की भूमिका की थी। ताजमहल की मुमताज़ महल शौहर शाहजहां द्वारा उसकी याद में बनाए गए ताज के कारण अमर हो गई। 

बाजीराव-मस्तानी एक प्रेम कहानी

संजय लीला भंसाली पिछले कई साल से बाजीराव मस्तानी बनाने की तैयारी में थे। सबसे पहले सलमान खान, ऐश्वर्या राय और रानी मुखर्जी को लेकर फिल्म बनाना चाह रहे थे, लेकिन सलमान और ऐश्वर्या के बीच के मनमुटाव होने की वजह से फिल्म बंद पड़ गयी। आखिर में उनकी खोज पूरी हुई रणवीर सिंह, दीपिका पादकोण और प्रियंका चोपड़ा पर। इस फिल्म ने सफलता के कई नए झंडे फहराए। दीपिका और रणवीर को कई पुरस्कार भी मिले।

कुछ ऐसी फिल्में जिन्हें नहीं मिले दर्शक

शाहरूख खान और करीना कपूर की फिल्म अशोका में सम्राट अशोक और राजकुमारी कौरवाकी की प्रेम कहानी को दिखाया गया। इस फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया। इसी तरह गोल्डी बहल की फिल्म द्रोण जिसमें अभिषेक बच्चन, अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा जैसे बड़े चेहरे के होने के बाद दर्शकों ने इसे पसंद नहीं किया। इस फेहरिस्त में सलमान खान की फिल्म वीर सलमान की फ्लाप फिल्मों में शामिल हो गयी। सलमान खान की ‘वीर’ की जबर्दस्त नाकामी ने तो निर्माताओं को एक और बहाना दे दिया, यह तर्क देने का कि पीरियड फिल्म यानी पुराने काल की पृष्ठभूमि पर फिल्म बनाना घाटे का सौदा है। यह अलग बात है कि ‘वीर’ का इतिहास से कोई लेना-देना नहीं था। वह काल्पनिक प्रेम कथा पर बनी फिल्म थी। 

मोहनजोदड़ो में दिखेगी सबसे पुरानी सभ्यता

आशुतोष गोवारीकर के निर्देशन में हड़प्पा सभ्यता पर आधारित ‘मोहनजोदड़ो’ फिल्म की। इस फिल्म में रितिक रोशन और पूजा हेगड़े ने काफी तैयारी की है। इस फिल्म में अभिनेता को एक किसान की भूमिका में देखा जा रहा है, जो मोहनजोदड़ो शहर से खुद के जुड़े होने के पीछे के कारण की खोज करता है।