हमेशा देर कर देता हूं मैं - मुनीर नियाज़ी

Jamshed QamarJamshed Qamar   12 Jan 2017 12:50 AM GMT

हमेशा देर कर देता हूं मैं - मुनीर नियाज़ीमुनीर नियाज़ी

साल 1928 में पंजाब के होशियारपुर में मुहम्मद फ़तह खान के घर में एक बेटे ने जन्म लिया। उसका नाम रखा गया मुहम्मद मुनीर खान नियाज़ी। साल भर ही गुज़रा था कि फ़तह खान साहब का इंतकाल हो गया। ज़रा सी उम्र में वालिद के इंतकाल से मुनीर के घर के हालात बदल गए। जब मुनीर बड़ा हुआ तो उसने अपना नाम बदल लिया अब वो मुहम्मद मुनीर खान नियाज़ी नहीं, सिर्फ मुनीर नियाज़ी हो गया।

पाकिस्तान की जदीद शायरी में मुनीर नियाज़ी, फैज़ अहमद फैज़ और नूनकीम राशिद के बाद आने वाला नाम है। उनका लहजा बेहद नर्म और ख्याल मख़मल की तरह मुलायम थे। न उनकी आवाज़ में कभी तल्खी सुनी गई न उनकी शायरी में। बड़ी से बड़ी बात को बिना हंगामे के आसानी से कहने के लिए पहचाने जाने वाले मुनीर नियाज़ी की शायरी में एक नयापन है। उनकी शायरी में ज़बान की ऐसी रिवायत है कि जिसमें कई मुल्की और ग़ैरमुल्की ज़बानों की विरासत मिलती है।

आइये सुनते हैं मुनीर नियाज़ी की एक बेहद मक़बूल नज़्म

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