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सिर पर सात से आठ मटके सजाकर किया जाता है ये नृत्य, जानें इससे जुड़ी अन्य खास बातें

लखनऊ। भंवाई अथवा भवई नृत्य राजस्थान के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में से एक है। यह नृत्य अपनी चमत्कारिता के लिए प्रसिद्ध है। इस नृत्य में अलग-अलग तरीके से शारीरिक करतब दिखाने पर अधिक बल दिया जाता है।

भंवाई नृत्य राजस्थान के उदयपुर संभाग में सबसे ज्यादा प्रचलित है। इस नृत्य में घूँघट किये हुए नर्तकियां मुख्य भूमिका निभाती हैं। नर्तकियां सात अथवा आठ तांबे के घड़े सिर पर रखकर व उनका संतुलन रखते हुए नृत्य करती हैं। भंवाई नृत्य करने वाली नृत्यांगनाएं किसी गिलास के ऊपर अथवा तलवार की धार पर अपने पैर के तलुओं को टिकाकर झूलते हुए नृत्य करती हैं।

सात से आठ मटके सिर पर रखे जाते हैं

अनूठी नृत्य अदायगी, शरीरिक क्रियाओं के अद्भुत चमत्कार व लयकारी की विविधता इसकी मुख्य विशेषताएं हैं। यह नृत्य तेज लय के साथ सिर पर सात-आठ मटके रखकर किया जाता है। नृत्य के दौरान जमीन पर पड़ा रूमाल मुहं से उठाना, तलवार की धार, कांच के टुकड़ों पर और नुकीली कीलों पर नृत्य करना, इस नृत्य की अनोखी विशेषताएं हैं। नृत्य करने वाली महिलाओं को बहुत अभ्यास की जरूरत है।

भवई नृत्य कब किया जाता है

कई अवसरों पर भवई नृत्य किया जाता है। त्योहारों और विवाहों में भी भव्य नृत्य प्रदर्शन देखा जा सकता है। इस लोकनृत्य को गायब होने से बचाने के लिए गैर सरकारी संगठन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस कलात्मक लोक नृत्य को भारत के विभिन्न हिस्सों में और विदेशों में भी बढ़ावा दिया जा रहा है। अपनी खासियत व करतबों के कारण ये विदेशों में भी कैतूहल का एक विषय है।

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