परवीन बॉबी: कामयाबी, प्यार और फिर मौत का सफर

ये कहानी है एक लड़की की, जो आत्मनिर्भर है, बोल्ड है, खूबसूरत है और ज़िन्दगी जीना जानती है।

फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच रहने वाली परवीन बॉबी अपनी असल ज़िन्दगी में किन अंधेरों से गुज़री, शायद ही कोई समझ पाए।

ये कहानी है एक लड़की की, जो आत्मनिर्भर है, बोल्ड है, खूबसूरत है और ज़िन्दगी जीना जानती है।

एक मौका जो उसे किस्मत ने दिया और जिसके बाद परवीन ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। फिल्मकार बीआर इशारा की नज़र जब स्टाइल में सिगरेट का कश लगाती परवीन बॉबी पर पड़ी तो उन्होंने परवीन को अभिनेत्री बनाने का सोच लिया। जब सिनेमाई पर्दे पर लड़कियों के सलवार सूट और साड़ी पहनने का चलन था, तब निर्देशक बीआर इशारा ने पहली बार क्रिकेटर सलीम दुर्रानी के साथ 1973 में फ़िल्म 'चरित्र' में परवीन को मौका दिया। फ़िल्म फ़्लॉप हो गई, लेकिन परवीन की किस्मत चमक गई।

परवीन को 1974 में आई 'मजबूर' फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के साथ कामयाबी मिली। इसके बाद इनकी साथ में 'दीवार', 'अमर अकबर एंथनी', 'शान' और 'कालिया' जैसी फ़िल्में आईं। 1976 में परवीन बाबी को प्रतिष्ठित मैग्ज़ीन टाइम ने अपने कवर पर छापा।

फिल्मी कैरियर

फिल्मी कैरियर में परवीन बॉबी को कई प्यार भी हुआ। इसमें डैनी, कबीर बेदी और महेश भट्ट उनके प्रेमी रहे। हालांकि परवीन ज़िन्दगी भर आजीवन रहीं। महेश भट्ट ने एक बार अपने एक इंटरव्यू में परवीन बॉबी से अपने रिश्तों के बारे में बताया था।

जब परवीन पड़ीं प्यार में

महेश और परवीन की प्रेम कहानी किसी हिंदी फिल्म की सच्चे प्यार वाली कहानी जैसी लगती है। ये सब शुरू हुआ साल 1977 में। उस समय परवीन 'अमर अकबर एंथोनी' और 'काला पत्थर' फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। उन दिनों महेश भट्ट और परवीन बॉबी के रिश्ते गहरे हुए। लेकिन महेश उस वक़्त शादीशुदा थे। इसके बावजूद वो परवीन बॉबी के साथ लिव इन रिलेशन में रहने के लिए तैयार हो गए।

साल 1979 महेश और परवीन की प्रेम कहानी में एक अलग ही मोड़ लाने वाला था। एक दिन महेश ने देखा की परवीन बॉबी अपने घर में फिल्मी कास्ट्यूम में हैं और एक कोने में बैठी हैं। उनके हाथ में रसोई का चाक़ू है और वे कह रही हैं कि कुछ मत कहो, कमरा खटमल से भरा है और वो मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद ऐसी घटनाएं बार बार होने लगीं। इलाज कराने पर पता चला कि परवीन बॉबी को पेरानाइड स्किट्सफ्रीनीअ डिसआर्डर हो गया है।

हालांकि परवीन बाबी ने ख़ुद को कभी इस बीमारी का शिकार नहीं बताया। उन्होंने ये ज़रूर माना था कि आनुवांशिक मानसिक बीमारी ने उन्हें चपेट में ले लिया था।

फ़िल्मी करियर और प्यार के बाद ज़िन्दगी का एक नया सफर

महेश भट्ट से मिलने के बाद परवीन बाबी अध्यात्मिक गुरु यूजी कृष्णमूर्ति से मिली और उनके कहने पर ही 1983 में परवीन बाबी ने बॉलीवुड को छोड़ दिया।

जिसके बाद थोड़े टाइम के लिए वो बैंगलोर में रहीं और उसके बाद अमरीका चली गईं। अमरीका में भी उनकी मानसिक बीमारी का उन्हें कोई इलाज नहीं मिला। अपनी बीमारी के दौरान ही उन्होंने अमिताभ बच्चन और साथ ही कई नामचीन लोगों से अपनी जान को ख़तरा बताया था।

जब ज़िन्दगी में नहीं रह गया कुछ अपना सा

अंतिम दिनों में वो बॉलीवुड से बहुत दूर हो चुकी थीं, मानो परवीन बाबी को उनके आख़िरी दिनों में सबने भुला दिया था। एक कामयाब ज़िन्दगी, खूबसूरती खूब सारा पैसा भी उन्हें शायद कभी वो सब नहीं दे पाया जो वो हमेशा से चाहती थीं। अधूरी ख्वाइशों के साथ परवीन ये जहां छोड़ गईं।

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