विरार में जन्में गोविंद अहूजा के ‘गोविंदा’ बनने की कहानी, आज सालगिरह है

विरार में जन्में गोविंद अहूजा के ‘गोविंदा’ बनने की कहानी, आज सालगिरह हैगोविंदा

वो शुक्रवार की सुबह थी। तारीख थी 28 फरवरी सन 1986। बंबई के प्रथ्वी थियेटर के बाहर, उसी दिन रीलीज़ हुई एक फिल्म का बड़ा सा पोस्टर लगा था। पोस्टर में शशि कपूर, शत्रुघन सिन्हा, नीलम और राजकिरन के साथ एक अजनबी चेहरा भी था। उस वक्त उस चेहरे को कोई नहीं पहचानता था, कोई नहीं जानता था। और किसी को नहीं पता था कि ये चेहरा आने वाले दशकों तक हिंदी फिल्मों पर राज करने वाला है। पोस्टर पर चेहरा था गोविंदा का और फिल्म का नाम था ‘इल्ज़ाम’

फिल्म इल्ज़ाम का पोस्टर

डॉ राही मासूम रज़ा, राम केलकर और फैज़ सलीम की लिखी और शिबू मित्रा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इल्ज़ाम’ में गोविंदा की अदाकारी और डांस ने ऐसे चार चांद लगाए कि बॉक्स ऑफिस पर हड़कंप मच गया और 21 दिसंबर 1963 को विरार के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मा लड़का, गोविंद अरुण अहूजा से सुपस्टार ‘गोविंदा’ बन गया।

मुंबइया फिल्मों में संघर्ष की कहानियां तो बेशुमार हैं लेकिन उन तमाम कहानियों में गोविंदा की कहानी शायद सबसे अलग और दिलचस्प है। गोविंदा को बॉलिवुड में अपना मकाम हासिल करने के लिए पूरे चौदह साल का संघर्ष करना पड़ा। वो बताते हैं कि उस दौर में वो जहां भी ऑडिशन के लिए जाते थे उनसे कहा जाता था कि “तुम तो अभी बच्चे लगते हो।“ अपने संघर्ष के दिनों में वो पहले स्ट्रगलर थे जो अपनी वीएचएस रिकार्ड करके प्रोड्यूसर्स को भेजते थे।

जद्दोजहद खत्म होने के बाद, गोविंदा ने एक के बाद एक हिट फिल्में देनी शुरु कर दी। हिंदी फिल्मों के इतिहास में गोविंदा वो पहले कलाकार हैं जिसके पास एक ही वक्त में सबसे ज़्यादा फिल्में होने का रिकार्ड दर्ज है। साल 1985-86 में गोविंदा के पास 40 फिल्में थीं।

बड़े मियां छोटे मियां के रिलीज़ पर गोविंदा और अमिताभ बच्चन

गोविंदा के पिता अरुण अहूजा एक्टर और प्रोड्यूसर थे और मां निर्मला देवी शास्त्रीय संगीत की गायिका थीं, ज़ाहिर है कला गोविंदा को विरासत में मिली थी, शायद यही वो विरासत थी जिसने उन्हे इंडस्ट्री में एक के बाद एक हिट फिल्मों की लाइन लगा दी। एक दौर था जब इंडस्ट्री की हर बड़ी हिरोइन गोविंदा के साथ काम करना चाहती थी। 80 और 90 के दशक में नीलम, रानी मुखर्जी और रवीना टंडन के साथ उनकी जोड़ी हिट रही

गोविंदा बहुमुखी प्रतिभा के धनवान हैं। बॉलिवुड आजतक उनकी कॉमिक टाइमिंग का सानी नहीं ढूंढ पाया। उन्होंने डेविड धवन के साथ मिलकर 'राजा बाबू', 'कुली नंबर 1', 'शोला और शबनम', 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'पार्टनर' जैसी तमाम कई हिट फ़िल्में दीं। फिल्म 'हद कर दी आपने' में गोविंदा ने छह रोल एक साथ किये।

सिर्फ कॉमेडी नहीं उन्होंने सिनेमा की हर शैली में काम किया फिर चाहे वो कॉमेडी हो, एक्शन हो, रोमांस हो या फिर ड्रामा। साल 2000 में गोविंदा ने पहली बार अपने कॅरियर में खलनायक का रोल निभाया जिसके लिए उन्हें बेस्ट खलनायक का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद वे कुछ सालों तक फिल्मों से दूर रहे और 2004 में राजनीति में भी अपने कॅरियर की शुरुआत की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी जॉइन की लेकिन विवादों के चलते जल्दी ही राजनीति को अलविदा कह दिया।

कांग्रेस रैली में गोविंदा

साल 2006 से गोविंदा ने फिल्मों में वापसी की और 'भागमभाग' जैसी हिट फिल्म दी जिसके बाद वे कई मल्टीस्टार फिल्मों में नज़र आये जैसे कि 'सलामे-इश्क', 'पार्टनर', 'किल दिल' और 'होलीडे'। अब गोविंदा बहुत ही कम फिल्मों में नज़र आते हैं। 'जग्गा जासूस' उनकी आने वाली फिल्म है। गोविंदा को उनके जन्मदिन पर गांव कनेक्शन की तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

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