काम के अलावा अनाथ और गरीब बच्चों के साथ समय बिताना लगता है अच्छा: मोहित मदान

काम के अलावा अनाथ और गरीब बच्चों के साथ समय बिताना लगता है अच्छा: मोहित मदानअभिनेता मोहित मदान।

लोगों को हंसाना ये अपने आप में एक बड़ी कला है। भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में लोग अपने ही काम में इतना व्यस्त रहते है कि दूसरों के बारे में कोई क्यो सोचेगा। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने बारे में तो शायद ही सोचते हैं, दूसरों को हँसाने उनकी तकलीफ़ों को कम करने में ज्यादा विश्वास करते हैं। मोहित मदान उनमें से एक हैं।

'अक्सर-2' में अपने अभिनय से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाने वाले मोहित वैसे तो बहुत ही भावुक स्वभाव के हैं। मोहित का जन्म 7 जनवरी 1988 को दिल्ली में हुआ। 13 साल की उम्र में मोहित अपने परिवार के साथ भारत से न्यूजीलैंड में जाकर बस गए। लेकिन हिंदुस्तान की मिट्टी का प्यार उन्हें हर साल भारत ले के ज़रूर आता रहा।

ये भी पढ़ें- ‘भाबी जी घर पर हैं’ के दरोगा हप्पू सिंह बोले-नुक्कड़ नाटक से लेकर फिल्मों तक काम किया

गाँव कनेक्शन से बातचीत के दौरान जब मोहित से पूछा गया की हिन्दी फिल्मों में आने के बारें में कैसे ख्याल आया इस पर मोहित ने बताया कि बचपन से मुझे लोगों को हँसाने का शौक था। इसलिए मैं बचपन से ही एक्टिंग में आना चाहता था। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अलावा मोहित ने सीए की पढ़ाई भी की है। जब मोहित को लगा की अब उन्हें बॉलीवुड की तरफ रूख करना चाहिए तब उन्होंने अपने परिवार से इस बारे में बात की।

ये भी पढ़ें- बॉलीवुड की मां ने 150 रुपए महीने से शुरू किया था फिल्मों में काम

बतौर मोहित शुरू में मम्मी पापा को समझाना थोड़ा मुश्किल था लेकिन बाद में मान गए और फिर शुरू हुआ मायानगरी का सफर। जब मोहित ने मुंबई में कदम रखा उस वक्त वो किसी को भी नहीं जानते थे लेकिन उनकी मेहनत के साथ साथ उनकी किस्मत ने भी उनका साथ दिया और 2015 में फिल्म लव एक्सचेंज में एक मराठी लड़के का किरदार निभाकर फिल्म मेकर की नज़रों में आए। उसके बाद 2017 में अनंत महादेवन की फिल्म अक्सर-2 में बच्चन सिंह का किरदार निभाया। अपने अभिनय को लेकर मोहित को लोगों से बहुत तारीफ भी मिली।

येे भी पढ़ें- लौट रहा है सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बनी फिल्मों का दौर : कश्यप

अनाथ बच्चों से भी है करीब का रिश्ता

मोहित सिर्फ अपने ही काम में व्यस्त नहीं रहते हैं इसके अलावा अनाथ और गरीब बच्चों के साथ भी ये अपना अच्छा खासा वक्त गुजारते हैं। मोहित हर महीने इन बच्चों के साथ घूमने ज़रूर जाते हैं। गाँव कनेक्शन से बात चीत में मोहित ने बताया की इन बच्चों के साथ वक्त गुजारने में उन्हें खुशी मिलती है।

ये भी पढ़ें- गोविंद नामदेव : 250 रुपए की स्कॉलरशिप के सहारे दिग्गज अभिनेता बनने की कहानी

बताया की ये काम मैं पहले से ही किया करता था जब मैं अपने ननिहाल आता था अपनी नानी के पास तब भी गाँव के बच्चों के साथ खेला करता था उससे मुझे बहुत खुशी मिलती थी और जब बड़ा हुआ तब भी आज इन बच्चों के साथ वक्त गुजरने में मुझे खुशी मिलती है।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

संबंधित खबरें- गुट्टे का खेल : याद है कौन सा खेल है ये ?

29 जून को रिलीज होगी अब संजय दत्त की बायोपिक

Tags:    mohit madan 
Share it
Top