शुक्रवार को ही क्यों रिलीज़ होती हैं फिल्में?

शुक्रवार को ही क्यों रिलीज़ होती हैं फिल्में?भारत में 50 के दशक तक फिल्मों का शुक्रवार को रिलीज होना शुरू नहीं हुआ था।

फिल्म पसंद करने वालों को हर हफ्ते शुक्रवार का इंतजार रहता है। भारत में शुक्रवार को फिल्म रिलीज करने का ट्रेंड काफी वर्षों से चला आ रहा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर डायरेक्टर-प्रोड्यूसरों को शुक्रवार से इतना लगाव क्यों है और क्यों इसी दिन अधिकतर फिल्में रिलीज होती हैं।

हममें से अक्सर लोगों का मानना है कि भारत में शुक्रवार को फिल्म रिलीज का कॉन्सेप्ट हॉलीवुड से आया। फिल्म गोन विद द विंड 15 दिसंबर 1939 को शुक्रवार के दिन रिलीज हुई थी। तभी से वहां हर फिल्म शुक्रवार को रिलीज होने लगी। जबकि भारत में 50 के दशक तक फिल्मों का शुक्रवार को रिलीज होना शुरू नहीं हुआ था।

पहली फिल्म जो शुक्रवार को रिलीज हुई थी

फिल्म नील कमल 24 मार्च 1947 को सोमवार के दिन रिलीज हुई थी। इसके बाद ऐतिहासिक फिल्म मुगल-ए-आजम पहली ऐसी फिल्म थी जो 5 अगस्त 1960 को शुक्रवार के दिन रिलीज हुई थी।

उस समय कलर टीवी का प्रचलन नहीं था फिर भी फिल्में लगातार शुक्रवार को ही रिलीज होती थीं। मुंबई की ज्यादा स्मॉल स्केल इंडस्ट्री ने अपने कर्मियों को फ्राइडे को हाफ डे देना शुरू कर दिया ताकि लोग फिल्म देखने जा सकें।

एक कारण यह भी है कि शुक्रवार हफ्ते का आखिरी वर्किंग डे होता है। ज्यादातर स्कूल-कॉलेजों के साथ ऑफिसों में शनिवार-रविवार को छुट्टी होती है। इन दो दिनों में आराम के साथ लोग परिवार के साथ वक्त बिताते हैं, शॉपिंग करते हैं, घूमते हैं, फिल्में देखते हैं। कुल मिलाकर खूब पैसे खर्च करते हैं तो सिनेमाहॉल में भीड़ जुटना भी लाजिमी है इसलिए भी शुक्रवार को फिल्म रिलीज की जाती है।

भारत में कहते हैं कि शुक्रवार लक्ष्मी का दिन होता है। प्रोड्यूसरों का मानना है कि शुक्रवार को फिल्म रिलीज करने से उनपर लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी।

दूसरे दिनों में रिलीज हुई ये फिल्में

कई डायरेक्टर और प्रोड्यूसरों ने ट्रेंडसेटर तोड़ते हुए दूसरे दिनों में भी फिल्में रिलीज कीं। इसमें 2006 में राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म 'रंग दे बसंती' जो बुधवार को रिलीज हुई और 'सुल्तान' गुरुवार को रिलीज हुई थी। दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी।

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