कुछ लोग निजी फायदे के लिए समाज को बांट रहे: अजय देवगन

कुछ लोग निजी फायदे के लिए समाज को बांट रहे: अजय देवगनअजय देवगन, अभिनेता

रीतू तोमर

नई दिल्ली (आईएएनएस)। भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी तनाव बढ़ता है तो उसकी गाज सबसे पहले कलाकारों पर ही गिरती है। उरी हमले के बाद देश में पाकिस्तानी कलाकारों के काम करने पर लगे प्रतिबंध पर सिने जगत दो धड़ों में बंटा नजर आया था, लेकिन अभिनेता अजय देवगन इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री दो फाड़ नहीं हुई है। देश में कुछ लोग ऐसे हैं जो अपने फायदे के लिए समाज को बांटने में लगे रहते हैं, लेकिन कलाकारों को किसी तरह की बेड़ी में नहीं बांधा जा सकता।

उन्होंने कहा, ''मैं पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ नहीं हूं लेकिन मेरे लिए मेरा देश सबसे पहले है। अजय की फिल्म 'शिवाय' करन जौहर की 'ऐ दिल है मुश्किल' के साथ रिलीज हो रही है, लेकिन वह अपनी फिल्म की अन्य फिल्म से तुलना पसंद नहीं करते।'' दिवाली पर दर्शकों को 'शिवाय' का तोहफा देने जा रहे अजय ने फिल्म से जुड़े विवादों पर विस्तार से बात की। फिल्म में उनके किरदार के भगवान शिव के साथ संबंध पर वह कहते हैं, ''फिल्म में मेरा नाम शिवाय है। यह नाम भगवान शिव से मिलता-जुलता है लेकिन यह कोई पौराणिक फिल्म नहीं है। शिव के कई गुण शिवाय के भीतर हैं और मेरा मानना यह है कि हर शख्स के भीतर शिव के कुछ गुण जरूर होते हैं।''

वह आगे कहते हैं, ''शिव ही एक ऐसे भगवान हैं जिनका व्यवहार मनुष्यों से अधिक मिलता-जुलता है। वह गुस्सा भी होते हैं, भांग भी पीते हैं। सर्वनाश भी करते हैं और फिर सब ठीक भी करते हैं।'' अमूमन, फिल्म के ट्रेलर को देखकर कहानी का अंदाजा लगा लिया जाता है लेकिन 'शिवाय' का ट्रेलर काफी रोचक है और इससे फिल्म की कहानी का पता लगाना बहुत मुश्किल लग रहा है। इसका जवाब देते हुए वह कहते हैं, ''मैंने जानबूझकर फिल्म का ट्रेलर इस तरह से तैयार किया है ताकि दर्शकों में उत्सुकता बनी रही। इसे जानबूझकर रहस्यमयी बनाया गया है।''

फिल्म के पहले शो की कमाई उरी शहीदों को समर्पित करने के सवाल पर वह स्पष्टीकरण देते हुए कहते हैं, ''मैं आपको बता दूं कि यह मेरा फैसला नहीं था। थिएटर एसोसिएशन ने यह फैसला लिया था और वे मेरे पास इस प्रस्ताव से जुड़ने के लिए आए थे जिसका मैंने समर्थन किया था। हालांकि, अभी इस फैसले पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है लेकिन जो भी फैसला होगा मैं उससे जुड़ने के लिए तैयार हूं।'' पाकिस्तानी कलाकारों के देश में काम करने के खिलाफ खड़े हुए अजय की फिल्म में कई विदेशी चेहरे हैं। इसके जवाब में वह कहते हैं, ''यह मेरी फिल्म की कहानी की मांग थी। स्क्रिप्ट के मुताबिक हमें विदेशी किरदार चाहिए थे जिन्हें लिया गया। मैं कलाकारों में भेदभाव नहीं करता। कलाकार, कलाकार ही होता है फिर चाहे वह किसी भी देश का क्यों न हो।''

साल 2011 में अजय की फिल्म 'सन ऑफ सरदार' और शाहरुख की 'जब तक है जान' एक ही दिन रिलीज हुई थी और तब स्क्रीन की संख्या को लेकर काफी विवाद भी हुआ था। ठीक ऐसी ही स्थिति 2016 में भी है। अजय की फिल्म 'शिवाय', करन जौहर की 'ऐ दिल है मुश्किल' के साथ रिलीज हो रही है। यह पूछने पर कि इन दोनों स्थितियों में कितना अंतर है और क्या इस बार भी स्क्रीन को लेकर कोई विवाद है। अजय कहते हैं, ''देखिए, मैं गड़े मुर्दे नहीं उखाड़ता। हम फिल्में विवाद पैदा करने के लिए नहीं बनाते हैं और जब विवाद होते हैं तो बहुत दुख होता है। मुझे नहीं लगता कि इन सब चीजों का सुबह नौ, 10 और 11 बजे के शो पर असर पड़ता है तीन बजे के बाद फिल्म बोलती है।''

वह 'शिवाय' की 'ऐ दिल है मुश्किल' से तुलना के सवाल पर कहते हैं, ''मैंने कड़ी मेहनत से फिल्म बनाई है तो मैं किसी और फिल्म के साथ इसकी तुलना क्यों करूं।'' फिल्म की कहानी के बारे में पूछने पर अजय कहते हैं, ''शिवाय की कहानी मेरे दिमाग में बहुत पहले से थी और मुझे लगता है कि इसे मेरे अलावा कोई और बेहतर नहीं बना सकता था। यह फिल्म पिता और बेटी के रिश्ते पर आधारित है। दोनों बहुत अच्छे दोस्त भी हैं।''

यह पूछने पर कि युवाओं में 'ऐ दिल है मुश्किल' के क्रेज को देखते हुए शिवाय दर्शकों को अपनी ओर कितना खींच पाएगी। इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि हर फिल्म का एक दर्शक वर्ग होता है। यह फिल्म भावनाओं से जुड़ी हुई है। भारतीय तो वैसे भी काफी भावुक होते हैं तो मुझे कोई चिंता नहीं है क्योंकि फिल्म की कहानी बहुत दमदार है।'' भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी संबंध तनावग्रस्त होते हैं तो सबसे पहले गाज कलाकारों पर ही क्यों गिरती है। इस सवाल के जवाब में अजय कहते हैं, ''कलाकार खुद तो अपने पर गाज नहीं गिराते। कुछ लोग हैं जो अपने फायदे के लिए समाज को बांटकर रखना पसंद करते हैं।''

फिल्म की शूटिंग हिमालयी क्षेत्रों और बुल्गारिया में हुई है। अजय कहते हैं, ''वहां इतनी ठंड है कि खड़े होना ही मुश्किल है। -20 डिग्री और -25 डिग्री सेल्सियस तापमान में डायलॉग नहीं बोले जा रहे थे लेकिन फिर भी हमने शूटिंग पूरी की। लगभग डेढ़ साल में फिल्म बनकर तैयार हुई है।'' वह आगे कहते हैं, ''यह बेहद भावनात्मक फिल्म है। इस फिल्म का हर दृश्य भावुक है जो आपको अंदर से झकझोर देगा।''

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