मौसम बदल रहा है इन नुस्खों से बचाएं गिरते बाल

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जब-जब मौसम करवट बदलता है, इसका सीधा असर हमारे बालों की सेहत पर नज़र आने लगता है। गर्मियों की विदाई होने लगी है और आहिस्ता आहिस्ता मानसून अपने पैर पसारने की तैयारी में हैं। ये ठीक वही दौर है जब बालों के झड़ने का क्रम सामान्य से ज्यादा हो जाता है और ऐसे में ये चिंता का विषय भी हो जाता है।

मौसम परिवर्तन के अलावा खान-पान में लौह तत्वों की कमी, लंबे समय से चली आ रही कोई बीमारी, रसायनयुक्त दवाएं, मानसिक तनाव, हार्मोन्स का संतुलन बिगडऩा, विकिरण के समझ आना और प्रसव के बाद अक्सर बालों के झडऩे की शिकायतें आती है। एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया जैसे रोगों के बाद तो बाल पूरी तरह से झड़ जाते हैं और नए बाल नहीं बनते हैं। बालों के झड़ने को रोकने के लिए आदिवासी अंचलों में हर्बल जानकार कुछ हर्बल उपचार को अपनाते हैं। इस सप्ताह हर्बल आचार्य में इसी से जुड़ी जानकारी साझा करने जा रहा हूं।

नारियल या बादाम के तेल से बालों की मालिश 

नारियल के तेल या बादाम के तेल से बालों की हल्की-हल्की मालिश 1.15 मिनट तक करें और फिर एक गर्म तौलिए को बालों पर लपेट लें और इसे 2-3 मिनट तक रखा रहने दिया जाए। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करने से बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है।

अमरबेल या तिल का तेल

डांग के आदिवासी अमरबेल को कूटकर उसे तिल के तेल में 20 मिनट तक उबालते हैं और इस तेल को कम बाल या गंजे सिर पर लगाने की सलाह देते है। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार यह तेल बालों के झडऩे का सिलसिला कम करता है और गंजे सिर पर भी बाल लाने में मदद करता है।

तिल की जड़ और पत्तों का काढ़ा

आदिवासियों के अनुसार तिल की जड़ और पत्तों का काढ़ा बना लिया जाए और इससे बालों को धोया जाए तो बालों का रंग काला हो जाता है। डाँग आदिवासियों की मानी जाए तो तिल के तेल को प्रतिदिन बालों में लगाने से बाल काले हो जाते है और इनका झडऩे का क्रम रुक जाता है साथ ही रूसी से भी छुटकारा मिल जाता है।

हर दिन सुबह आधा मुठ्ठी काले या सफेद तिल का सेवन करें, ये बीज कैल्शियम से भरपूर होते हैं जो कि बालों की बेहतर सेहत के लिए आवश्यक एक तत्व है। आदिवासी हर्बल जानकारों की मानी जाए तो तिल के तेल में थोड़ी सी मात्रा गाय के घी और अमरबेल के चूर्ण की मिला ली जाए और सिर पर रात में सोने से पहले लगा ली जाए तो बाल चमकदार, खूबसूरत होने के साथ घने हो जाते है और यही फॉर्मूला गंजेपन को रोकने में मदद भी करता है।

अरंडी और बादाम का तेल

सप्ताह में एक दिन बालों को अरंडी और बादाम के तेल के मिश्रण से मालिश करें। दोनों की समान मात्रा लेकर हल्का सा गुनगुना किया जाए और हल्के-हल्के हाथों से बालों की जड़ों तक मालिश की जाए बालों को मजबूती मिलती है।

नीम के बीजों से प्राप्त तेल 

असमय बालों के पकने और बालों के झडऩे के क्रम को रोकने के लिए पातालकोट के आदिवासी नीम के बीजों से प्राप्त तेल को रात में सिर पर लगा लेते हैं और सुबह सिर को साफ धो लिया जाता है। माना जाता है कि नीम के बीजों का तेल बालों में एक महीने तक लगातार इस्तेमाल करने से बालों का झडऩा रुक जाता है। डेंड्रफ होने पर 100 मिली नारियल तेल में नीम के बीजों का चूर्ण (20 ग्राम) अच्छी तरह से मिलाकर सप्ताह में दो बार रात में मालिश की जाए, आराम मिल जाता है।

बहेड़ा के बीजों का चूर्ण या जैतून तेल

बहेड़ा के बीजों के चूर्ण को नारियल या जैतून के तेल में मिलाकर गुनगुना गर्म किया जाए और इस तेल को बालों पर लगाया जाए, बाल चमकदार हो जाते हैं साथ ही इनकी जड़ें भी मजबूत हो जाती हैं। बालों की समस्याओं में आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार त्रिफला का सेवन हितकर माना गया है।

मेथी की सब्जी

मेथी की सब्जी का ज्यादा सेवन बालों की सेहत के लिए उत्तम माना जाता है। मेथी के बीजों का चूर्ण तैयार करके पानी के साथ मिलाया जाए और पेस्ट बना लिया जाए। इस पेस्ट को सिर पर लेपित करके आधे घंटे के लिए रख दिया जाए और बाद में इसे धो लिया जाए ऐसा करने से बालों से डेंड्रफ खत्म हो जाते हैं ऐसा सप्ताह में कम से कम दो बार किया जाना चाहिए।

गुड़हल या जासवंत के लाल फूल 

गुड़हल या जासवंत के लाल फूलों को एकत्र करके करके कुचल लिया जाए और नहाने से 10 मिनट पहले सिर पर रगड़ा जाए, बालों के काला होने में मदद करता है। साथ ही एक बेहतरीन कंडीशनर की तरह काम करता है।

सहजन या मुनगा की पत्तियां

सहजन या मुनगा की पत्तियों को कुचलकर रस तैयार किया जाए और प्रतिदिन नहाने से पहले बालों में लगाया जाए तो सिर से रूसी या डेंड्रफ खत्म कर देता है। इस रस का इस्तेमाल कम से कम एक सप्ताह तक करना जरूरी है। सहजन की फल्लियों को उबालकर पल्प तैयार किया जाए और नहाते वक्त इस पल्प को सिर पर शैंपू की तरह इस्तेमाल किया जाए तो यह बाजार में उपलब्ध किसी भी विटामिन ई युक्त शैम्पू से बेहतर साबित होगा। आधुनिक विज्ञान भी सहजन में पाए जाने वाले विटामिन ई की पैरवी जोर शोर से करता है।

पारिजात की पत्तियां और बीजों का चूर्ण 

पारिजात आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार पारिजात की पत्तियों और बीजों का चूर्ण तेल में मिलाकर प्रतिदिन रात को बालों की जड़ों तक मालिश करते हुए लगाया जाए तो बालों का पुन: उगना शुरू हो जाता है साथ ही बालों के झड़ने को रोकने में मदद करता है।

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