‘पद्मावती’ की कहानी सलीम अनारकली जितनी नकली, इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं : जावेद अख्तर  

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   11 Nov 2017 3:14 PM GMT

‘पद्मावती’ की कहानी सलीम अनारकली जितनी नकली, इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं : जावेद अख्तर  जावेद अख्तर लेखक कवि व राज्यसभा के पूर्व सदस्य।

नई दिल्ली (आईएएनएस)। मशहूर गीतकार और शायर जावेद अख्तर 'पद्मावती' की कहानी को ऐतिहासिक नहीं मानते। उन्होंने कहा कि इसकी कहानी उतनी ही नकली है, जितनी सलीम अनारकली की। इसका इतिहास में कहीं भी उल्लेख नहीं है।

उन्होंने सलाह दी है कि अगर लोगों को वाकई इतिहास में अधिक रुचि ही है, तो इन फिल्मों की बजाए गंभीर किताबों से समझाना चाहिए। जावेद साहब ने साहित्य 'आज तक' के लंबे सेशन में ये बातें कहीं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं इतिहासकार तो हूं नहीं, मैं तो जो मान्य इतिहासकार हैं उनको पढ़कर आपको ये बात बता सकता हूं।"

एक टीवी डिबेट का हवाला देते हुए जावेद अख्तर ने कहा, "टीवी पर इतिहास के एक प्रोफेसर को सुन रहा था। वो बता रहे थे कि 'पद्मावती' की रचना और अलाउद्दीन खिलजी के समय में काफी फर्क था। जायसी ने जिस वक्त इसे लिखा और खिलजी के शासनकाल में करीब 200 से 250 साल का फर्क था। इतने साल में जब तक कि जायसी ने पद्मावती नहीं लिखी, कहीं रानी पद्मावती का जिक्र ही नहीं है।"

जावेद अख्तर ने कहा, 'उस दौर (अलाउद्दीन के) में इतिहास बहुत लिखा गया। उस जमाने के सारे रिकॉर्ड भी मौजूद हैं, लेकिन कहीं पद्मावती का नाम नहीं है। अब मिसाल के तौर पर जोधा-अकबर पिक्चर बन गई। जोधाबाई 'मुगल-ए-आजम' में भी थीं। तथ्य है कि जोधाबाई, अकबर की पत्नी नहीं थी, अब वो किस्सा मशहूर हो गया। मगर हकीकत में अकबर की पत्नी का नाम जोधाबाई नहीं था, कहानियां बन जाती हैं उसमें क्या है।'

मनोरंजन से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

नई पीढ़ी को इतिहास की सलाह देते हुए जावेद साहब ने कहा, "फिल्मों को इतिहास मत समझिए और इतिहास को भी फिल्म से मत समझिए। हां, आप गौर से फिल्में देखिए और आनंद लीजिए, इतिहास में रुचि है, तो गंभीरता से इतिहास पढ़िए, तमाम इतिहासकार हैं उन्हें आप पढ़ सकते हैं।"

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top