मेले में आकर्षण का केन्द्र बने विदेशी पक्षी

मेले में आकर्षण का केन्द्र बने विदेशी पक्षीगाँव कनेक्शन

इलाहाबाद। माघ मेला लगते ही संगम का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है, पर्यटक भी भरी संख्या में आने लगते हैं। धर्म, अध्यात्म और भक्ति का यह मेला खुद में ही एक आकर्षण का केंद्र है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मेले में कई तरह की झांकियां, झूले लगे हुए हैं, लेकिन ठण्ड में संगम आने वाले विदेशी पक्षी मेले में सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र हैं।

साइबेरिया से आने वाले ये पक्षी ठण्ड के शुरुआत में इस इलाहाबाद में आ जाते हैं और ठण्ड खत्म होते ही यहां से फिर उड़ान भर लेते हैं, ये पक्षी कबूतर और बतख की तरह होते हैं। ये देखने में कबूतर जैसे दिखते हैं, जबकि इनके पैर और चोच बतख जैसे होती है। संगम में ये हजारों की संख्या में आपको देखनो को मिल जाएंगे।

वाराणसी से इलाहाबाद कल्पावास करने आये प्रकाश तिवारी (76 वर्ष) बतातें है, ''हम हर दूसरे दिन इन पक्षियों को दाना खिलाने आते है, यहां आकर जो शान्ति मिलती है वो अद्भुत होती है। संगम का ये नज़ारा हमे सबसे अधिक पसंद है।’’

वाराणसी से राजेश्वर भी यहां परिवार के साथ कल्पवास करने हर वर्ष आते हैं, वो बताते हैं, ''कल्पवास के दौरान हम एक महीने प्रयाग में बिताते हैं और इस धर्म की नगरी को खूब जीते हैं और ये पक्षी भी हमारी तरह ही हैं, माघ के शुरू होते ही हमारे साथ आते हैं और जैसे ही हम यहां से जाते हैं वैसे ही ये पंछी भी चले जाते हैं।’’

हजारों सैलानी रोज संगम आते हैं, बोटिंग करते हुए इन पंक्षियों को दाना खिलाते हैं, इस वजह से कई दाना बेचने वालों का भी अच्छा मुनाफा हो जाता है। इन पक्षियों को दाने के रूप में बेसन की सेव दी जाती है, जो पांच और 10 रुपये में मिलती है। बहुत से नाविक तो अपनी नाव में ही पक्षियों का दाना बेचते हैं। ऐसे ही एक नाव वाला मनीष बताता है, ''तीन महीने के लिए इन पक्षियों का झुण्ड यहां आता है और उसे देखने और बोटिंग करने बहुत लोग इसी समय में यहां आते हैं जिससे हमें फायदा होता है। दिन में 400 से 500 रुपये का दाना बिक जाता है और लागत निकलने के बाद 250 रुपये तक बचत हो जाती है।’’

रिपोर्टर - आकाशद्विवेदी

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