गुरुवार रात पर्स खोया था, शुक्रवार सुबह निधन की ख़बर आई

Jamshed QamarJamshed Qamar   31 Jan 2017 3:13 PM GMT

गुरुवार रात पर्स खोया था, शुक्रवार सुबह निधन की ख़बर आईओम पुरी

हिंदी फिल्म जगत के चंद सबसे बेहतरीन अदाकारों में से एक ओम पुरी साहब नहीं रहे। ये ख़बर जिसने भी सुनी वो हैरान रह गया क्योंकि ओम पुरी साहब बिल्कुल सेहतमंद थे। फिलहाल वो युवा निर्देशक ख़ालिद क़िदवई की फ़िल्म 'रामभजन ज़िंदाबाद' नाम की फ़िल्म कर रहे थे। एक वेबसाइट पर छपी ख़बर के मुताबिक ख़ालिद क़िदवई गुरुवार रात को ओमपुरी साहब के साथ ही थे। वो बताते हैं कि शाम पांच बजे वो ओम पुरी के घर पहुंचे तो देखा कि वहां उनका इंटरव्यू होना था, जिसके लिए उन्होंने मना कर दिया।

उन्होंने ख़ालिद से कहा कि उन्हें मनोज पहवा के घर एक जलसे में जाना है और वो चाहते हैं कि ख़ालिद उनके साथ चलें। ख़ालिद ने उन्हें मना कर दिया क्योंकि उनके पास इंविटेशन नहीं था। ओम पुरी ने कहा "ठीक है, लेकिन आप मुझे वहां तक छोड़ दें"। ओम पुरी वहां पहुंचे लेकिन फिर उन्होंने खालिद से कहा कि यहां से चलते हैं। रात दस-साढ़े दस बजे वो वहां से निकले।

ओम पुरी निर्देशक ख़ालिद क़िदवई के साथ

वहां से वो पहले त्रिशूल अपने घर गए, जहां नंदिता पुरी (दूसरी पत्नी) रहती हैं। वहां, उनकी नंदिता से काफी बहस हुई। बाहर आकर ओम पुरी साहब के चेहरे पर थोड़ी उदासी थी, वो अचानक अपने बेटे इशांत को याद कर रहे थे। उन्होंने खालिद से कहा "इशांत से मिल लेते हैं"। ख़ालिद किदवई की गाड़ी थोड़ी देर में ओम पुरी के बेटे की सोसाइटी के बाहर रुकी। उन्होंने उसे फोन किया और बाहर आने के लिए कहा। उस वक्त इशान किसी पार्टी में था। ओम साहब ने ड्रिंक बनाया और कहा "इस ड्रिंक के खत्मं होने तक इशांत आ जाता है तो ठीक वरना चल लेंगे" ड्रिंक खत्म हो गया लेकिन इशांत नहीं आया। पुरी साहब भावुक हो रहे थे उन्होंने ख़ालिद से बेटे के बारे में बातें भी की और उसके मिलने न आने पर नाराज़गी जताई। रात ग्यारह बजे उन्होंने ओम साहब को उनके घर पर छोड़ा और वापस अपने घर आ गए। कार पार्क करते वक्त ख़ालिद किदवई ने देखा कि ओम पुरी का पर्स उनकी कार की सीट पर पड़ा था। खालिद कहते हैं कि उन्होंने सोचा कि रात बारह बजे फोन करना ठीक नहीं है सुबह फोन करके उन्हें बता देंगे।

ख़ालिद साहब ने वेबसाइट को बताया कि सुबह 6 बजे उन्होंने ओम पुरी को फोन किया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। फिर उन्होंने ओम साहब के ड्राइवर को फोन करके कहा कि वो उनका पर्स ले जाए। कुछ घंटो बाद, सुबह दस बजे उसी ड्राइवर का फोन आया और उसने बताया कि ओम साहब नहीं रहे।

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