पद्मावती जैसे ऐतिहासिक विषयों पर स्क्रीन प्ले लिखने के लिए बहुत दम चाहिए- पीयूष मिश्रा

Basant KumarBasant Kumar   21 March 2017 8:41 PM GMT

पद्मावती जैसे ऐतिहासिक विषयों पर स्क्रीन प्ले लिखने के लिए बहुत दम चाहिए- पीयूष मिश्राजाने-माने एक्टर, कवि और गीतकार हैं पीयूष मिश्रा।

नई दिल्ली। बहुत कम ही कलाकार होते हैं, जिनके अंदर गायक, लेखक, पटकथा लेखक, गीतकार, संगीतकार और अभिनय जैसे हुनर हों, ऐसी ही बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार हैं, पीयूष मिश्रा। इन्होंने 'एक बगल में रोटियां’ और हुस्ना जैसे गीतों से लोगों के दिलों पर राज किया तो पिंक फिल्म में निभाए नकारात्मक किरादार से इनदिनों चर्चा में हैं।

पिंक फिल्म के बाद लड़कियों ने पीयूष मिश्रा को मैसेज किया ‘सर अगर आप पियूष मिश्रा नहीं होते तो हम आपको मार देते।’ पीयूष मिश्रा से बसंत कुमार की बातचीत-

सवाल- आप गायक, स्क्रिप्ट राइटर, गीतकार, संगीतकार और अभिनय सभी काम बेहतरीन तरीके से करते हैं। आपको कौन सा काम करने में मजा आता है?

जवाब- मुझे अपने सारे काम बहुत पसंद हैं, जिस काम में मुझे ज्यादा सबसे ज्यादा पैसा मिलता है, मैं वहीं काम करता हूं। मैं उसी काम को करता हूं, जिसमें मेरा पेट भी भर जाए और ढ़ंग से जीने का मौका भी मिले। आजकल मुझे स्क्रिप्ट लिखने के लिए ज्यादा पैसे मिल रहे हैं, तो मैं उसपर काम कर रहा हूं।

सवाल- हिंदी फिल्मों की ज्यादातर स्क्रिप्ट थोड़े से बदलाव के बाद दोहराए जाते हैं?

जवाब- ऐसा नहीं है, सालों अन्तराल के बाद हिंदी सिनेमा का अच्छा दौर शुरू हुआ है। अनुराग कश्यप, इम्तियाज अली, विशाल भरद्वाज और राजकुमार हिरानी जैसे निर्देशक लाजवाब स्क्रिप्ट के साथ फ़िल्में बना रहे हैं। 1980-90 के पहले अच्छी फ़िल्में बनती थी, उसके बाद एक अन्तराल के बाद अब मजेदार फ़िल्में बन रही हैं।

सवाल- ‘जिस कवि की कल्पना में ज़िन्दगी हो प्रेम गीत उस कवि को आज तुम नकार दो’ गीत लिखने के पीछे क्या विचार था?

जवाब- 1857 की लड़ाई चल रही थी और तब लोग प्रेम कर रहे थे और कबूतर उड़ा रहे थे। तब क्रान्ति चल रही थी और लोग प्रेम में मशगूल थे। इससे बदलाव होगा क्या? जिस वक़्त जो चल रहा है और आपमें बदलाव की चाहत है तो प्रेम से इतर भी कुछ करना होगा। ज़िन्दगी के लिए प्रेम ज़रूरी है, लेकिन प्रेम में डूबे रहना ज़रूरी नहीं होता है। यह गीत सिर्फ तब के लिए नहीं था। यह गीत आज के लिए भी है। ज़िन्दगी में प्रेम के अलावा भी कई काम है।

सवाल- एनएसडी पर आजकल बहुत-सारे आरोप लग रहे हैं? दलित थियेटर और ब्राह्मणवादी थियेटर को लेकर विवाद चल रहा है।

जवाब- एनएसडी बहुत प्यारा संस्थान है। मैं एनएसडी के खिलाफ नहीं सुन सकता हूं। मैं एनएसडी को लेकर बायस्ड हूं। जब मैं वहां आया था तो एक छोटा सा बच्चा था और जब निकला तो बड़ा हो गया। एनएसडी खराब से खराब स्थिति में भी हिंदुस्तान की सबसे बड़ी संस्थान है। दलित थियेटर और ब्राह्मणवादी थियेटर क्या होता है। यह बेकार का विवाद है। मैं इस तरह के भेदभाव को मानता ही नहीं हूं। थियेटर, थियेटर होता है। इसमें कोई भेदभाव नहीं है।

सवाल- पद्मावती के सेट पर हमले हो रहे है। सेंसर बोर्ड फिल्मों पर कैंची चला रहा है। आप इसको कैसे देखते हैं?

जवाब- मुझे ठीक से नहीं मालूम की पद्मावती फिल्म है क्या है। मुझे पता चला कि अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मिनी के बीच कुछ ड्रिंक्स सिक्वेंस है और दोनों डांस कर रहे है। मराठवाडा में मोहम्मद शाह अब्दाली और औरंगजेब का नाम ले लो तो आप मार देंगे। उनको अपनी संस्कृति पर बहुत घमंड है। और क्यों ना हो?

मैं मारने-पीटने का समर्थन नहीं करता हूँ, लेकिन इस तरह की फ़िल्में नहीं बनानी चाहिए। इतिहास में हाथ लगाने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। इतिहास से जुड़े विषयों पर स्क्रीनप्ले लिखने के लिए बहुत दम चाहिए।

शिक्षा और समझ के आधार पर ही सेंसर बोर्ड काम करता है। किसी दूसरे देश का सेंसर आप हिंदुस्तान में नहीं लगा सकते है। वहां का समाज, वहां के लोगों की समझ हिंदुस्तान के लोगों से बेहतर है। यहां पर हम कुछ बातें नहीं कर सकते है। यह मान कर चलना चाहिए।

सवाल- पिंक फिल्म में जो मुद्दा उठाया गया था। उसको लेकर क्या सोचते है?

जवाब- जो फिल्म में दिखाया गया है वो हमेशा से होता रहा है। पहले मीडिया नहीं थी, जिसके कारण ये चीज़े सामने नहीं आई थी। पिंक करने के बाद मेरे पास लडकियों के ऐसे-ऐसे मैसेज आये थे, जिसे सुनकर अजीब लगेगा। लडकियों ने लिखा था ‘अगर आप पियूष सर नहीं होते तो हम आपको जान से मार देते। इतना नीच आपने काम किया।’

सवाल- आजकल क्या लिख रहे हैं?

जवाब- कुछ फ़िल्में लिख रहा हूं। राजकमल से कुछ किताबें भी आ रही है। ठंडा डंक (कविता संग्रह) ‘हेमलेट कभी बम्बे नहीं गया’ उपन्यास भी जल्द ही आने वाला है।

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