भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की पुर्णयतिथि पर पढ़िये उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें 

भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की पुर्णयतिथि पर पढ़िये उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें भारतीय फिल्म जहगत के पितामह दादा साहेब फाल्के।

रिपोर्टः श्वेता तिवारी

लखनऊ। भारतीय सिनेमा के पितामह कहें जाने वाले दादा साहेब की आज पुण्य तिथि है। दादासाहब फालके का पूरा नाम धुंडीराज गोविन्द फालके है और इन्हेंने फ़िल्म निर्माण, निर्देशन, पटकथा लेखन आदि विविध क्षेत्रों में भारतीय सिनेमा को अपना योगदान दिया था। आइये आपको बताते हैं दादा साहेब फाल्के के जीवन से जुड़े कुछ खास किस्से...

  • दादा साहब फाल्के ने 1913 में पहली मूक फ़िल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाई थी, जिसको 3 मई 1913 में बंबई (मुंबई) के 'कोरोनेशन थिएटर' में पहली बार दर्शकों को दिखाया गया था।
  • 1917 तक वे 23 फ़िल्में बना चुके थे। उनकी इस सफलता से कुछ व्यवसायी इस उद्योग की ओर आकृष्ट हुए और दादा साहब की साझेदारी में ‘हिन्दुस्तान सिनेमा कम्पनी’ की स्थापना हुई।
  • 20 वर्षों में उन्होंने कुल 95 फ़िल्में और 26 लघु फ़िल्में बनाई।
  • दादा साहब फाल्के के फ़िल्म निर्माण की ख़ास बात यह है कि उन्होंने अपनी फ़िल्में बंबई के बजाय नासिक में बनाई।
  • वर्ष 1913 में उनकी फ़िल्म 'भस्मासुर मोहिनी' में पहली बार महिलाओं, दुर्गा गोखले और कमला गोखले, ने महिला किरदार निभाया। इससे पहले पुरुष ही महिला किरदार निभाते थे।
  • दादा साहब ने कुल 125 फ़िल्मों का निर्माण किया, जिसमें से तीन-चौथाई उन्हीं की लिखी और निर्देशित थीं।
  • दादा साहब की अंतिम मूक फ़िल्म 'सेतुबंधन' 1932 थी, जिसे बाद में डब करके आवाज़ दी गई। उस समय डब करना भी एक शुरुआती प्रयोग था।
  • दादा साहब ने जो एकमात्र बोलती फ़िल्म बनाई उसका नाम 'गंगावतरण' है।
  • 16 फ़रवरी 1944 को 74 वर्ष की अवस्था में दादा साहेब फाल्के का नासिक में निधन हुआ था।
  • फाल्के शताब्दी वर्ष 1969 में भारतीय सिनेमा की ओर फाल्के के अभूतपूर्व योगदान के सम्मान में “दादा साहेब फाल्के सम्मान” शुरु हुआ। राष्ट्रीय स्तर का यह सर्वोच्च सिने पुरस्कार सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है। उनकी स्मृति में यह पुरस्कार प्रतिवर्ष दिया जाता है।

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