हिन्दी फिल्मों में हमेशा छाये रहे सावन के गीत

हिन्दी फिल्मों में हमेशा छाये रहे सावन के गीतसावन का महीना प्रेमियों के दिलों में एक नई उमंग भर देता है।

प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार

सावन प्रकृति का श्रंगार है। सावन एक अहसास है। सावन का महीना प्रेमियों के दिलों में एक नई उमंग भर देता है। विवाहिता सावन लगते ही अपने माइके आ जाती है। ये महीना उन्हें अपने बचपन की यादों को ताजा करने में काफी सहायक होता है। ससुराल के कड़े नियम व अनुशासन के बाद जब विवाहिता घर आती है तो वह सारी तमीज और अनुशासन को ताक पर रख कर अपनी सहेलियों के साथ मस्ती में डूब जाती है।

इस अहसास का हिन्दी फिल्मों में खूब इस्तेमाल किया गया। चाहे राजकूपर हों या मनोज कुमार चाहे सावन कुमार सभी ने सावन पर और उसकी फुहार पर बेहतरीन गीत लिखवाए और फिल्माए। याद कीजिए फिल्म ‘जुर्माना’ (1969) का लता मंगेशकर का गाया ये गीत ‘सावन के झूले पड़े, तुम चले आओ’ आज भी सावन गीतों में नम्बर वन है।

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सावन के महीने में प्रकृति सोलह श्रंगार करके नए रूप स्वरूप में प्रकट होती है। हर ओर हरियाली ही हरियाली छायी रहती है। मन मयूर नाच उठते हैं। ऐसे में अगर कोई मीठी तान छेड़ दे तो क्या कहने। हमारी फिल्मों के निर्देशक भी इस मोह जाल से नहीं बच सके और याद कीजिए आशा पारेख और धर्मेन्द्र की जोड़ी का पर्दे पर गाया ये गीत- ‘के आया सावन झूम के...आया सावन झूम के’(फिल्म ‘आया सावन झूम के’, 1969, गायक-रफी,लता), उस जमाने के जुबली कुमार राजेन्द्र कुमार और बबीता के साथ लक्ष्मीकांत प्यारे लाल की धुन पर ‘रिमझिम के गीत सावन गाये...गाये’ (फिल्म ‘अन्जाना’ 1969, गायक-रफी-लता) आज भी जवान है।

सुनील दत्त के गायन क्लास में शिष्या नूतन की मीठी तान- ‘सावन का महीना पवन करे शोर’ (फिल्म ‘मिलन’ 1967, गायक-मुकेश व लता) जब तब होंठों को छू ही लेता है। धर्मेन्द्र और आशा पारेख की शानदार जोड़ी का पर्दे पर मखमली प्रश्नावली- ‘कुछ कहता है ये सावन’ (फिल्म ‘मेरा गांव मेरा दोस्त’ 1971, गायक-रफी,लता) बेहतरीन प्रस्तुति बन पड़ी है। नीलम और शशि कपूर पर फिल्माया गया यह गीत ‘पतझड़ सावन बसंत बहार, एक बरस में मौसम चार’ (फिल्म ‘सिंदूर’ 1987, गायिका- लता-सुरेश वाडकर) एक मर्मस्पर्शी गीत को शायद ही कोई भूल पाएगा।

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सावन का सुपर हिट गाना टिप-टिप बरसा पानी

जम्पिंग जैक जितेन्द्र और रीना राय की मशहूर जोड़ी के द्वारा पर्दे पर फिल्माया यादगार गीत ‘अब के सावन में जी डरे रिमझिम सर से पानी गिरे तन में लगे आग सी...’ (फिल्म ‘जैसे को तैसा’1973, गायक- किशोर-लता) बरसात की हर फुहार से प्रेमियों के होंठों पर आ ही जाता है। अक्षय कुमार और रवीना टण्डन पर फिल्माया गया यह गीत ‘टिप टिप बरसा पानी सावन में आग लगाये’ (फिल्म ‘मोहरा’ 1994, गायक- उदित नारायण-अलका याज्ञनिक) आज भी काफी बोल्ड व सेक्सी नृत्य के लिए याद किया जाता है। गायक मीका का नान फिल्मी अलबम ‘सावन में लग गयी आग, दिल मेरा हाय’ संगीतकार अनु मलिक ने धुन तैयार की, आज मी उतना ही पापुलर है।

फिल्मों के नाम भी सावन पर

60-70 के दशक में जब गाँव की पृष्ठभूमि पर फिल्में ज्यादा बनती थीं तब सावन के गीत भी उनमें होली गीत की तरह ही डाले जाते थे। बहुत सी फिल्मों के नाम तक सावन से जुड़े रखे जाते थे। ‘आया सावन झूम के’ (1969) निर्देशक- रघुनाथ झालानी, ‘सावन को आने दो’ (1979) निर्देशक -कनक मिश्रा, ‘प्यासा सावन’ (1981) निर्देशक-दासानी नारायण राव, ‘सोलहवां सावन’ (1979) निर्देशक- पी. भारतीराजा, ‘सावन की घटा’ (1966) निर्देशक-शक्ति सामंत, ‘सावन भादो’ (1970) निर्देशक- मोहन सहगल।

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सावन के गीत

  • ‘पड़ गये झूले सावन ऋतु आई रे’ (फिल्म ‘बहु बेगम’(1967) गायिका- लता व आशा भोंसले)।
  • 1960 की फिल्म ‘बरसात की रात’(गायिका लता व कमल बारोट) का गीत ‘गरजत बरसत सावन आयो रे’ शास्त्रीय संगीत पर आधारित था, डांस नम्बर के लिए बेहद मकबूल हुआ था।
  • ‘अब के सजन सावन में आग लगेगी बदन में’ (फिल्म ‘चुपके चुपके’1975, गायिका- लता) यह गीत सभी विरहिन नायिका पर फिट बैठता है चाहे वह प्रेमी को याद कर रही हो या पति को।
  • ‘तेरी दो टकियां दी नौकरी मेरा लाखों का सावन जाए’ (फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’1974, गायिका- लता)।
  • ‘सावन आया बादल आये मोरे पिया नहीं आए’ (फिल्म ‘जान हाजिर है’ (1975) गायिका-दिलजीत कौर)।
  • ‘तुझे गीतों में ढालूंगा, सावन को आने दो’ (फिल्म ‘सावन को आने दो’, 1979, गायक-जसपाल सिंह)।
  • ‘रिमझिम गिरे सावन, सुलग-सुलग जाए मन’(फिल्म ‘मंजिल’ 1979, गायक-किशोर कुमार)।
  • ‘लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है’ (फिल्म ‘चांदनी’1989, गायक- सुरेश वाडकर, अनुपमा देशपाण्डेय)।

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