क़िस्सा मुख़्तसर : मजाज़ के बाल

क़िस्सा मुख़्तसर : मजाज़ के बालमजाज़ लखनवी

मजाज़ के चाहने वालो में ज़्यादातर लड़कियां थी। इस्मत ने कई जगह लिॆखा है कि तब लख़नऊ और अलीगढ़ के तमाम गर्ल्स हॉस्टल की तकियों के नीचे मजाज़ की तस्वीरें मिलती थी। इस सब के बावजूद मजाज़ बेहद सुलझे और सादगीपसंद इंसान थे। उस वक्त के तमाम मशहूर शायर बड़े और लच्छेदार बाल रखते थे लेकिन मजाज़ के बाल भी उनकी शख़्सियत की तरह सरल और सादे थे।

एक रोज़ मजाज़ किसी बात से नाराज़ थे। उनके खास दोस्त मुनीश सक्सेना ने उनसे गुस्सा छोड़कर मूड ठीक करने को कहा, लेकिन मजाज़ की नाराज़गी कायम थी। मन बदलने के लिए मुनीश ने कहा "अमा बाल बहुत बड़े हो गए तुम्हारे, चलो बाल कटवाकर आते हैं" मजाज़ शुरु में तो नहीं माने लेकिन जब मुनीश ने कई बार कहा तो वो झल्लाकर उठे और बोले, "चलो"।


अमीनाबाद के एक सलून के सामने आकर दोनों रुक गए। मुनीश दुकान के ऊपर लगा बोर्ड पढ़ने लगे, मजाज़ का मूड पहले ही ख़राब था, गुस्से में बोले "अब चलें अंदर या यहीं पीएचडी करोगे?"। दोनों सलून में दाख़िल हुए। मजाज़ सीधे जाकर आइने के सामने रखी कुर्सी पर बैठ गए और मुनीश पीछे रखी एक बेंच पर। बाल काटने वाला शख्स मजाज़ के करीब आया, और बाल छूते हुए बोला, "क्या कर दूं जनाब?"। मजाज़ ने आइने में, पीछे बैठे मुनीश को देखा और फिर बाल काटने वाले शख़्स से नर्म लहजे में पूछा, "आप बाल बड़े कर लेते हैं क्या"। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं तो"। मजाज़ गुस्से में बोले, "तो फिर छोटे कर दीजिए"। मुनीश हसते-हसते बेंच से गिर पड़े।

- मजाज़ और मुनीश के दोस्त एस.एम मेहदी के एक लेख से।

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