पुण्यतिथि विशेष : बॉलीवुड का वो 'राज कुमार', जिसके डायलॉग की दुनिया थी दीवानी

पुण्यतिथि विशेष : बॉलीवुड का वो राज कुमार, जिसके डायलॉग की दुनिया थी दीवानीराज कुमार।

लखनऊ । 'जानी', ये महज़ एक शब्द नहीं, बल्कि ये अंदाज़ है जिसको राजकुमार ने इस तरह बोला कि गली के बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर यूँ चढ़ा कि अब तक नहीं उतरा। बॉलीवुड को अपनी डायलॉग डिलीवरी से कायल करने वाले राजकुमार की आज पुण्यतिथि है। आज के ही दिन 3 जुलाई 1996 को केवल 70 वर्ष की उम्र में यह सितारा हमेशा के लिये बॉलीवुड और अपने फैन को अलविदा कह गया। राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर, 1926 को हुआ था।

राज कुमार का पाकिस्तान से मुंबई तक का सफर

राज कुमार 8 अक्टूबर, 1926 को बलूचिस्तान में पैदा हुए जो अब पाकिस्तान में आता है। एक कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे राजकुमार ने 40 के दशक में स्नातक कर मुंबई की ओर रुख किया। मुंबई, सपनों का शहर उस वक्त भी था और आज भी है, लेकिन उस वक्त तक बॉलीवुड अपने चरम पर नहीं था। लोग फिल्में तो देखते थे, लेकिन कम। राजकुमार भी मुंबई एक नौकरी की तलाश में आए थे।

मुंबई पुलिस की नौकरी छोड़ पकड़ी बॉलीवुड की राह

अपनी कद-काठी और स्नातक की डिग्री को देखते हुए मुंबई पुलिस ने उनको माहिम थाने में सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिली, लेकिन किसे पता था कि माहिम थाने का यह सब इंस्पेक्टर बॉलीवुड की राह निकल पड़ेगा। आज के ज़माने में जहां सरकारी नौकरी के लिये लाखों लोग मारे-मारे फिर रहे हैं, वहीं राजकुमार मुंबई पुलिस में सब इंस्पेक्टर की नौकरी को छोड़कर बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया में एक नया सितारा बनने निकल पड़े।

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एयरहोस्टेस से की शादी

सुपरस्टार राजकुमार रील लाइफ़ में भले ही दबंग हों, लेकिन वह रियल लाइफ़ में बड़े ही प्यार में पागल थे। एक एंग्लो इंडियन एयरहोस्टेस जेनिफर के प्यार में पड़कर उन्होंने शादी की। शादी के बाद जेनिफर ने अपना नाम बदलकर गायत्री राजकुमार कर लिया। उनके तीन बच्चे भी हुए।

फोटो - साभार इंटरनेट।

विग और सफेद जूतों के लिये मशहूर थे राज कुमार

बॉलीवुड में फिरोज़ खान और राज कुमार के लिये अफवाह थी कि दोनों अपनी विग से एक दूसरे से लड़ाई करते हैं। फिर एक पार्टी में दोनों एक दूसरे के पीछे भी भागे। ये देखना लोगों के लिये न भूलने वाले पलों में से एक है। राज कुमार अपने फैन्स के बीच अपने सिगार के लिये बड़ी चर्चा का विषय थे। बाद में इस सिगार को और सितारों ने भी अपने स्टाइल के तौर पर इस्तेमाल किया।

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गोविंदा की शर्ट का जब बना लिया रुमाल

उस वक्त गोविंदा एक स्ट्रगलर थे और राजकुमार बॉलीवुड के सरताज। एक फिल्म में दोनों साथ काम कर रहे थे तो राजकुमार को गोविंदा की शर्ट पसंद आ गई। इस पर गोविंदा ने अपनी शर्ट राजकुमार को दे दी। राजकुमार ने इस शर्ट को रुमाल बना डाला और दो दिन बाद गोविंदा को राजकुमार की ज़ेब में नज़र आया।

सिगार लिये राज कुमार। फोटो- साभार इंटरनेट।

डायलॉग डिलीवरी की दुनिया थी कायल

राजकुमार के डायलॉग आज भी बच्चे-बच्चे की जुबान पर हैं। फिल्म 'पैगाम' का वो डायलॉग तो आपने सुना ही होगा, "दुनिया जानती है कि राजेश्वर सिंह जब अपनी दोस्ती निभाता है तो अफ़साने बन जाते हैं, मगर दुश्मनी निभाता है तो इतिहास लिखे जाते हैं।" 1959 में आई इस फिल्म के हीरो तो दिलीप कुमार थे, लेकिन बेहतरीन डायलॉग पर पब्लिक ने राजकुमार को अपने दिल का राजकुमार बना लिया।

राज कुमार जी के कुछ फेमस डायलॉग

  • "चिनॉय सेठ, जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वो दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं मारते।" फिल्म 'वक्त'
  • "हम तुम्हें मारेंगे और ज़रूर मारेंगे। लेकिन वह वक्त भी हमारा होगा, बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी।" फिल्म 'सौदागर'
  • "हमारी ज़बान भी हमारी गोली की तरह है, दुश्मन से सीधी बात करती है।" फिल्म 'तिरंगा'
  • "हम आँखों से सुरमा नहीं चुराते, हम आँखें ही चुरा लेते हैं।" फिल्म 'तिरंगा'
  • "हम तुम्हें वो मौत देंगे, जो न तो क़ानून की किताब में लिखी होगी और न ही किसी मुजरिम ने सोंची होगी।" फिल्म 'तिरंगा'
  • "हम कुत्तों से बात नहीं करते।" फिल्म 'मरते दम तक'
  • "हम तुम्हें ऐसी मौत मारेंगे कि तुम्हारी आने वाली नस्लों की नींद भी उस मौत को सोंच कर उड़ जाएगी।" फिल्म 'मरते दम तक'
  • "काश कि तुमने हमें आवाज़ दी होती तो हम मौत की नींद से भी उठकर चले आते।" फिल्म 'सौदागर'

राजकुमार की फिल्मों में उनकी डायलॉग डिलीवरी इतनी गज़ब की होती थी कि उनके फैन्स सिनेमा से बाहर निकलकर उनके डायलॉग को कॉपी किया करते थे।

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