अक्षय कुमार की वे फिल्में जिन्होंने अनकही बातों को आम कर दिया

अक्षय कुमार की वे फिल्में जिन्होंने अनकही बातों को आम कर दियाअक्षय कुमार

पिछले कुछ समय से खिलाड़ी कुमार कहे जाने वाले अक्षय कुमार अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलकर कुछ ऐसे सामाजिक मुद्दों पर फिल्में कर रहे हैं जिनके बारे में अक्सर कोई बात नहीं करता। कर्मशियल सिनेमा से हटकर कुछ अलग करने में रिस्क भी होता है लेकिन अक्षय की इन फिल्मों को दर्शकों का पूरा साथ मिल रहा है। हाल ही में उनकी फिल्म 'पैडमैन' का ट्रेलर लॉन्च हुआ है। ये फिल्म भी एक ऐसे मुद्दे पर बनी है जिसके बारे में लोग खुलकर बात करने से हिचकिचाते हैं लेकिन फिल्म के ट्रेलर की हर कोई सराहना कर रहा है।

चाहे वो फिल्म 'ओएमजी' में अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ना हो या फिल्म 'टायलेट : एक प्रेम कथा' में शौचालय बनवाने के लिए लड़ना हो अक्षय ने हर फिल्म में अभिनय क्षमता के साथ एक अच्छे मैसेज को भी दर्शकों तक पहुंचाया है। हम आपको बताते हैं अक्षय कुमार की कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में जिनमें उन्होंने समाज को एक नई दिशा देने की कोशिश की है...

ओएमजी (2012)

फिल्म 'ओएमजी' (ओह माई गॉड) ऐसी फिल्म है जो अंधविश्वास को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ बोलती है। निर्देशक उमेश शुक्ला की इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे लोग धर्म, जाति, भगवान के नाम पर दूसरों को पागल बनाकर अपनी मतलब सीधा करते हैं। अक्षय कुमार ने इस फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाया है जो परेश रावल को सही राह दिखाने में मदद करते हैं। इस फिल्म का हालांकि बहुत से लोगों ने विरोध किया लेकिन इसे पसंद करने वालों की संख्या ज़्यादा रही और टिकट खिड़की पर भी इसने अच्छा बिजनेस किया।

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गब्बर इज़ बैक (2015)

निर्देशक कृष की फिल्म 'गब्बर इज बैक' में अक्षय कुमार ने एक ऐसे आम व्यक्ति की भूमिका निभाई है जिसकी ज़िंदगी उसके परिवार के इर्दगिर्द ही घूमती है। एक शख़्स जो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता है और अपने आने वाले बच्चे का इंतजार कर रहा है लेकिन कुछ लेकिन कुछ गुंडों और नेताओं की वजह से बीवी की मौत हो जाती है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ग़रीब आदमी बड़े अस्पतालों में इलाज़ कराने में कैसे बर्बाद हो जाता है। एक डॉक्टर कैसे एक मृत व्यक्ति का इलाज़ केवल पैसे कमाने के लिए कर रहा है। इस पूरी फिल्म में अक्षय कुमार सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते नज़र आते हैं।

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टॉयलेट : एक प्रेम कथा (2017)

निर्देशक श्री नारायण सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ट्वॉयलेट एक प्रेम कथा में अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर ने बेहतरीन सामाजिक मुद्दा उठाया। भारत के कई गाँवों और यहां तक कि शहरों के कुछ घरों में भी शौचालय नहीं हैं। इनमें से कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी खुले में शौच जाने की आदत हो चुकी है और वे जानबूझकर अपने घरों में शौचालय नहीं बनवाते हैं। अक्षय कुमार ने इस फिल्म में खुले में शौच से होने वाली सभी समस्याओं को उठाते हुए बात की है। उनकी ये बात लोगों के दिलों तक पहुंची और फिल्म ने काफी चली।

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पैडमैन (2017)

निर्देशक आर बाल्की की आने वाली फिल्म 'पैडमैन' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस फिल्म के कॉन्सेप्ट ने एक बार फिर लोगों को मौका दिया है कि वे 'पीरियड्स' यानि माहवारी के बारे में बात कर रहे हैं। अक्षय कुमार, सोनम कपूर, राधिका आप्टे की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म ट्विंकल खन्ना की किताब 'द लीजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद' पर बनी है। ट्विंकल की इस किताब में तमिलनाडु के सामाजिक कार्यकर्ता अरुणाचलम मुरुगनाथम की ज़िंदगी पर बनी है। तमिलनाडु के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कम लागत वाली सैनिटरी नैपकिन मशीन बनाकर ग्रामीण भारत में मासिक धर्म की स्वच्छता की अवधारणा में क्रांतिकारी बदलाव किया। फिल्म 26 जनवरी, 2018 को रिलीज होगी।

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