‘होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है’ के लेखक का 8 फरवरी 2016 को हुआ था निधन

‘होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है’ के लेखक का 8 फरवरी 2016 को हुआ था निधननिदा फाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 में दिल्ली में हुआ था।

सुदीप सिंह

लखनऊ। हिन्दी और उर्दू के मशहूर शायर, निदा फाज़ली की 8 फरवरी 2016 को निधन हो गया था। उनका जन्म 12 अक्टूबर 1938 में दिल्ली में हुआ था। निदा फाज़ली शायरों की दुनिया का एक मशहूर नाम है जो हमेशा लोगों के दिलों में अपने लिखे हुए गीतों के ज़रिये ज़िंदा रहेगा।

बचपन से था लिखने का शौक

निदा को बचपन से ही लिखने का शौक था और ये हुनर उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला थी जो कि खुद एक शायर थे। ग्वालियर से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद निदा काम की तलाश में मुंबई आ गए जहां उन्हें कई बड़े पत्रिकाओं में लिखने का मौका मिला। उनकी सरल और प्रभावकारी लेखनशैली ने शीघ्र ही उन्हें देश भर में सम्मान और लोकप्रियता दिलाई।

निदा फाज़ली को उनके लेखन की प्रेरणा बहुत ही अलग ढंग से मिली थी। वह एक दिन मंदिर के पास से गुज़र रहे थे जहां पर उन्होंने किसी को सूरदास का भजन मधुबन तुम क्यौं रहत हरे? बिरह बियोग स्याम सुंदर के ठाढ़े क्यौं न जरे? गाते सुना, जिसमें कृष्ण के मथुरा से द्वारिका चले जाने पर उनके वियोग में डूबी राधा और गोपियाँ फुलवारी से पूछ रही होती हैं ऐ फुलवारी, तुम हरी क्यों बनी हुई हो? कृष्ण के वियोग में तुम खड़े-खड़े क्यों नहीं जल गईं? वह सुन कर निदा को लगा कि उनके अंदर दबे हुए दुख की गिरहें खुल रही है। फिर उन्होंने कई अन्य कवियों को भी पढ़ा और उन्होंने पाया कि इन कवियों की सीधी-सादी, बिना लाग लपेट की, दो-टूक भाषा में लिखी रचनाएँ अधिक प्रभावकारी है तब से वैसी ही सरल भाषा सदैव के लिए उनकी अपनी शैली बन गई।

ऐसे ही उनके जीवन की कुछ खास बातें

• निदा फाज़ली का असली नाम “मुक़्तदा हसन” रखा गया था। निदा फाज़ली उनका लेखन का नाम है।

• निदा अपने स्कूल के दिनों में एक लड़की से मन ही मन प्रेम करते थे। लेकिन एक दिन कॉलेज के बोर्ड पर एक नोटिस दिखा “कुमारी टंडन का एक्सीडेण्ट हुआ और उनका देहान्त हो गया है।“ और यही वजह थी जिसने एक महान शायर को दुनिया को तोहफे में दिया।

• निदा अपनी पिता की मृत्यु पर नहीं गए थे| उन्होनें अपने पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए एक कविता लिखी थी “वालिद की वफात पर”।

• उनकी एक ही बेटी है जिसका नाम तहरीर है।

• उर्दू कविता का उनका पहला संग्रह 1969 में छपा।

• उनका पहला लिखा फ़िल्मी गाना फ़िल्म रज़िया सुल्ताना में था “तेरा हिज्र मेरा नसीब है, तेरा गम मेरी हयात है”|

• उनके द्वारा रची गयी कई रचनाएं जो की लोगो के जुबान पर आज भी है जैसे- होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है, कभी किसी को मुक़म्मल जहाँ नहीं मिलता, तू इस तरह से मेरी ज़िंदग़ी में शामिल है और भी ऐसी कई अन्य गीत जो उनके अस्तित्व को जिंदा रखते है।

• उनकी पहली प्रकाशित संकलन “लफ़्ज़ों के फूल” थी|

• निदा फाज़ली को 1998 में उनकी द्वारा लिखी काव्य संग्रह “खोया हुआ सा कुछ” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया था। उन्हें 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया|

• उनके द्वारा लिखे गयी शेर “घर से मस्जिद है बड़ी दूर चलो यू कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।’’ के कारण पकिस्तान में कई कट्टरपंथी मुस्लिमों का सामना करना पड़ा था, जिसकी वजह से उन्हें किसी भी सम्मेलन में सम्मिलित होने से मना कर दिया गया।

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