न एंबुलेंस, न सेफ्टी बेल्ट्स, जान की बाज़ी लगाकर फिल्मों के लिए काम करते हैं मजदूर, यूनियन ने उठाई आवाज

न एंबुलेंस, न सेफ्टी बेल्ट्स, जान की बाज़ी लगाकर फिल्मों के लिए काम करते हैं मजदूर, यूनियन ने उठाई आवाजफिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मजदूर यूनियन के सदस्यों ने सभी फिल्म निर्माताओं से सेट पर एंबुलेंस के लिए मांग रखी है । फोटो: प्रतीकात्मक

लखनऊ। पर्दे पर जब फिल्म रिलीज होती है तो मुख्य कलाकारों, निर्देशक व प्रोड्यूसर की ही ज्यादा चर्चा होती है। पर्दे के पीछे तनावपूर्ण स्थिति में घंटों में काम करने वाले फिल्म यूनिट के तमाम सदस्य, महंगे व खूबसूरत सेट को तराशने वाले वर्कर व टेक्नीशियन की मेहनत नज़रअंदाज हो जाती है। इन मजदूरों के लिए न ही आठ घंटे की ड्यूटी होती है और न ही इनकी कोई सोशल लाइफ होती है।

न सिर्फ काम की मेहनत बल्कि शूटिंग के दौरान मजदूरों व छोटे कलाकारों की सुरक्षा को भी दरकिनार किया जाता है। इस वजह से शूटिंग के दौरान सेट पर हादसे होते रहते हैं। इससे कई बार तो मजदूरों या क्रू मेंबर की जान तक चली जाती है। वर्कर नौकरी से हटा दिए जाने के डर से अपनी जान को दांव पर लगा देते हैं।

हाल ही में करोड़ों की लागत में बन रही संजय लीला भंसाली की फिल्म मल्टीस्टारर फिल्म पद्मावती की शूटिंग के दौरान ऊंचाई से गिरकर एक पेंटर की मृत्यु हो गई। मुंबई स्थित फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मजदूर यूनियन के सदस्यों ने बताया कि फिल्म सेट पर एंबुलेंस की सुविधा न होने से मजदूरों को तत्काल चिकित्सा नहीं मिल पाती है।

एसोसियेशन ने फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को पीड़ित परिवार को मुआवजा देने को भी कहा जिस पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई। इसके बाद एसोसियेशन ने सभी फिल्म प्रोड्यूसरों को पत्र लिखकर अपनी मांगें जाहिर कर पूरा करने की सिफारिश की।

एसोसियेशन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वर श्रीवास्तव ने बताया कि फिल्म सेट्स, खासकर फिल्म सिटी में शूटिंग के दौरान एक भी एंबुलेंस नहीं रहती। अगर किसी के साथ हादसा होता है तो उसे तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता है जिसकी वजह से कीमती ज़िंदगियां मौत के मुंह में चली जाती हैं। जब कोई बड़ा कलाकार शूटिंग करता है तब ही एंबुलेंस सेट पर होती है।

सेट पर हो एंबुलेंस और सेफ्टी बेल्ट्स की सुविधा

गंगेश्वर आगे बताते हैं कि हमने 26 दिसंबर को सभी फिल्म प्रोड्यूसरों को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी हैं। इसके अनुसार फिल्म सिटी में होने वाली किसी भी तरह की शूटिंग के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए। साथ ही ऊंचाई पर राम करने वाले मजदूरों के लिए सेफ्टी बेल्ट मुहैया कराया जाए।

फिल्म सेट्स, खासकर फिल्म सिटी में शूटिंग के दौरान एक भी एंबुलेंस नहीं रहती। अगर किसी के साथ हादसा होता है तो उसे तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता है जिसकी वजह से कीमती ज़िंदगियां मौत के मुंह में चली जाती हैं। जब कोई बड़ा कलाकार शूटिंग करता है तब ही एंबुलेंस सेट पर होती है।
गंगेश्वर श्रीवास्तव, जनरल सेक्रेटरी, फिल्म स्टूडियोज सेटिंग एंड एलाइड मजदूर यूनियन

फिल्म सिटी मेें शूटिंग का बहिष्कार करेंगे

हालांकि अभी तक उन्हें इस लेटर का कोई जवाब नहीं मिला है। इस बारे में गंगेश्वर का कहना है कि वह 26 जनवरी को फिर से इस पर प्रोड्यूसर्स से बात करेंगे और अगर सिफारिश नहीं मानी गई तो फिल्म सिटी में शूटिंग के लिए हम बहिष्कार करेंगे।

दो स्टंटमैन की हो गई थी मौत

पिछले साल नवंबर में एक कन्नड़ की फिल्म की शूटिंग के दौरान एक हादसे में दो स्टंट मैन की मौत हो गई थी। बताया गया कि फिल्म 'मस्थीगुड़ी' के क्लाईमेक्स सीन की शूटिंग बेंगलुरू के पास थिप्पागोंडनहल्ली झील पर हो रही थी। इसी के लिए हेलिकॉप्टर से स्टंट सीन शूट किए जा रहे थे। सीन के मुताबिक स्टंट्स मैन को हेलीकॉप्टर की मदद से झील में कूदना था। इस दौरान दोनों स्टंटमैन झील की तेज लहरों में बह गए थे।

हालात ये हैं बड़ी फिल्मों में भी इस तरह के हादसे होते रहते हैं। पद्मवती के अलावा रईस और मधुर भंडारकर के सेट पर इस तरह की अनहोनी हो चुकी है।

‘पद्मावती’ की शूटिंग के दौरान पेंटर की मौत

हाल ही में 23 दिसंबर को संजयलीला भंसाली की आगामी फिल्म पद्मावती की शूटिंग के दौरान मुकेश ढाकिया नाम के एक पेंटर की ऊंचाई से गिरकर मौत हो गई। वह फिल्म सिटी में सेट के निर्माण का काम कर रहे थे। बताया गया कि वह पांच फीट की ऊंचाई से गिरे थे। इसके बाद कोकिलाबेन अस्पताल में उनकी मृत्यु घोषित कर दी गई।

भर्ती होने पर तीन महीनों केे लिए बिना नौकरी के

शाहरुख खान की आने वाली फिल्म रईस की शूटिंग के दौरान एक वर्कर धर्मेंद्र प्रजापति को ऊंचाई से गिरने की वजह से काफी चोटें आईं। वह अपनी स्थिति के कारण अगले तीन महीनों के लिए नौकरी से हटा दिए गए हैं।

देवदास के सेट पर भी हुआ था हादसा

न सिर्फ पद्मवती बल्कि संजय लीला भंसाली की सुपरहिट फिल्म देवदास की शूटिंग के दौरान भी ऐसा ही कुछ हादसा हुआ था। गोरेगाँव के फिल्मिस्तान में एक लाइटमैन सुभाष एस मुरकर 35 फीट की ऊंचाई से गिर गए थे। जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया उनकी मृत्यु हो गई थी।

पैर स्लिप होने से कांच के टुकड़ों पर गिर गया था स्टंटमैन

फिल्म शूटआउट एट वडाला की शूटिंग के दौरान अमीन नाम के स्टंटमैन को शूटिंग के दौरान तीसरे फ्लोर से गाड़ी पर कूदना था। पैर स्लिप होने की वजह से वह ज़मीन पर गिर गए जहां कांच के टुकड़े बिखरे पड़े थे। इससे उनके सिर पर काफी गहरी चोट आ गई थी। फिल्म के लीड एक्टर विवेक ओबेरॉय ने गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया।

मजदूरों को नही‍ं मिलती ज़रूरी सुविधाएं

ओपेंदर छनाना की किताब द मिसिंग 3 इन बॉलीवुड सेफ्टी, सिक्योरिटी व शेल्टर में जुड़े कई ऐसे पहलू उजागर किए गए हैं जो इन मजदूरों व टेक्नीशियन को दयनीय हालत को बताते हैं। किताब के अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे मजदूर जैसे लाइटमैन, बढ़ई वगैरह मासिक वेतन के आधार पर रखे जरूर जाते हैं लेकिन ये आठ घंटे की शिफ्ट, जरूरी वीक ऑफ, प्रोविडेंट फंड वगैरह की सुविधा से मोहताज होते हैं। उनकी कोई सोशल लाइफ भी नहीं होती बस स्टूडियो की चारदीवारी में पूरा दिन काट देते हैं।

ग्रुप इंश्योरेंस अनिवार्य होने का हुआ था समझौता

फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इंपलॉयज व प्रोड्यूसर्स बॉडी के बीच एक समझौता हुआ था जिसके अनुसार, ग्रुप इंश्योरेंस को अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा किसी मजदूर या टेक्नीशियन की मृत्यु होने पर उसके परिवार को मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

सबसे ज्यादा हादसे ऊंचाई से गिरने से

किताब के अनुसार मुंबई की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट लाइटमैन के ऊंचाई से गिरने की वजह से होते हैं। इसकी वजह लंबे समय तक काम करने से थकान होना है। इसके अलावा सेट पर पहले से इस तरह की घटना रोकने के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते हैं।

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